कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर “मछली-भात” यानी बंगाल की पारंपरिक भोजन संस्कृति राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है। बंगाल की पहचान मानी जाने वाली मछली-चावल की थाली अब केवल भोजन नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतीक बन चुकी है। राज्य में नई सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari की ओर से सरकारी कैंटीनों में मात्र 5 रुपये में मछली-चावल उपलब्ध कराने की पहल ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
यह वही मुद्दा है जिसे लेकर चुनाव प्रचार के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee लगातार बीजेपी पर हमला बोलती रही थीं। ममता बनर्जी का आरोप था कि यदि बीजेपी बंगाल की सत्ता में आई तो राज्य की “मछली खाने की संस्कृति” पर खतरा मंडराने लगेगा। उन्होंने कई जनसभाओं में कहा था कि बंगाल की संस्कृति, खान-पान और सामाजिक पहचान को बदला नहीं जा सकता। खासकर “माछ-भात” बंगाली जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा है।
अब सत्ता परिवर्तन के बाद बीजेपी सरकार की ओर से 5 रुपये की मछली-भात योजना सामने आने के बाद राजनीतिक समीकरण बदलते दिखाई दे रहे हैं। खबरों के अनुसार राज्य सरकार सरकारी कैंटीनों में बेहद कम कीमत पर मछली-चावल की थाली उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है। पहले इन कैंटीनों में अंडा-भात दिया जाता था, लेकिन अब मछली-भात को शामिल कर बड़ा संदेश देने की कोशिश की जा रही है।
बंगाल की राजनीति में भोजन हमेशा बड़ा मुद्दा रहा
पश्चिम बंगाल में भोजन केवल खान-पान का विषय नहीं, बल्कि भावनाओं और सांस्कृतिक अस्मिता से जुड़ा मामला माना जाता है। “माछ-भात” बंगाली समाज की पहचान का प्रतीक है। चुनावों के दौरान भी यह मुद्दा कई बार उठा। बीजेपी पर विपक्ष ने आरोप लगाया कि वह बंगाल की सांस्कृतिक परंपराओं को बदलना चाहती है, जबकि बीजेपी लगातार यह कहती रही कि वह बंगाल की संस्कृति का सम्मान करती है।
अब 5 रुपये की मछली-भात योजना को बीजेपी सरकार की “सांस्कृतिक जवाबी रणनीति” माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बीजेपी यह संदेश देना चाहती है कि वह बंगाल की परंपराओं और खान-पान की विरोधी नहीं है। बल्कि गरीब और मजदूर वर्ग तक सस्ती दरों पर भोजन पहुंचाने की कोशिश कर रही है।
गरीबों और श्रमिकों को मिलेगा लाभ
सरकारी सूत्रों के अनुसार इस योजना का मुख्य उद्देश्य दिहाड़ी मजदूरों, रिक्शा चालकों, गरीब कामगारों और निम्न आय वर्ग के लोगों को सस्ता पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है। बंगाल में पहले से “मां कैंटीन” जैसी योजनाएं काफी लोकप्रिय रही हैं, जहां 5 रुपये में भोजन उपलब्ध कराया जाता था।
अब मछली-भात को शामिल करने से यह योजना और अधिक लोकप्रिय हो सकती है, क्योंकि बंगाल में बड़ी आबादी मछली को अपने दैनिक भोजन का आवश्यक हिस्सा मानती है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज
तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी चुनाव के दौरान जिस संस्कृति पर सवालों के घेरे में थी, अब उसी संस्कृति को अपनाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है। वहीं बीजेपी नेताओं का दावा है कि उनकी सरकार “विकास और संस्कृति दोनों” को साथ लेकर चल रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बंगाल में सांस्कृतिक प्रतीकों की राजनीति हमेशा प्रभावी रही है। कभी दुर्गापूजा, कभी भाषा, कभी रसगुल्ला और अब मछली-भात — ये सभी मुद्दे सीधे जनता की भावनाओं से जुड़े होते हैं।
“मछली-भात” बना राजनीतिक संदेश
विशेषज्ञों के अनुसार 5 रुपये की मछली-भात योजना केवल एक खाद्य योजना नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश है। बीजेपी यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि वह बंगाल की स्थानीय संस्कृति के खिलाफ नहीं, बल्कि उसे और मजबूत करने के पक्ष में है।
दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस इसे “राजनीतिक नकल” बता रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि बीजेपी अब वही योजनाएं लागू कर रही है, जिनकी नींव पहले से राज्य में रखी जा चुकी थी।
बंगाल की जनता क्या सोचती है?
सामान्य जनता के बीच इस योजना को लेकर उत्सुकता दिखाई दे रही है। खासकर गरीब और मजदूर वर्ग के लोग इसे राहत की योजना मान रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि यदि वास्तव में 5 रुपये में गुणवत्तापूर्ण मछली-भात उपलब्ध कराया गया तो यह बड़ी राहत साबित होगी।
हालांकि विपक्ष यह भी सवाल उठा रहा है कि क्या सरकार इतनी कम कीमत पर लंबे समय तक योजना को सफलतापूर्वक चला पाएगी या यह केवल राजनीतिक घोषणा बनकर रह जाएगी।
संस्कृति, राजनीति और कल्याण की नई लड़ाई
पश्चिम बंगाल में अब राजनीति केवल विकास योजनाओं तक सीमित नहीं रह गई है। यहां संस्कृति, खान-पान, भाषा और परंपराएं भी चुनावी विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी हैं। “मछली-भात” पर छिड़ी यह नई बहस इसी बदलती राजनीति की झलक मानी जा रही है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि 5 रुपये की मछली-भात योजना जनता के बीच कितना प्रभाव छोड़ती है और क्या यह बंगाल की राजनीति में नया मोड़ साबित होगी।
Reviewed by PSA Live News
on
1:56:00 pm
Rating:

कोई टिप्पणी नहीं: