लोहरदगा में पत्रकार पर कथित जानलेवा हमले का मामला गहराया: लिखित शिकायत के बावजूद प्राथमिकी दर्ज नहीं, पुलिस की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
लोहरदगा: लोकतंत्र के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकारों की सुरक्षा और उनकी स्वतंत्रता को लेकर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। झारखंड के लोहरदगा जिले में जनहित से जुड़े गंभीर मामलों को उजागर करने वाले एक पत्रकार पर कथित तौर पर जानलेवा हमला किए जाने का मामला सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि घटना के संबंध में पुलिस को लिखित शिकायत देने के बावजूद अब तक न तो प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की गई है और न ही थाने से आवेदन की प्राप्ति रसीद तक दी गई है। इस लचर रवैये से स्थानीय स्तर पर पुलिस प्रशासन की कार्यशैली और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवालिया निशान लग गए हैं।
क्या है पूरा घटनाक्रम और कैसे बरती गई कथित लापरवाही? मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना 27 अक्टूबर 2026 की है। जब संबंधित पत्रकार अपने पेशेवर दायित्वों का निर्वहन करते हुए अवैध गतिविधियों की जानकारी जुटा रहे थे, तभी उन पर कथित रूप से जानलेवा हमला किया गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए उसी दिन शाम को एसपी कार्यालय में लिखित सूचना दे दी गई थी। इसके अगले दिन यानी 28 अक्टूबर को अपराह्न करीब एक बजे पीड़ित पत्रकार लोहरदगा थाना पहुंचे और पूरे मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई।
पत्रकार का आरोप है कि जब वे थाना पहुंचे तो थाना प्रभारी ने सीधे तौर पर बातचीत करने से परहेज किया और आवेदन को औपचारिकता निभाते हुए केवल थाना के मुंशी के पास जमा करा लिया गया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक तरफ जहां गंभीर धाराओं में मामला बनता है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस ने लिखित आवेदन लेने के बाद पीड़ित पत्रकार को उसकी रिसीविंग (प्राप्ति रसीद) तक देना मुनासिब नहीं समझा। नियमतः किसी भी आपराधिक शिकायत पर तुरंत संज्ञान लिया जाना चाहिए था, लेकिन कई घंटे बीत जाने के बाद भी प्राथमिकी दर्ज न होना पुलिस की कार्यशैली पर सीधा संशय पैदा करता है।
पूर्व की शिकायतों को ठंडे बस्ते में डालने का भी आरोप यह मामला सिर्फ एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार पुरानी शिकायतों से भी जुड़े बताए जा रहे हैं। पीड़ित पत्रकार के अनुसार, इससे पहले भी कथित जुआ संचालक द्वारा एक अन्य व्यक्ति को जान से मारने की धमकी दिए जाने का गंभीर मामला सामने आया था। उस दौरान भी थाने में विधिवत आवेदन दिया गया था, लेकिन पुलिस ने उस पर कोई ठोस कार्रवाई करना उचित नहीं समझा और मामला फाइलों में ही दबकर रह गया।
पूर्व की शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई न होने और अब एक पत्रकार पर हुए कथित हमले के मामले में सुस्ती ने क्षेत्र में अवैध कारोबारियों और अपराधियों के हौसले बुलंद कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों और बुद्धिजीवियों के बीच यह चर्चा आम हो गई है कि यदि जनहित के मुद्दों को बेबाक तरीके से उठाने वाले पत्रकारों को इस तरह प्रशासनिक उपेक्षा और हमलों का सामना करना पड़ेगा, तो आम आदमी की फरियाद थाने तक कैसे पहुंचेगी और उसे न्याय की क्या उम्मीद होगी?
अवैध बालू खनन, नशा तस्करी और जुआ संचालन के खिलाफ मुखर रहे हैं पत्रकार सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं के मुताबिक, पीड़ित पत्रकार लंबे समय से लोहरदगा क्षेत्र में सक्रिय रूप से बालू के अवैध उत्खनन, नशा तस्करी के कारोबार और अवैध जुआ संचालन जैसे सामाजिकू कुरीतियों और अपराधों के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। वे लगातार इन जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से मीडिया के पन्नों पर जगह देते आए हैं। माना जा रहा है कि इन्हीं माफियाओं और अवैध कारोबारियों के सिंडिकेट को उजागर करने की वजह से पत्रकार को निशाना बनाया गया और उन पर यह जानलेवा हमला किया गया।
यदि समाज की सच्चाई सामने लाने वाले और प्रशासन की आंखें खोलने वाले पत्रकार ही सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो समाज में अपराधियों का खौफ किस तरह खत्म होगा, यह एक बड़ा और चिंतनीय प्रश्न है।
अब पुलिस प्रशासन के रुख पर टिकी हैं सबकी निगाहें इस पूरे प्रकरण के सामने आने के बाद से स्थानीय पत्रकारों और आम जनता में काफी रोष व्याप्त है। हालांकि, इस मामले में अभी तक स्थानीय पुलिस प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान या पक्ष सामने नहीं आया है। अब यह देखना बेहद दिलचस्प और महत्वपूर्ण होगा कि जिला पुलिस प्रशासन इस सनसनीखेज मामले में कब तक नींद से जागता है, कब प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष जांच शुरू करता है और दोषियों के खिलाफ क्या सख्त कानूनी कदम उठाए जाते हैं।
वे ज्वलंत सवाल जो मांग रहे हैं त्वरित जवाब:
- क्या लोहरदगा थाना पुलिस ने पत्रकार पर हुए कथित जानलेवा हमले के मामले में अब तक प्राथमिकी दर्ज की है या नहीं?
- थाने में लिखित आवेदन जमा कराने के बावजूद पीड़ित को उसकी प्राप्ति रसीद क्यों नहीं दी गई?
- पूर्व में अपराधियों द्वारा दी गई धमकियों और शिकायतों पर पुलिस ने अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की?
- क्या जिला प्रशासन भविष्य में निष्पक्ष पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए कोई ठोस कार्ययोजना बनाएगा?
Reviewed by PSA Live News
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10:15:00 am
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