श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर में दिव्य अनुष्ठान के साथ संपन्न हुआ 'अनंत चतुर्दशी' व्रत: महाभिषेक से महाआरती तक उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
रातू रोड स्थित तिरुपति बालाजी मंदिर में भगवान विष्णु के 'अनंत रूप' का हुआ सहस्रधारा महाभिषेक; खीर और पोंगल का लगाया गया बाल भोग
राँची (विशेष संवाददाता): रातू रोड, राणी सती मंदिर लेन स्थित नगर के प्रसिद्ध दिव्यदेशम् श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर (श्रीतिरुपति बालाजी) में अनंत चतुर्दशी का पावन व्रत-पर्व पूरे विधि-विधान और शास्त्रीय परंपरा के साथ धूमधाम से संपन्न हुआ। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की विशेष अर्चना कर सुख-समृद्धि एवं आरोग्य की कामना की।
नित्याराधनम् और वैदिक महाभिषेक से हुई दिन की शुरुआत
अनंत चतुर्दशी की पावन प्रातः बेला में भगवान् श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर के विश्वरूप दर्शन एवं सुप्रभातम् के साथ धार्मिक अनुष्ठानों का शुभारंभ हुआ। दिक्बन्धन क्रिया आदि नित्याराधनम् के पश्चात भगवान का दूध, दही, शहद, गंगाजल और डाभयुक्त (नारियल) जल से पवित्र महाभिषेक किया गया।
इसके बाद हरिद्राघोल (हल्दी घोल) का लेपन कर सहस्रधारा, कुंभधारा, चक्रधारा और शंखधारा से बारंबार प्रभु का अभिषेक हुआ।
चौदहवें तेज से अलंकृत दिव्य श्रृंगार और महाआरती
महाभिषेक के उपरांत भगवान के सभी विग्रहों को सुवासित चंदन से चर्चित किया गया। श्रीदेवी, भूदेवी, नीलादेवी और पद्मावती—इन चार देवियों के चतुर्विध तेज से सेवित भगवान श्रीमन्नारायण को सुगंधित तेल व इत्र से मार्जन कर धूप-दीप से सुवासित किया गया।
प्रभु का आजानुलंबिनी वनमाला, किरीट माला और गंड मालाओं के समुदाय से मनमोहक एवं श्रृंगारोचित अलंकरण किया गया। तत्पश्चात महाआरती उतारी गई और पोंगल, खीर, फल तथा मेवे का दिव्य बाल भोग अर्पित किया गया।
कौंडिन्य ऋषि परंपरा से 'अनंत व्रत' का अनुष्ठान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस प्रकार पौराणिक काल में धर्मात्मा कौंडिन्य ऋषि ने उत्तम अनंत व्रत संपन्न किया था, ठीक उसी विधि से भगवान श्रीनिवास की गंध, दीपक, धूप, कुंकुम, चंदन, तुलसीदल और दिव्य पुष्पों से सविधान पूजा की गई।
आध्यात्मिक महत्व: मंदिर के आचार्यों ने बताया कि अनंत चतुर्दशी पर भगवान के अनंत स्वरूप का पूजन और अनंत सूत्र धारण करने से प्राणी के समस्त कायिक, वाचिक और मानसिक पापों का शमन होता है तथा उसे मोक्ष (परमोत्तम गति) की प्राप्ति होती है।
अनुष्ठान के यजमान एवं प्रमुख सहभागिता
- मुख्य यजमान: इस दिव्य महाभिषेक और पूजन के मुख्य यजमान राँची निवासी श्री शशांक धरनीधरका एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती सौम्या धरनीधरका रहे।
- वैदिक आचार्य: संपूर्ण दिन के अनुष्ठान को मंदिर के अर्चक श्री सत्यनारायण गौतम, श्री गोपेश आचार्य एवं श्री नारायण दास जी ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधिवत संपन्न कराया।
इस पावन अवसर पर सर्वश्री राम अवतार नारसरिया, अनूप अग्रवाल, प्रदीप नारसरिया, राजेश सुल्तानिया, रंजन सिंह, ओमप्रकाश गरोदिया सहित बड़ी संख्या में शहर के श्रद्धालुगण उपस्थित होकर पुण्य के भागी बने।
Reviewed by PSA Live News
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12:53:00 pm
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