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शरद पूर्णिमा पर गायत्री साधकों ने किया 24 घंटे का अखण्ड जप, सहस्रनाम पाठ और यज्ञीय समीक्षा

धवल चांदनी में गूंजे वैदिक मंत्र – वातावरण हुआ श्रद्धा और साधना से पवित्र

सद्भाव, आरोग्य और राष्ट्रकल्याण की कामना के साथ संपन्न हुआ विशेष अनुष्ठान


रांची।
शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर गायत्री परिवार के साधकों द्वारा राजधानी रांची सहित झारखंड के विभिन्न प्रज्ञा केंद्रों में 24 घंटे का अखण्ड गायत्री महामंत्र जप, सहस्रनाम पाठ एवं यज्ञीय समीक्षा का आयोजन किया गया। दिव्य चांदनी में सम्पन्न इस महाअनुष्ठान ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिकता, श्रद्धा और ऊर्जा से भर दिया।

यह आयोजन गायत्री शक्तिपीठ, देवालय एवं अखिल विश्व गायत्री परिवार के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। इसमें बड़ी संख्या में साधक, महिलाएं, युवा और वरिष्ठ नागरिक सम्मिलित हुए।

“शरद पूर्णिमा – साधना और आत्मशुद्धि का पर्व”

कार्यक्रम की शुरुआत शनिवार की ब्रह्ममुहूर्त बेला में गायत्री महामंत्र के उच्चारण के साथ हुई।
साधकों ने निरंतर 24 घंटे तक अखण्ड जप साधना करते हुए राष्ट्र, समाज और मानवता के कल्याण की कामना की।

शक्तिपीठ प्रमुख आचार्य श्री रामदेव शास्त्री ने बताया—

“शरद पूर्णिमा की पूर्ण चंद्रमा की रात्रि ‘अमृत वर्षा’ की प्रतीक मानी जाती है। इस रात्रि में किया गया जप और ध्यान कई गुना फलदायी होता है। गायत्री साधक इस दिन मन, वचन और कर्म से स्वयं को परमात्मा की ऊर्जा से जोड़ते हैं।”

सहस्रनाम पाठ और यज्ञीय समीक्षा से गूंज उठा देवालय परिसर

पूरे दिन साधकों ने गायत्री सहस्रनाम स्तोत्र का सामूहिक पाठ किया। रात्रि के समय देवालय परिसर में दीपों की श्रृंखला जलाई गई, जिससे वातावरण मनोहर और अलौकिक बन गया।
पूर्णिमा की धवल चांदनी में वैदिक मंत्रों की गूंज ने पूरे क्षेत्र को सकारात्मक ऊर्जा और शांति का अनुभव कराया।

इसके उपरांत साधकों द्वारा यज्ञीय समीक्षा सत्र आयोजित किया गया, जिसमें वर्ष भर की साधनात्मक गतिविधियों की समीक्षा की गई और आगामी वर्ष के लिए संकल्प निर्धारित किए गए।

महिलाओं और युवाओं की रही विशेष भागीदारी

कार्यक्रम में महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी विशेष रूप से देखने को मिली।
महिला मंडल की सदस्य सुमन दीदी ने बताया कि—

“गायत्री साधना केवल व्यक्तिगत उन्नति का मार्ग नहीं, बल्कि परिवार और समाज में शांति-सौहार्द का आधार है। शरद पूर्णिमा इस साधना का सर्वोत्तम अवसर प्रदान करती है।”

युवाओं ने स्वच्छता, नशा मुक्ति, पर्यावरण संरक्षण और ‘एक वृक्ष – एक जीवन’ जैसे सामाजिक संकल्प लिए।

आध्यात्मिक संगोष्ठी और भजन संध्या का आयोजन

शाम को आयोजित भजन संध्या एवं प्रवचन सत्र में साधकों ने ‘गायत्री मंत्र के वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व’ पर अपने विचार रखे।
प्रज्ञा परिवार के वरिष्ठ साधक श्री गोविंद झा ने कहा—

“गायत्री साधना हमारे भीतर की नकारात्मकता को दूर करती है और जीवन में संतुलन व विवेक स्थापित करती है। यह युग निर्माण आंदोलन की मूल आत्मा है।”

रात्रि 12 बजे विशेष पूर्णिमा आरती संपन्न हुई, जिसके बाद साधकों ने प्रसाद वितरण और आरोग्य साधना के साथ कार्यक्रम का समापन किया।

सद्भाव और राष्ट्रकल्याण का सामूहिक संकल्प

इस अवसर पर सभी उपस्थित साधकों ने राष्ट्र एकता, सद्भाव और आत्मनिर्भर हिंदुस्तान के निर्माण का संकल्प लिया।
उन्होंने कहा कि शरद पूर्णिमा की यह रात्रि मनुष्य और प्रकृति के बीच दिव्य सामंजस्य का प्रतीक है और इसी भाव से समाज में सकारात्मकता और सदाचार का संचार किया जा सकता है।

शरद पूर्णिमा पर गायत्री साधकों ने किया 24 घंटे का अखण्ड जप, सहस्रनाम पाठ और यज्ञीय समीक्षा शरद पूर्णिमा पर गायत्री साधकों ने किया 24 घंटे का अखण्ड जप, सहस्रनाम पाठ और यज्ञीय समीक्षा Reviewed by PSA Live News on 9:07:00 pm Rating: 5

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