मां छिन्नमस्तिका मंदिर सौंदर्यीकरण मामला: हाईकोर्ट सख्त, पर्यटन सचिव और डीसी को व्यक्तिगत हाजिरी का आदेश
रांची, 18 मार्च: झारखंड उच्च न्यायालय ने रामगढ़ स्थित प्रसिद्ध मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण से जुड़े मामले में दायर अवमानना याचिका पर बुधवार को सुनवाई करते हुए कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में ढिलाई पर नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया और स्पष्ट संकेत दिया कि आदेशों की अनदेखी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यह मामला न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष आया, जहां रामगढ़ के उपायुक्त (डीसी) स्वयं उपस्थित हुए। सुनवाई के दौरान डीसी ने अदालत को अवगत कराया कि न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में कुछ कार्य पूरे कर लिए गए हैं, जबकि कई कार्य अभी प्रक्रियाधीन हैं।
डीसी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लगभग आठ चेंजिंग रूम का निर्माण किया गया है। इसके अलावा सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए परिसर और आसपास के क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था की गई है। साफ-सफाई को दुरुस्त रखने के लिए कुछ निजी कंपनियों के साथ एमओयू भी किया गया है, ताकि नियमित रूप से स्वच्छता सुनिश्चित की जा सके।
हालांकि, अदालत इन कार्यों से संतुष्ट नहीं दिखी। खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि प्रस्तुत प्रगति रिपोर्ट अधूरी और अपेक्षानुसार नहीं है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि धार्मिक और पर्यटन दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण इस स्थल के विकास में किसी प्रकार की लापरवाही गंभीर मानी जाएगी।
अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अगली सुनवाई में राज्य के पर्यटन सचिव और रामगढ़ के उपायुक्त—दोनों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। साथ ही, न्यायालय ने आदेशों के अनुपालन से संबंधित एक विस्तृत और अद्यतन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी आदेश दिया है, जिसमें अब तक किए गए कार्यों, शेष योजनाओं और उनके समयबद्ध क्रियान्वयन का स्पष्ट ब्यौरा हो।
गौरतलब है कि मां छिन्नमस्तिका मंदिर न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है, जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर परिसर का सुव्यवस्थित और आधुनिक सुविधाओं से युक्त होना अत्यंत आवश्यक है। न्यायालय की सख्ती को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा और सुरक्षित वातावरण मिल सके।
मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च को निर्धारित की गई है, जहां अदालत द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
Reviewed by PSA Live News
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11:35:00 pm
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