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“आओ फिर दीप जलाएँ – ज्ञान दीप से अंतर का तमस भगाएँ”

दीपावली पर ब्रह्माकुमारी निर्मला का आध्यात्मिक संदेश


राँची, 21 अक्टूबर: 
दीपों का यह महापर्व केवल बाहरी उजाले का नहीं, बल्कि अंतर के अंधकार को दूर करने का भी प्रतीक है — ऐसा कहना है ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन का, जिन्होंने दीपावली के अवसर पर लोगों से “ज्ञान का दीप” जलाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि हम वर्षों से दीपावली पर मिट्टी के दीपक जलाते आ रहे हैं, लेकिन अब समय है कि हम अपने भीतर भी प्रकाश जगाएँ। बाहरी दीपक अंधकार मिटाते हैं, पर सन्मार्ग और कुमार्ग का भेद केवल ज्ञान दीप से ही समझ आता है।

“दीप जलाएँ, खुशियाँ मनाएँ — पर भीतर भी प्रकाश भरें”

ब्रह्माकुमारी निर्मला ने कहा कि लोग दीपावली पर खुशियाँ मनाएँ, दीप जलाएँ, पर उसी के साथ अस्त-व्यस्त, तनावग्रस्त जीवन को भी भीतर से सुव्यवस्थित करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा —

“हम अपनी बुरी आदतों और पुराने नकारात्मक संस्कारों को छोड़ें,
आध्यात्मिक शक्ति के स्रोत को दान दें, और बदले में श्री लक्ष्मी का वरण करें।”

उनके अनुसार सच्ची समृद्धि केवल धन-संपत्ति से नहीं, बल्कि तनावमुक्त, संतुलित और शांत जीवन से मिलती है। उन्होंने लोगों को ज्ञान अमृत पीने और योग रस का आनंद लेने की प्रेरणा दी, जिससे आत्मा की शुद्धि और स्थिरता बनी रहती है।

“अंधकार भीतर का है — दीपावली केवल बाहर नहीं, भीतर भी मनाएँ”

निर्मला बहन ने कहा कि दीपावली का असली अर्थ तब ही पूर्ण होता है जब अंदर का अंधकार मिटे।
उन्होंने कहा —

“अगर दीप बाहर जलें और अंधेरा भीतर रह जाए, तो वह सच्ची दीपावली नहीं।
शराब, नशा, जुआ और अन्य विकार ही आत्मा के अंधकार के कारण हैं —
इन्हें मन से त्यागकर ही हम अपने जीवन में सच्चा उजाला ला सकते हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि ज्ञान धन की याचना भी लक्ष्मी से करें, ताकि हम केवल भौतिक रूप से नहीं, बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी समृद्ध बन सकें।

“जीवन की चमक में अंधकार न छिप जाए”

निर्मला बहन ने चेताया कि आज का मनुष्य जीवन की बाहरी बनावट, सजावट और भौतिक चमक में इतना खो गया है कि अपने अंदर के अंधकार को पहचान ही नहीं पा रहा।
उन्होंने कहा कि दीपावली का वास्तविक संदेश यही है — हम बाहरी जगमगाहट में नहीं, बल्कि भीतर के प्रकाश में जीना सीखें।

“अविवेक, विकार और व्यसन ही आत्मा के अंधकार के कारण हैं।
जब तक इन्हें दूर नहीं किया जाएगा, तब तक सच्ची दीवाली संभव नहीं।”

“ज्ञान, कर्म और सेवा से बनेगी सच्ची दीवाली”

निर्मला बहन ने समाज के प्रति भी एक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यदि हर व्यक्ति लगन, निष्ठा, मेहनत और ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करे,
तो निश्चित रूप से समाज प्रेम, एकता और सद्भावना से युक्त होकर सुखमय दीपावली का अनुभव करेगा।

“जब हर व्यक्ति अपने भीतर का दीपक जलाएगा,
तब ही हर घर में सच्ची दीवाली होगी —
और यही असली लक्ष्मी प्राप्ति का मार्ग है।”

दीपावली का यह पर्व केवल रोशनी और सजावट का नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर झाँकने का भी अवसर है।
ब्रह्माकुमारी निर्मला का यह संदेश आज के भटकते, तनावग्रस्त समाज के लिए एक गहरा चिंतन है —
कि सच्ची दीपावली तब होगी जब ज्ञान का दीप जलेगा, विकारों का अंधकार मिटेगा और मानवता के भीतर फिर से उजाला लौटेगा।

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