कक्षा 2 की किताबें ₹2,130 में बेची: मजदूर बिल लेकर पहुंचा कलेक्ट्रेट, कलेक्टर ने सस्पेंड की स्कूल की मान्यता
भिंड (मध्य प्रदेश)। निजी शैक्षणिक संस्थानों की बढ़ती मनमानी, निजी प्रकाशकों के साथ उनकी साठगांठ और अभिभावकों से की जा रही बेतहाशा वसूली पर जिला प्रशासन ने अब तक का सबसे कड़ा रुख अपनाया है। मध्य प्रदेश के भिंड जिले में शिक्षा व्यवस्था के नाम पर चल रहे इस व्यावसायिक सिंडिकेट की पोल उस वक्त खुल गई, जब एक गरीब मजदूर पिता अपने बच्चे के बस्ते का बोझ और बिल का पन्ना हाथ में थामे सीधे कलेक्ट्रेट कार्यालय जा पहुंचा। दूसरी कक्षा में पढ़ने वाले मासूम बच्चे की किताबों के लिए मांगी गई मोटी रकम की शिकायत सुनते ही प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की संवेदनशीलता और अभिभावक के आर्थिक शोषण को देखते हुए कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित निजी स्कूल की मान्यता तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी है।
यह पूरा घटनाक्रम शहर के हलवाई खाना क्षेत्र से सामने आया है, जहां के निवासी इमदाद अहमद एक स्थानीय फर्नीचर की दुकान पर दिहाड़ी मजदूरी करके अपने परिवार का गुजर-बसर करते हैं। इमदाद ने अपने बच्चे का दाखिला एक निजी स्कूल में कराया था, लेकिन जब वे नए शैक्षणिक सत्र के लिए किताबें खरीदने बाजार पहुंचे, तो दुकानदार द्वारा थमाए गए बिल ने उनके होश उड़ा दिए। महज दूसरी कक्षा के एक मासूम छात्र के किताबों के सेट के लिए उससे ₹2,130 की भारी-भरकम राशि वसूल कर ली गई। आर्थिक तंगी से जूझ रहे इमदाद ने जब किताब विक्रेता से कुछ रियायत देने और मोलभाव करने की गुहार लगाई, तो दुकानदार ने सख्त रवैया अपनाते हुए साफ शब्दों में मना कर दिया।
इतना ही नहीं, शोषण की हद तब पार हो गई जब किताबों के इस महंगे बंडल के अलावा कॉपियों (नोटबुक) का सेट देने के एवज में ₹500 अतिरिक्त जमा करने की शर्त रख दी गई। मजदूरी की सीमित आय के कारण इमदाद की जेब में उतने पैसे ही नहीं बचे थे, जिसकी वजह से वे अपने बच्चे के लिए कॉपियां खरीदे बिना ही खाली हाथ लौटने को मजबूर हो गए। पूरे मामले में सबसे गंभीर और चौंकाने वाला पहलू यह उजागर हुआ कि दो हजार रुपये से अधिक के इस भारी-भरकम पुस्तक सेट में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद यानी NCERT की एक भी मानक पुस्तक शामिल नहीं थी। निजी पब्लिशर्स की महंगी और घटिया सामग्री को जबरन थमाकर अभिभावक की जेब पर डाका डाला जा रहा था।
सोमवार की दोपहर जब इमदाद अहमद कलेक्ट्रेट पहुंचे और उन्होंने अपनी आपबीती सुनाते हुए किताबों का सेट और खरीद का बिल कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव के सामने रखा, तो कलेक्टर भी इस खुली लूट को देखकर हैरान रह गए। एक मजदूर के साथ हुए इस अन्याय को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने बिना किसी देरी के जिला परियोजना समन्वयक (DPC) को तलब किया और कड़ी फटकार लगाते हुए जांच के आदेश दिए। उन्होंने निर्देश दिया कि निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें थमाने और नियमों का उल्लंघन करने वाले इस निजी स्कूल को तत्काल 7 दिवस का कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए और अंतरिम तौर पर स्कूल की मान्यता को सस्पेंड कर दिया जाए।
जिला प्रशासन की इस अप्रत्याशित और सख्त कार्रवाई से पूरे जिले के निजी स्कूल प्रबंधकों और पुस्तक माफियाओं में हड़कंप मच गया है। कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव की इस त्वरित पहल की आम जनता और अभिभावकों द्वारा व्यापक सराहना की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल सत्र की शुरुआत में निजी स्कूल और चुनिंदा बुक सेलर मिलकर अभिभावकों का आर्थिक शोषण करते हैं, लेकिन इस तरह की दंडात्मक कार्रवाई से मनमानी करने वाले संस्थानों पर लगाम कसेगी। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट संकेत दिया है कि जिले में NCERT की जगह निजी पब्लिशर्स की महंगी किताबें थपने वाले अन्य स्कूलों पर भी आने वाले दिनों में इसी तरह की गाज गिर सकती है।
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8:06:00 pm
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