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दिल्ली के लाल किला मैदान में उमड़ा आदिवासी जनसैलाब

डीलिस्टिंग की मांग को लेकर हिंदुस्तान के कोने-कोने से पहुंचे हजारों आदिवासी, भीषण गर्मी के बावजूद दिखा जबरदस्त उत्साह


नई दिल्ली, 23 मई 2026।

राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में शनिवार को आदिवासी समाज की बड़ी रैली आयोजित होने जा रही है, जिसमें देशभर से हजारों की संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग पहुंच रहे हैं। भीषण गर्मी और तेज धूप के बावजूद लोगों का उत्साह कम नहीं दिख रहा। सुबह से ही दिल्ली की सड़कों, रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर आदिवासी समाज के लोगों की भारी भीड़ देखी जा रही है।

यह रैली मुख्य रूप से “डीलिस्टिंग” की मांग को लेकर आयोजित की जा रही है। आयोजकों का दावा है कि हिंदुस्तान के अलग-अलग राज्यों—झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों से बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग दिल्ली पहुंचे हैं। शाम 4 बजे लाल किला मैदान में विशाल सभा और प्रदर्शन का आयोजन किया गया है।

भीषण गर्मी के बावजूद नहीं टूटा उत्साह

दिल्ली में लगातार बढ़ते तापमान और लू जैसी परिस्थितियों के बीच भी आदिवासी समाज के लोग लंबी यात्रा तय कर राजधानी पहुंच रहे हैं। कई लोग पारंपरिक वेशभूषा और झंडों के साथ रैली स्थल की ओर बढ़ते दिखाई दिए। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की बड़ी भागीदारी ने इस आंदोलन को और व्यापक बना दिया है।

रैली में शामिल लोगों का कहना है कि यह केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता, अधिकार और संवैधानिक पहचान की लड़ाई है।

क्या है डीलिस्टिंग की मांग?

आदिवासी संगठनों का आरोप है कि संविधान में अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए निर्धारित अधिकारों और सुविधाओं का लाभ कुछ ऐसे लोगों को भी मिल रहा है, जो पारंपरिक आदिवासी जीवन, संस्कृति और धार्मिक पहचान से अलग हो चुके हैं। इसी मुद्दे को लेकर लंबे समय से “डीलिस्टिंग” की मांग उठती रही है।

रैली में शामिल संगठनों का कहना है कि जो लोग आदिवासी धर्म और संस्कृति छोड़ चुके हैं, उन्हें अनुसूचित जनजाति की सूची से बाहर किया जाना चाहिए। उनका दावा है कि इससे वास्तविक आदिवासी समुदाय के अधिकारों और आरक्षण पर पड़ रहे प्रभाव को रोका जा सकेगा।

हालांकि इस मुद्दे पर देशभर में अलग-अलग मत भी मौजूद हैं और यह विषय सामाजिक तथा राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है।

लाल किला मैदान में सुरक्षा के कड़े इंतजाम

रैली को देखते हुए दिल्ली पुलिस और प्रशासन ने लाल किला मैदान तथा आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है और यातायात व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए विशेष योजना बनाई गई है।

सूत्रों के अनुसार, आयोजकों ने दावा किया है कि यह रैली पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आयोजित की जाएगी।

राजनीतिक और सामाजिक हलकों की नजर

आदिवासी समाज की इस बड़ी जुटान पर राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की भी नजर बनी हुई है। माना जा रहा है कि यह रैली आने वाले समय में आदिवासी राजनीति और सामाजिक विमर्श को नई दिशा दे सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इतनी बड़ी संख्या में लोग किसी मुद्दे को लेकर राजधानी पहुंच रहे हैं, तो यह सरकार और नीति निर्माताओं के लिए एक गंभीर संकेत है कि आदिवासी समाज अपनी पहचान और अधिकारों को लेकर अधिक मुखर होता जा रहा है।

“हम अधिकार और पहचान की लड़ाई लड़ रहे हैं”

रैली में शामिल कई लोगों ने कहा कि वे केवल अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा और आदिवासी पहचान को सुरक्षित रखने की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह आंदोलन किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के मूल अधिकारों और भविष्य को बचाने के लिए है।

शाम 4 बजे लाल किला मैदान में होने वाली इस विशाल सभा पर अब पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।

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