झारखंड की नियुक्तियों पर संजय सेठ का बड़ा हमला: "एक परीक्षा, सात परिणाम! 26 हजार सहायक आचार्य बहाली में आखिर क्या छिपा रही है सरकार?"
रक्षा राज्य मंत्री ने भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर उठाए गंभीर सवाल, TDPPL एजेंसी, OMR हेराफेरी और राहुल गांधी की चुप्पी पर भी सरकार को घेरा
रांची, 28 जुलाई। झारखंड में विभिन्न सरकारी नियुक्तियों को लेकर सियासत एक बार फिर तेज हो गई है। केंद्र सरकार में रक्षा राज्य मंत्री एवं रांची के सांसद संजय सेठ ने राज्य की भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार पर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से भर्ती परीक्षाओं में लगातार विवाद सामने आते रहे हैं, लेकिन सरकार ने न तो पारदर्शी जांच कराई और न ही दोषियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की।
संजय सेठ ने कहा कि यह अत्यंत चिंताजनक है कि जिस परीक्षा एजेंसी TDPPL को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा ब्लैकलिस्ट किया गया था, उसी एजेंसी को बाद में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षा आयोजित करने की जिम्मेदारी सौंप दी गई। उनके अनुसार यह निर्णय अपने आप में कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है और इससे पूरी भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में OMR शीट में कथित हेराफेरी की शिकायतें सामने आईं, जिनमें कम अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को सफल घोषित कर दिया गया, जबकि अधिक अंक प्राप्त करने वाले योग्य उम्मीदवारों को न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे आरोप सही हैं तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य के साथ गंभीर अन्याय है।
रक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि पिछले चार वर्षों से भर्ती परीक्षाओं में एक ही एजेंसी की भूमिका को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं, लेकिन राज्य सरकार ने इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने की बजाय पूरे मामले को नजरअंदाज किया। उन्होंने आशंका जताई कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो युवाओं का सरकारी भर्ती प्रणाली से विश्वास पूरी तरह समाप्त हो सकता है।
26 हजार सहायक आचार्य बहाली पर उठाए बड़े सवाल
संजय सेठ ने विशेष रूप से 26 हजार सहायक आचार्य नियुक्ति प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि इस भर्ती में भी व्यापक अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि आज तक इस भर्ती का अंतिम परिणाम जारी नहीं किया गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक ही परीक्षा के परिणाम सात अलग-अलग चरणों में घोषित किए गए। उन्होंने पूछा कि आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थितियां थीं, जिनके कारण परिणाम किस्तों में जारी किए गए? इससे पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता संदेह के घेरे में आ गई है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आयोग द्वारा न तो कट-ऑफ अंक सार्वजनिक किए जा रहे हैं और न ही अभ्यर्थियों के प्राप्तांक उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उनके अनुसार यदि सरकार और आयोग के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो सभी अभ्यर्थियों के अंक, मेरिट सूची और कट-ऑफ तत्काल सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
राहुल गांधी से भी पूछा सवाल
संजय सेठ ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे देशभर में युवाओं के अधिकार और रोजगार की बात करते हैं, लेकिन झारखंड के युवाओं के साथ हो रहे कथित अन्याय पर उनकी चुप्पी समझ से परे है। उन्होंने कहा कि झारखंड में कांग्रेस के समर्थन से सरकार चल रही है, ऐसे में राहुल गांधी को इस पूरे मामले पर अपनी स्पष्ट राय रखनी चाहिए।
उन्होंने सवाल किया कि क्या झारखंड के युवा देश के युवा नहीं हैं, या फिर राज्य सरकार को बचाने के लिए उनके भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दों पर मौन साध लिया गया है?
उच्चस्तरीय जांच की मांग
रक्षा राज्य मंत्री ने मांग की कि राज्य सरकार सभी विवादित भर्ती प्रक्रियाओं की उच्चस्तरीय, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराए। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता या भ्रष्टाचार पाया जाता है तो दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए तथा योग्य अभ्यर्थियों को न्याय दिलाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी युवाओं के अधिकारों और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष जारी रखेगी और राज्य के लाखों युवाओं की आवाज को मजबूती से उठाती रहेगी।
(यह समाचार रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ द्वारा जारी प्रेस वक्तव्य एवं लगाए गए आरोपों पर आधारित है। इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
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