रांची में ‘एकम डायलॉग्स’ का भव्य आगाज़: पूर्वी-मध्य भारत के समावेशी और भविष्य-दृष्टि विकास का खाका तैयार
जलवायु अनुकूलन, सामुदायिक नवाचार और हरित अर्थव्यवस्था पर मंथन, 27 चेंजमेकर्स ‘एकम सम्मान’ से सम्मानित
रांची, 08 अप्रैल 2026: Center for Environment and Energy Development (सीड) द्वारा आयोजित ‘एकम डायलॉग्स: संवाद से निर्माण’ का आज रांची में प्रभावशाली शुभारंभ हुआ। यह दो दिवसीय सम्मेलन पूर्वी और मध्य भारत के राज्यों—झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़ और ओडिशा—के लिए समावेशी, टिकाऊ और भविष्य-उन्मुख विकास मॉडल तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभर कर सामने आया है।
कार्यक्रम का मूल उद्देश्य केवल विमर्श नहीं, बल्कि संवाद के माध्यम से ठोस समाधान निर्माण है, जिसमें नीति-निर्माण, जमीनी अनुभव और नवाचार को एक साझा मंच पर लाकर क्षेत्रीय विकास को नई दिशा देने का प्रयास किया जा रहा है।
विविध हितधारकों की भागीदारी से सशक्त संवाद
इस आयोजन में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, नीति विशेषज्ञ, उद्योग-व्यापार जगत के प्रतिनिधि, सामाजिक उद्यमी, शिक्षाविद, पर्यावरणविद और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में शामिल हुए।
करीब 300 से अधिक प्रतिभागी, 70 से अधिक विशेषज्ञ वक्ता और 11 तकनीकी सत्र इस सम्मेलन को एक व्यापक और प्रभावशाली विमर्श मंच बना रहे हैं।
साथ ही, पद्मश्री से सम्मानित 11 विशिष्ट हस्तियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया।
“संवाद से निर्माण” की अवधारणा को मिला बल
सीड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रमापति कुमार ने कहा कि एकम डायलॉग्स एक दूरदर्शी पहल है, जिसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे क्षेत्रों में स्थायी और समावेशी समाधान विकसित करना है।
उन्होंने जोर दिया कि यह मंच साझा जिम्मेदारी, सहयोग और नवाचार के माध्यम से विचारों को क्रियान्वयन में बदलने का काम करेगा।
विशेषज्ञों ने रखे ठोस सुझाव
कार्यक्रम में विभिन्न विशेषज्ञों ने अपने विचार रखते हुए विकास के बहुआयामी पहलुओं पर प्रकाश डाला—
ए.के. रस्तोगी (पूर्व आईएफएस) ने कहा कि जलवायु अनुकूलन तभी सफल होगा, जब समुदाय उसकी धुरी बनेगा।
रवि रंजन (प्रधान मुख्य वन संरक्षक, झारखंड) ने बताया कि विकास और पारिस्थितिकी के बीच संतुलन ही सतत प्रगति की कुंजी है।
डॉ. ए.टी. मिश्रा ने डेटा, विज्ञान और स्थानीय आजीविका के समन्वय को आवश्यक बताया।
देश के प्रसिद्ध ‘जलपुरुष’ राजेंद्र सिंह ने कहा कि पारंपरिक जल स्रोतों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में जनता की भागीदारी निर्णायक भूमिका निभाती है।
जगदानंद (ओडिशा) ने जमीनी स्तर पर सामुदायिक नेतृत्व को परिवर्तन का आधार बताया।
प्रो. (डॉ.) पीयूषकांत पांडे ने जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए अत्याधुनिक शोध और तकनीकी नवाचार पर बल दिया।
‘एकम सम्मान’: जमीनी नायकों को राष्ट्रीय पहचान
कार्यक्रम के पहले दिन ‘एकम सम्मान’ के तहत चार राज्यों के 27 चेंजमेकर्स को सम्मानित किया गया, जिन्होंने जलवायु अनुकूलन, जल संरक्षण, वन संरक्षण, सतत कृषि, पारंपरिक बीज संरक्षण, लोक कला और वेस्ट मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
सम्मानित प्रमुख नामों में अपर्णा कुमारी, अशोक कुमार राउत, द्रौपदी देवी, डॉ. मनोज कुमार, फ्रांसिस मुंडा, नीलिमा मिश्रा, प्रभात कुमार महतो, रायमति घुइरिया, राजेंद्र बघेल, रवि सिंह, संगीता देवी, संजय कच्छप, शुभम कुमार, तरुण कुमार, उपेंद्र पांडे, सोना पांडे और वीरेंद्र सिंह शामिल हैं।
ये सभी जमीनी स्तर पर परिवर्तन की वास्तविक कहानियों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो स्थानीय ज्ञान और नवाचार के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं।
दूसरे दिन का एजेंडा: हरित अर्थव्यवस्था और लोक-केंद्रित विकास
कार्यक्रम के दूसरे दिन आयोजित होने वाले संवाद सत्रों में लोक-केंद्रित जलवायु अनुकूलन, फ्यूचर-रेडी ग्रीन इकोनॉमी, सतत आजीविका और ग्रामीण उद्यमिता, पारंपरिक ज्ञान, कला और सांस्कृतिक विरासत का पुनरुद्धार, टेक्नोलॉजी और डेटा आधारित स्थानीय समाधान, जैसे विषयों पर गहन चर्चा होगी।
विकास की नई सोच का मंच
‘एकम डायलॉग्स’ रांची से एक ऐसे विकास मॉडल की शुरुआत कर रहा है, जिसमें सरकार, समाज और नवाचार एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं। यह पहल न केवल क्षेत्रीय विकास को नई दिशा देगी, बल्कि हिंदुस्तान के जलवायु-संवेदनशील और समावेशी भविष्य की मजबूत नींव भी रखेगी।
Reviewed by PSA Live News
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8:14:00 pm
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