बाबा विद्यापति स्मारक समिति की बैठक में ऐतिहासिक निर्णय: 25 अक्टूबर को धूमधाम से मनाया जाएगा मिथिलांचल का लोक पर्व कोजागरा (महालक्ष्मी पूजा)
रांची: मिथिलांचल की प्राचीन, समृद्ध और सांस्कृतिक विरासत को निरंतर आगे बढ़ाने और उसकी परंपराओं को जीवंत रखने की दिशा में बाबा विद्यापति स्मारक समिति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम सामने आया है। आज समिति के कार्यालय में अध्यक्ष जयन्त झा की अध्यक्षता में एक आवश्यक और उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई, जिसमें सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि आगामी 25 अक्टूबर 2026 (दिन रविवार) को शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर समिति के प्रांगण में कोजागरा (महालक्ष्मी पूजा) पर्व बेहद हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समाज के विभिन्न वर्गों को आपस में जोड़ने का एक अनूठा सांस्कृतिक माध्यम भी है।
बैठक के दौरान वक्ताओं ने मिथिलांचल की गौरवशाली संस्कृति पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि शरद पूर्णिमा के दिन मिथिला नगरी में कोजागरा पर्व का विशेष और अलौकिक महत्व होता है। मिथिला की प्राचीन परंपरा के अनुसार, शरद पूर्णिमा के दिन नवविवाहित वर के घर लड़की पक्ष (ससुराल) की ओर से शगुन के रूप में नए वस्त्र, पान, मखाना, चूड़ा, दही, चीनी, पारंपरिक खाजा, और विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट लड्डू भेजे जाते हैं। इन सभी पवित्र खाद्य सामग्रियों और उपहारों को सर्वप्रथम विधि-विधान के साथ माता महालक्ष्मी के समक्ष अर्पित कर उनका भोग लगाया जाता है। इसके पश्चात, इस प्रसाद को समाज के सभी गणमान्य लोगों, परिजनों और आगंतुकों के बीच श्रद्धापूर्वक वितरित किया जाता है, जो आपसी प्रेम, आत्मीयता और आदर भाव का प्रतीक माना जाता है।
इसके अलावा, बैठक में शरद पूर्णिमा की रात्रि से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं और वैज्ञानिक-सांस्कृतिक महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। धार्मिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात को वर्ष की सबसे पवित्र और ऊर्जावान रात माना जाता है, इस दौरान आकाश से अमृत वर्षा होती है। इसी परंपरा के तहत इस दिन घरों में विशेष रूप से खीर बनाई जाती है, जिसे पूरी रात खुले आसमान के नीचे ओस (सित) में रखा जाता है ताकि उसमें प्रकृति के सकारात्मक और आरोग्यवर्धक तत्व समाहित हो सकें। दूसरे दिन प्रातःकाल इस प्रसाद रूपी खीर को घर के सभी सदस्य पूरी आस्था के साथ ग्रहण करते हैं। इस पूरी परंपरा को इस वर्ष समिति द्वारा सामूहिक और भव्य रूप से जीवंत करने का संकल्प लिया गया है, जिससे नई पीढ़ी भी अपनी संस्कृति से भली-भांति परिचित हो सके।
इस महत्वपूर्ण बैठक को सफल बनाने और आयोजन की रूपरेखा तैयार करने में समिति के कई प्रतिष्ठित और प्रबुद्ध सदस्यों ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई। बैठक में अध्यक्ष जयंत झा के साथ-साथ डॉ० पंकज रॉय, पूर्णेंदु ठाकुर, ज्ञानदेव झा, विश्व मोहन झा, उदित नारायण ठाकुर, आशु झा, वैद्य मनोज झा, राजेश झा, संतोष मिश्रा, विनय सिंह, रणजीत लाल दास, मृत्युंजय झा, राधेश्याम यादव, हेमंत झा और अनूप झा जैसे गणमान्य महानुभावों ने भाग लिया। इन सभी प्रबुद्धजनों ने अपने बहुमूल्य सुझाव साझा किए और कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाने के लिए अपनी सहमति दी। बैठक के अंत में समिति के अध्यक्ष जयन्त झा ने मीडिया को यह आधिकारिक जानकारी देते हुए मिथिलांचल और झारखंड के तमाम संस्कृति प्रेमियों से अपील की है कि वे 25 अक्टूबर 2026 को आयोजित होने वाले इस पावन पर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और माता महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त करें।
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8:08:00 pm
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