सावधान! आपकी रसोई में पक रहा है ‘धीमा ज़हर’ — देश में हर चौथा सरसों तेल का सैंपल फेल, मिलावटी तेल बना करोड़ों लोगों की सेहत का दुश्मन
FSSAI की रिपोर्ट ने खोली खाद्य सुरक्षा की पोल, 20 हजार से अधिक नमूनों में सामने आई गंभीर गड़बड़ियां, विशेषज्ञों ने दी सतर्क रहने की सलाह
नई दिल्ली। भारतीय रसोई में सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले खाद्य तेलों में शामिल सरसों का तेल अब लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरे का कारण बनता जा रहा है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा जारी आंकड़ों और विभिन्न सरकारी जांच रिपोर्टों ने देशभर के उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार जांचे गए सरसों तेल के लगभग हर चौथे नमूने में गुणवत्ता संबंधी खामियां या मिलावट पाई गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले वर्षों में कैंसर, हृदय रोग, लीवर और किडनी की बीमारियों में भारी वृद्धि हो सकती है।
सरसों का तेल भारतीय भोजन का अभिन्न हिस्सा है। उत्तर भारत, पूर्वी भारत और ग्रामीण इलाकों में अधिकांश परिवार प्रतिदिन इसी तेल में भोजन पकाते हैं। ऐसे में यदि यही तेल मिलावटी हो तो यह करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। खाद्य विशेषज्ञों का कहना है कि मिलावट केवल उपभोक्ता के पैसे की ठगी नहीं बल्कि यह एक ऐसा अपराध है जो धीरे-धीरे शरीर को अंदर से खोखला करता है।
20 हजार से अधिक नमूनों की जांच में सामने आया चौंकाने वाला सच
वर्ष 2023-24 के दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा देशभर से लगभग 20 हजार से अधिक खाद्य तेलों के नमूनों की जांच की गई। इनमें बड़ी संख्या सरसों तेल की थी। जांच में पाया गया कि हजारों नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। कई नमूनों में मिलावट, गलत लेबलिंग, गुणवत्ता में कमी तथा अन्य तकनीकी खामियां पाई गईं।
रिपोर्ट के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में लगातार बड़ी संख्या में सरसों तेल के नमूने फेल होते रहे हैं। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि बाजार में मिलावटी तेल का कारोबार संगठित तरीके से चल रहा है।
2019 से अब तक हजारों मामले दर्ज
खाद्य सुरक्षा विभाग के रिकॉर्ड बताते हैं कि वर्ष 2019 से लेकर अब तक लगभग 90 हजार से अधिक खाद्य नमूनों की जांच विभिन्न राज्यों में की गई, जिनमें हजारों मामलों में कार्रवाई की नौबत आई। मिलावट के आरोप में कई कंपनियों और कारोबारियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए, जबकि अनेक प्रतिष्ठानों पर भारी जुर्माना भी लगाया गया।
इसके बावजूद मिलावट का कारोबार पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाया है।
किस तरह की मिलावट की जाती है?
विशेषज्ञों के अनुसार सरसों तेल में मुनाफा बढ़ाने के लिए कई प्रकार की मिलावट की जाती है।
- सस्ते पाम ऑयल की मिलावट
- राइस ब्रान ऑयल मिलाना
- सोयाबीन तेल की मिलावट
- कॉटन सीड ऑयल मिलाना
- सिंथेटिक रंग और सुगंध मिलाना
- निम्न गुणवत्ता वाले औद्योगिक तेल मिलाना
कुछ मामलों में तो ऐसा तेल भी मिला है जो मानव स्वास्थ्य के लिए बिल्कुल सुरक्षित नहीं माना जाता।
आर्गेमोन (सत्यानाशी) तेल सबसे बड़ा खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार सरसों तेल में सबसे खतरनाक मिलावट आर्गेमोन (Argemone) तेल की मानी जाती है। इसे आम भाषा में सत्यानाशी के बीजों से निकाला गया तेल कहा जाता है।
यह शरीर में पहुंचकर अनेक गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
इससे हो सकते हैं—
- ड्रॉप्सी रोग
- आंखों की रोशनी प्रभावित
- लीवर खराब
- किडनी पर असर
- सांस लेने में परेशानी
- शरीर में सूजन
- हृदय संबंधी रोग
- गंभीर मामलों में मृत्यु तक
धीमा ज़हर क्यों कहा जाता है?
डॉक्टरों का कहना है कि मिलावटी तेल खाने से बीमारी तुरंत दिखाई नहीं देती।
रोजाना थोड़ी-थोड़ी मात्रा में शरीर में पहुंचने वाले जहरीले तत्व वर्षों तक शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचाते रहते हैं।
इसी कारण इसे "स्लो पॉयजन" यानी धीमा ज़हर कहा जाता है।
किन बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है?
मिलावटी सरसों तेल के लगातार सेवन से—
- कैंसर
- हार्ट अटैक
- हाई ब्लड प्रेशर
- फैटी लीवर
- लीवर सिरोसिस
- किडनी फेलियर
- नसों की कमजोरी
- हार्मोन असंतुलन
- पाचन संबंधी रोग
- त्वचा रोग
- बच्चों में विकास संबंधी समस्याएं
जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
कैसे पहचानें शुद्ध सरसों का तेल?
विशेषज्ञ उपभोक्ताओं को कुछ सावधानियां बरतने की सलाह देते हैं—
✔ हमेशा FSSAI लाइसेंस वाला ब्रांड खरीदें।
✔ खुला तेल खरीदने से बचें।
✔ बहुत सस्ता तेल खरीदने से बचें।
✔ पैकिंग, बैच नंबर और एक्सपायरी डेट अवश्य देखें।
✔ तेल का रंग और गंध असामान्य लगे तो उपयोग न करें।
✔ विश्वसनीय दुकानों से ही खरीदारी करें।
घर पर मिलावट की प्राथमिक जांच
विशेषज्ञों के अनुसार घर पर पूरी तरह वैज्ञानिक जांच संभव नहीं है, लेकिन कुछ संकेत मिल सकते हैं—
- तेल की गंध बहुत हल्की या कृत्रिम लगे।
- रंग असामान्य रूप से चमकीला हो।
- लंबे समय तक रखने पर असामान्य तलछट दिखाई दे।
- स्वाद में कड़वाहट या अजीबपन महसूस हो।
ऐसी स्थिति में तेल का उपयोग बंद कर देना चाहिए और संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग को सूचना देनी चाहिए।
सरकार के सामने बड़ी चुनौती
खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि केवल छापेमारी से समस्या समाप्त नहीं होगी। जरूरत है—
- नियमित जांच अभियान
- मिलावट करने वालों पर कठोर दंड
- लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई
- उपभोक्ताओं को जागरूक बनाने
- आधुनिक लैब की संख्या बढ़ाने
- हर जिले में त्वरित खाद्य जांच व्यवस्था की।
उपभोक्ता भी रहें सतर्क
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि उपभोक्ता केवल सस्ते दाम देखकर तेल खरीदेंगे तो मिलावट का कारोबार कभी समाप्त नहीं होगा। थोड़ी सी बचत भविष्य में लाखों रुपये के इलाज का कारण बन सकती है।
निष्कर्ष
सरसों का तेल भारतीय रसोई की पहचान है, लेकिन यदि इसमें मिलावट हो तो यही तेल परिवार की सेहत के लिए सबसे बड़ा खतरा बन सकता है। खाद्य सुरक्षा एजेंसियों की लगातार जांच में सामने आ रहे आंकड़े यह संकेत देते हैं कि मिलावट का नेटवर्क अभी भी सक्रिय है। ऐसे में सरकार को कठोर कार्रवाई करनी होगी और आम नागरिकों को भी जागरूक होकर केवल प्रमाणित एवं विश्वसनीय ब्रांड का ही तेल खरीदना चाहिए। क्योंकि भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन की सबसे महत्वपूर्ण नींव है। यदि हमारी रसोई सुरक्षित नहीं होगी, तो हमारा भविष्य भी सुरक्षित नहीं रह सकता।
Reviewed by PSA Live News
on
9:50:00 pm
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