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देवों और कश्यप की प्रार्थना एवं अदिति की तपस्या से संतुष्ट हो भगवान् श्रीमन्नारायण ने वामन रूप में अवतार लिया

 


रांची। राँची नगर में स्थित दिव्यदेशम् श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर (तिरुपति बालाजी) मंदिर में 23 सितम्बर बुधावार को श्रवण नक्षत्र युक्ताः श्रवण द्वादशी, वामन द्वादशी वामनावतार दिवस के शुभ उपलक्ष्य पर तिरुमञ्जनानुब्ठान का दिव्य और भव्य आयोजन संपन्न हुआ।

इस पुण्य अवसर पर ब्रह्ममुहूर्त में प्रातः 4.30 बजे विश्व के अन्तर्यामी भगवान श्रीहरि का विश्वरूप दर्शन, सुप्रभातम, मंगलाशासनम्, करावलंबम्, वेंकटेश स्तोत्रम और वेंकटेश प्रपति के बाद तेजो के निधान मंगलमूर्ति भगवान्‌ का पाञ्चरात्र विधि से षोडषोपचार तिरुवाराधना संपादन किया। इसके उपरान्त सनातन परमात्मा का अंगन्यास मुद्रादि और अन्य  उपचारादि पूर्वक  दूध ,दधि से समुज्जवला अभिषेकम, वेदगान से प्रहर्षित हो परिरंजीत शुद्धोदका अभिषेकम्, महाहरिद्रा अनुलेपन करके पुनः वेंकटेश चर्तुव्यूह मूर्ति का गंगाजलाभिषेकम् आदि अनेकों विधि और औषधिये द्रव्यों से बारम्बार महाभिषेक हुआ। फिर अनुपमेय लोकेश भगवान् वेंकटेश एवं उनकी पटरानी चन्द्रमा की उज्जल ज्योत्सनावाली श्रीश्रीदेवी और वामभाग में श्यामलांगी सर्वसहा श्रीभूमि देवी सहित चक्रराज सुदर्शन को रेशमी वस्त्र धारण कराकर सद्‌भूषणों से सुसज्जित कर नक्षत्र, कुंभ और कर्पूर से महाआरती हुई। 

इसके बाद तीन पग में चौदहों भुवन को धारण करनेवाले, श्रीमान् भगवान् इन्द्र के छोटे भाई के रूप में अदिति का आनंद बढ़ाने वाले पुत्र बने, उन देवदेवोत्तम भगवान् उपेन्द्र (वामन) का प्राकट्‌योत्सव पर्व  मंत्र सहित अनेक विधियों से मनाया गया।  श्रीवामन स्तुति, वेंकटेश स्तुति, श्रीसूक्त ,पुरुषसूक्त, विष्णु सूक्त, नारायणुवाक आदि वैदिक ॠचाओं के समवेत गान से श्रीभगवान् सहित महालक्ष्मी की भूरी भूरी स्तुति की गई । फिर भगवान को थक्काली सादम (टमाटर अन्नम्) ,खीर फल और मेवा का बालभोग निवेदन हुआ।

आज महाभिषेक के यजमान श्री रमेश कुमार धरनीधरका धर्मपत्नी श्रीमती शशि धरनीधरका रांची निवासी हुए।

अर्चक : श्री गोपेश आचार्य और श्री नारायण दास जी ने मिलकर दिनभर के सारे अनुष्ठान को विधिवत संपन्न कराया।

 मुख्य रूप से मंदिर संचालन समिति की कार्यकारी अध्यक्ष श्री राम अवतार नारसरिया एवं सर्वश्री अनूप अग्रवाल राजेश सुल्तानिया प्रदीप नारसरिया सुशील लोहिया रंजन सिंह ओम प्रकाश गरोदिया आदि की भूमिका रही।

देवों और कश्यप की प्रार्थना एवं अदिति की तपस्या से संतुष्ट हो भगवान् श्रीमन्नारायण ने वामन रूप में अवतार लिया देवों और कश्यप की प्रार्थना एवं अदिति की तपस्या से संतुष्ट हो भगवान् श्रीमन्नारायण ने वामन रूप में अवतार लिया Reviewed by PSA Live News on 8:41:00 pm Rating: 5

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