हिसार (हरियाणा), संवाददाता राजेश सलूजा: समाज में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और भागदौड़ के बीच मानवीय संवेदनाओं का क्षरण एक गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। ऐसे दौर में सामाजिक चिंतक सिमरन कराड़ ने “अपमान नहीं, सम्मान दें” का संदेश देते हुए कहा कि इंसानियत की असली पहचान दूसरों के प्रति हमारे व्यवहार से होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी का अपमान करना न केवल उसकी भावनाओं को आहत करता है, बल्कि यह हमारे स्वयं के संस्कारों और व्यक्तित्व को भी दर्शाता है।
सिमरन कराड़ ने कहा कि अक्सर देखा जाता है कि लोग अनजाने या गुस्से में दूसरों को अपमानित कर बैठते हैं। विशेष रूप से स्कूलों और घरों में बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार उनके मानसिक विकास पर गहरा प्रभाव डालता है। उन्होंने बताया कि कई बार शिक्षक कक्षा में कुछ बच्चों की गलतियों को बार-बार उनके साथियों के सामने उजागर करते हैं, जिससे बच्चे अपमानित महसूस करते हैं। इस तरह की स्थिति में बच्चे अंदर ही अंदर कुंठा का शिकार हो जाते हैं और उनका स्वभाव चिड़चिड़ा हो सकता है।
उन्होंने अभिभावकों की भूमिका पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि माता-पिता को बच्चों की छोटी-छोटी गलतियों पर सार्वजनिक रूप से डांटने या दूसरों से तुलना करने से बचना चाहिए। “बच्चों की तुलना करना उनके आत्मविश्वास को कमजोर करता है और वे खुद को कमतर समझने लगते हैं,” उन्होंने कहा। उनके अनुसार, बच्चों को सुधारने का सबसे प्रभावी तरीका प्यार, समझ और संवाद है, न कि कठोर शब्द या अपमान।
सिमरन कराड़ ने यह भी कहा कि आज के समय में बच्चों को सबसे अधिक जरूरत सम्मान और भावनात्मक सहयोग की है। यदि हम उन्हें सम्मान देंगे, तो वे भी उसी भावना को सीखेंगे और समाज में एक संवेदनशील व जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित होंगे।
उन्होंने आगे कहा कि यदि कोई व्यक्ति हमें अपमानित करता है, तो हमें भी उसी तरीके से प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए। धैर्य, संयम और समझदारी से स्थिति को संभालना ही एक सच्चे और परिपक्व इंसान की पहचान है।
अंत में उन्होंने समाज से अपील करते हुए कहा कि हम सभी को अपने व्यवहार और भाषा में मधुरता लानी चाहिए तथा हर व्यक्ति को सम्मान देना चाहिए। “एक सभ्य और सशक्त समाज का निर्माण तभी संभव है, जब हम अपमान की जगह सम्मान को प्राथमिकता दें,” उन्होंने कहा।
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4:26:00 pm
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