सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की सख्त एडवाइजरी: प्राइवेट सैटेलाइट टीवी चैनलों के लिए प्रोग्राम कोड का कड़ाई से पालन अनिवार्य
नई दिल्ली: सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Information & Broadcasting) ने देश के सभी प्राइवेट सैटेलाइट टीवी चैनलों के लिए एक बेहद सख्त और व्यापक एडवाइजरी जारी की है, जिसका उद्देश्य केबल टेलीविजन नेटवर्क्स (रेगुलेशन) Act, 1995 और केबल टेलीविजन नेटवर्क्स Rules, 1994 के अंतर्गत निर्धारित 'प्रोग्राम कोड' का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करना है। मंत्रालय के संज्ञान में यह बात आई थी कि विभिन्न प्राइवेट सैटेलाइट टीवी चैनलों द्वारा लगातार इन नियमों और प्रोग्राम कोड के प्रावधानों की अनदेखी की जा रही है। इस संबंध में केबल टेलीविजन नेटवर्क्स (अमेंडमेंट) रूल्स, 2021 के तहत गठित अंतर-विभागीय समिति (IDC) ने अपनी बैठक में यह पाया कि कई चैनलों पर प्रसारित होने वाली सामग्री इन नियमों की मूल भावना के अनुरूप नहीं है, जिसके चलते यह कड़ा कदम उठाया गया है। समिति ने सिफारिश की थी कि सभी प्राइवेट सैटेलाइट टीवी चैनलों को टेलीविजन पर सामग्री के प्रसारण को नियंत्रित करने वाले वैधानिक प्रावधानों का कड़ाई से पालन करने की सलाह दी जाए और किसी भी प्रकार के अनुचित व्यवहार या भाषा को सामान्य न माना जाए।
मंत्रालय द्वारा जारी इस विस्तृत एडवाइजरी में कुल सात प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित करने का निर्देश दिया गया है, जिनमें सबसे पहले आतंकवादी विरोधी अभियानों के कवरेज का मुद्दा उठाया गया है। इसके तहत नियम 6(1)(p) का हवाला देते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि सुरक्षा बलों के एंटी-टेररist ऑपरेशनों का लाइव कवरेज पूरी तरह प्रतिबंधित है और इस दौरान मीडिया कवरेज केवल किसी अधिकृत अधिकारी द्वारा दी जाने वाली आवधिक ब्रीफिंग तक ही सीमित रहना चाहिए। साथ ही, ऐसे दृश्यों पर समय की मुहर (time-stamp) लगाना अनिवार्य किया गया है ताकि लाइव कवरेज जैसा कोई भी भ्रम न फैले। इसके अलावा, चैनलों को हिंसक, ग्राफिक या परेशान करने वाले दृश्यों को दिखाते समय अत्यधिक सावधानी, जिम्मेदारी और संपादकीय विवेक का उपयोग करने की हिदायत दी गई है, ताकि अच्छे स्वाद या शालीनता के मानदंडों का उल्लंघन न हो और दर्शकों में अनावश्यक मानसिक तनाव या डिस्ट्रेस पैदा न हो। अपराध और हिंसा की रिपोर्टिंग के मामले में भी यह अनिवार्य किया गया है कि सभी खबरें पूरी तरह से सत्यापित तथ्यों और सच्चाई पर आधारित होनी चाहिए, जिससे किसी भी तरह की सनसनीखेज रिपोर्टिंग, आधे-सत्य या भ्रामक इनवेन्डो के जरिए गैरकानूनी और सामाजिक रूप से अवांछित व्यवहार को बढ़ावा न मिले।
प्राकृतिक आपदाओं, बड़ी दुर्घटनाओं और आपदाओं के कवरेज के दौरान भी चैनलों को कड़ी चेतावनी दी गई है कि वे दृश्यों का प्रसारण करते समय उपयुक्त टाइम-स्टैम्प का इस्तेमाल करें और केवल सत्यापित तथ्यों पर ही आधारित रिपोर्टिंग करें, जिससे आम जनता और दर्शकों के बीच अनावश्यक पैनिक या डर का माहौल न बने। राष्ट्र की अखंडता को सबसे ऊपर रखते हुए, नियम 6(1)(h) के तहत सभी प्राइवेट सैटेलाइट टीवी चैनलों को यह सख्त निर्देश दिया गया है कि वे अपने सभी टेलीकास्ट, ग्राफिक्स और डिजिटल प्रस्तुतियों में केवल 'सर्वे ऑफ इंडिया' (Survey of India) द्वारा प्रकाशित भारत के आधिकारिक और सही मानचित्रों का ही उपयोग करें। इसके अतिरिक्त, सांप्रदायिक सौहार्द और डिबेट कार्यक्रमों के संबंध में नियम 6(1)(c) और 6(1)(e) का हवाला देते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि कोई भी कार्यक्रम सांप्रदायिक या राष्ट्र-विरोधी भावनाओं को बढ़ावा देने वाला नहीं होना चाहिए। चैनलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे लाइव डिबेट और पैनल चर्चाओं के दौरान पैनलिस्टों का पूर्व-संवेदीकरण (pre-sensitisation) सुनिश्चित करें और अपमानजनक, abusive या भड़काऊ सामग्री के प्रसारण को रोकने के लिए म्यूट करने, डिस्क्लेमर देने या फीड को तुरंत रोकने जैसे आवश्यक उपचारात्मक उपाय करें। यौन अपराधों के पीड़ितों की सुरक्षा के संबंध में माननीय सुप्रीम कोर्ट के लगातार निर्देशों और कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए यह पुनः दोहराया गया है कि किसी भी यौन अपराध के पीड़ित की पहचान प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उजागर करने वाली कोई भी जानकारी, जैसे कि नाम, दूर की बातें, फोटो, पारिवारिक विवरण या स्थान, का प्रसारण कतई नहीं किया जाना चाहिए।
इन सब के बीच, मंत्रालय ने आधुनिक तकनीक के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इसके टूल्स (जैसे जनरेटिव AI) के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर भी एक बहुत बड़ा और अहम निर्देश जारी किया है। चैनलों को आगाह किया गया है कि वे कार्यक्रमों, ग्राफिक्स या वर्चुअल न्यूज प्रस्तुतियों में AI टूल का उपयोग करते समय अत्यधिक सावधानी बरतें। AI का यह उपयोग समाचार सामग्री की सटीकता, प्रमाणिकता और संवेदनशीलता से किसी भी प्रकार का समझौता किए बिना केवल एक सहायक (assistive) क्षमता तक ही सीमित रहना चाहिए। अंत में, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सभी ब्रॉडकास्टर्स को अपने आंतरिक संपादकीय और सामग्री समीक्षा तंत्र (editorial and content review mechanisms) को और अधिक मजबूत करने की सलाह दी है। चैनलों से यह भी अपेक्षा की गई है कि वे समाचार संकलन, संपादन और प्रसारण से जुड़े अपने सभी कर्मचारियों को प्रोग्राम कोड के प्रावधानों के प्रति पूरी तरह से संवेदनशील बनाएं और इसके लिए नियमित अंतराल पर कार्यशालाओं (workshops) तथा प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करें। मंत्रालय ने कड़ी चेतावनी दी है कि वैधानिक दायित्वों का पालन करना हर हाल में अनिवार्य है और प्रोग्राम कोड का किसी भी तरह का उल्लंघन करने पर केबल टेलीविजन नेटवर्क्स (रेगुलेशन) Act, 1995 और उसके नियमों के तहत सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
Reviewed by PSA Live News
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9:16:00 pm
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