रांची। बजट सत्र की गंभीर चर्चाओं और नीतिगत विमर्श के बीच शुक्रवार की शाम झारखंड विधानसभा परिसर में रंग, उल्लास और आत्मीयता का अनूठा संगम देखने को मिला। अवसर था होली मिलन समारोह का, जिसमें सदन की राजनीतिक सीमाएं पीछे छूट गईं और लोकतंत्र के इस मंदिर में प्रेम, भाईचारे और सद्भाव के रंग बिखर गए।
समारोह में विधानसभा अध्यक्ष रबीन्द्र नाथ महतो और मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने मंत्रिपरिषद के सदस्यों और विभिन्न दलों के विधायकों के साथ फूलों की होली खेली। पारंपरिक अबीर-गुलाल के स्थान पर पुष्प वर्षा और फूलों से होली खेलकर पर्यावरण संरक्षण और सौहार्द का संदेश दिया गया।
लोकतंत्र के आंगन में रंगों की बौछार
कार्यक्रम के दौरान सदन परिसर में आत्मीय माहौल देखने को मिला। पक्ष और विपक्ष के विधायक एक-दूसरे को रंग लगाते, गले मिलते और होली की शुभकामनाएं देते नजर आए। ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक लोकधुनों की मधुर थाप पर जनप्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
विधानसभा अध्यक्ष रबीन्द्र नाथ महतो ने सभी सदस्यों को होली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा का प्रतीक है। होली हमें भेदभाव मिटाकर एकता और सद्भाव के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सदन की कार्यवाही भी इसी सकारात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ेगी।
“खुशियों का रंग हमेशा रहे बरकरार” : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने राज्यवासियों को होली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा,
“आप सभी की जिंदगी में खुशियों का रंग हमेशा बरकरार रहे। होली पारस्परिक प्रेम, आपसी भाईचारा और सौहार्द-सद्भाव का पर्व है। हम सभी इस त्योहार को उमंग और उत्साह के साथ मनाएं।”
उन्होंने कहा कि झारखंड विविधताओं का प्रदेश है, जहां विभिन्न समुदाय, भाषाएं और संस्कृतियां मिलकर सामाजिक समरसता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती हैं। ऐसे पर्व समाज को जोड़ने और आपसी विश्वास को मजबूत करने का कार्य करते हैं।
राजनीतिक मतभेदों से ऊपर सामाजिक समरसता
होली मिलन समारोह ने यह संदेश दिया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन मनभेद नहीं होने चाहिए। सदन में विचारों का टकराव हो सकता है, किंतु सामाजिक और सांस्कृतिक अवसरों पर एकजुटता ही लोकतंत्र की असली शक्ति है।
बजट सत्र की व्यस्तताओं के बीच आयोजित इस कार्यक्रम ने जनप्रतिनिधियों को एक-दूसरे के साथ अनौपचारिक संवाद का अवसर भी प्रदान किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे आयोजन सदन के भीतर सकारात्मक वातावरण निर्माण में सहायक होते हैं।
सामाजिक सद्भाव का संदेश
कार्यक्रम का समापन पारंपरिक मिठाइयों के आदान-प्रदान और सामूहिक शुभकामनाओं के साथ हुआ। पूरे आयोजन में अनुशासन, सादगी और सांस्कृतिक गरिमा का विशेष ध्यान रखा गया।
होली मिलन समारोह ने यह स्पष्ट कर दिया कि रंगों का यह पर्व केवल उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, आपसी विश्वास और सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक है। झारखंड विधानसभा से निकला यह संदेश राज्यभर में सौहार्द और समरसता की नई ऊर्जा भरने वाला साबित होगा।
Reviewed by PSA Live News
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6:29:00 pm
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