ब्लॉग खोजें

विरोध-प्रदर्शनों की कवरेज के लिए भारतीय प्रेस परिषद ने जारी की व्यापक गाइडलाइंस: पत्रकारों की सुरक्षा, निष्पक्षता और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन साधने की ऐतिहासिक पहल


विशेष समाचार रिपोर्ट | नई दिल्ली

देशभर में लगातार बढ़ रहे विरोध-प्रदर्शनों, जन-आंदोलनों और तनावपूर्ण स्थितियों के बीच मीडियाकर्मियों की सुरक्षा और जिम्मेदार पत्रकारिता को लेकर भारतीय प्रेस परिषद (Press Council of India - PCI) ने एक ऐतिहासिक और अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया है। 14 अक्टूबर 2026 को आयोजित अपनी उच्चस्तरीय बैठक में गहन विचार-विमर्श के पश्चात, प्रेस परिषद ने 15 अक्टूबर 2026 को "Guidelines for Journalists Covering Protests and Demonstrations" (विरोध-प्रदर्शनों और प्रदर्शनों की कवरेज करने वाले पत्रकारों के लिए दिशानिर्देश) औपचारिक रूप से स्वीकार कर देश के समस्त मीडिया जगत के लिए जारी कर दिए हैं। नई दिल्ली स्थित सूचना भवन (8 सी.जी.ओ. कॉम्प्लेक्स, लोधी रोड) से जारी इस आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति संख्या PR/8/26-27-PCI के माध्यम से प्रेस परिषद ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान परिस्थितियों में ग्राउंड ज़ीरो से रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों की जान-माल की सुरक्षा, समाचारों की निष्पक्षता तथा सुरक्षा बलों के साथ समन्वय स्थापित करना बेहद आवश्यक हो गया है।

भारतीय प्रेस परिषद द्वारा जारी इस विस्तृत नियमावली में पत्रकारों की पहचान और उनके पेशेवर आचरण को प्राथमिक आधार माना गया है। प्रेस परिषद ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि किसी भी प्रदर्शन या हिंसक स्थिति की कवरेज करते समय पत्रकारों के पास उनके मीडिया संगठन या समाचार पत्र द्वारा जारी वैध पहचान पत्र अथवा PIB/DIP की आधिकारिक मान्यता का होना अनिवार्य है। इसके साथ ही, प्रेस आईडी कार्ड को हमेशा इस तरह पहनना चाहिए कि वह सुरक्षा बलों और आम जनता को स्पष्ट रूप से दिखाई दे। भीड़ की अचानक आवाजाही, भगदड़ या पुलिस कार्रवाई के दौरान कार्ड की डोरी (lanyard) में फंसने या उलझने के जोखिम को कम करने के लिए विशेष सावधानी बरतने का सुझाव दिया गया है। जब भी कानून प्रवर्तन एजेंसियां या पुलिसकर्मी पूछताछ करें, तो पत्रकारों को बेहद शांत और शालीन भाव से अपनी पत्रकारिता पहचान स्पष्ट करनी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रेखांकित की गई है कि पत्रकारों को हर हाल में अपनी पूर्ण तटस्थता और पेशवेर आचरण बनाए रखना होगा। मीडियाकर्मियों को किसी भी स्थिति में प्रदर्शनकारियों का हिस्सा नहीं बनना चाहिए, न ही किसी का पक्ष लेना चाहिए, न हिंसा या उकसावे में शामिल होना चाहिए और न ही पुलिस या प्रदर्शनकारियों के कार्य में किसी प्रकार की बाधा डालनी चाहिए। तनावपूर्ण क्षणों में पुलिस के वैध सुरक्षा निर्देशों का पालन करना और सुरक्षा कारणों से दिए गए आदेशों को मानते हुए शांतिपूर्वक अपनी प्रेस स्थिति का उल्लेख करना अनिवार्य बनाया गया है।

मैदानी रिपोर्टिंग के दौरान शारीरिक सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन पर जोर देते हुए दिशानिर्देशों में कहा गया है कि पत्रकारों को हिंसक टकरावों और पुलिस कार्रवाई की आशंका वाले स्थानों से हमेशा एक सुरक्षित और उचित दूरी बनाए रखनी चाहिए। कैमरों या रिकॉर्डिंग उपकरणों को पुलिस बैरिकेड्स, वाहनों या अन्य सरकारी संपत्तियों पर इस प्रकार बांधने या लगाने की सख्त मनाही की गई है, जिससे आवाजाही में बाधा उत्पन्न हो या संपत्ति को नुकसान पहुंचे। भीड़ के बीच से गुजरते समय हमेशा छोटे कदम उठाने की सलाह दी गई है ताकि पैर फिसलने, गिरने या कुचले जाने की दुर्घटना से बचा जा सके। इसके अतिरिक्त, पत्रकारों को प्रदर्शनकारियों, पुलिस, विरोधी गुटों और आसपास उत्पन्न हो रहे अन्य खतरों के संदर्भ में अपनी स्थिति का लगातार आकलन करते रहना चाहिए।

बदलती परिस्थितियों के बीच परिस्थितियों की सजगता (Situational Awareness) और आपातकालीन निकास योजना को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है। रिपोर्टरों को सलाह दी गई है कि वे अपने आसपास के माहौल, भीड़ के व्यवहार में बदलाव, आते हुए समूहों, अचानक बढ़ते शोर और उभरते खतरों पर लगातार नजर रखें। घटनास्थल पर उतरते ही एक सुरक्षित निकास मार्ग (Escape Route) को ध्यान में रखना चाहिए और परिस्थितियां बिगड़ने पर तुरंत आसपास के रास्तों, गलियों, खुले स्थानों और सुरक्षित भवनों को चिह्नित कर लेना चाहिए। यदि क्षेत्र में आंसू गैस या धुएं का प्रयोग होता है, तो भीड़ के अंदर और गहराई में जाने के बजाय पूर्व-चिह्नित लैंडमार्क और सुरक्षित रास्तों का प्रयोग करके प्रभावित क्षेत्र से तुरंत बाहर निकल जाना चाहिए।

पत्रकारों की व्यक्तिगत सुरक्षा और त्वरित प्राथमिक चिकित्सा (First Aid) के लिए प्रेस परिषद ने एक अनिवार्य इमरजेंसी किट ले जाने का सुझाव दिया है। इस किट में बुनियादी फर्स्ट-एड सामग्री, आवश्यक व्यक्तिगत दवाएं, पीने का पानी, हाई-प्रोटीन स्नैक्स, टॉर्च, छोटा तौलिया या कपड़ा और आंखों को धुएं व गैस से बचाने वाला चश्मा (goggles) शामिल होना चाहिए। गंभीर खतरे वाले क्षेत्रों में कवरेज के दौरान पत्रकारों को उपयुक्त सुरक्षात्मक हेलमेट और बॉडी आर्मर (बुलेटप्रूफ या दंगा-रोधी जैकेट) पहनने की सलाह दी गई है, हालांकि यह भी स्पष्ट किया गया है कि सुरक्षात्मक उपकरण पहनने का अर्थ यह नहीं है कि गैर-जरूरी जोखिम उठाया जाए। फील्ड में तैनात होने से पहले मीडियाकर्मियों को प्राथमिक चिकित्सा का बुनियादी ज्ञान होना चाहिए और सुरक्षा उपकरणों के उपयोग का अभ्यास कर लेना चाहिए। इसके साथ ही, सुरक्षा बलों द्वारा छोड़े गए आंसू गैस के गोलों, फ्लैश-बैंग उपकरणों या धुएं के ग्रेनेड को कभी भी छूने, उठाने या हटाने का प्रयास नहीं करना चाहिए क्योंकि वे बेहद गर्म हो सकते हैं, अचानक फट सकते हैं या उनमें हानिकारक रासायनिक अवशेष हो सकते हैं।

न्यूज़रूम और फील्ड पत्रकारों के बीच निरंतर संचार और समन्वय स्थापित करने के लिए भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। असाइनमेंट के दौरान पत्रकारों को अपने न्यूज़रूम के साथ नियमित संपर्क बनाए रखना होगा। सभी मीडिया घरानों को अपने संस्थानों में एक विशेष नोडल अधिकारी या पॉइंट ऑफ कांटेक्ट नामित करने का निर्देश दिया गया है जो मैदान में तैनात पत्रकारों की लोकेशन और स्थिति पर लगातार निगरानी रखेगा और आपात स्थिति में तुरंत सहायता पहुंचाएगा। फ्रीलांस पत्रकारों के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे अपने किसी विश्वसनीय संपादक या संपर्क व्यक्ति को अपनी लोकेशन, असाइनमेंट प्लान और लौटने के समय की जानकारी अवश्य दें। अकेले काम करने वाले पत्रकारों को एक-दूसरे का ध्यान रखने और साथी सहकर्मियों से संपर्क में रहने का सुझाव दिया गया है। वहीं, पूर्व-नियोजित प्रदर्शनों की कवरेज से पहले मीडिया संगठनों को सलाह दी गई है कि वे पुलिस के मीडिया अधिकारियों या प्रेस पीआरओ के साथ संवाद प्रोटोकॉल तय करें और पत्रकारों के लिए निर्धारित सुरक्षित मीडिया जोन (Media Staging Areas) की पहचान करें।

प्रेस विज्ञप्ति के अंतिम अध्याय में नैतिक और जिम्मेदार रिपोर्टिंग (Ethical and Responsible Reporting) के सिद्धांतों को रेखांकित किया गया है। भारतीय प्रेस परिषद ने कहा है कि घटनाओं का कवरेज पूरी तरह से सटीक, निष्पक्ष और वस्तुनिष्ठ होना चाहिए, जिसमें सत्यापित तथ्यों, केवल आरोपों, अफवाहों और असत्यापित दावों के बीच स्पष्ट अंतर किया जाए। सूचनाओं का सत्यापन हमेशा एक से अधिक स्वतंत्र स्रोतों से किया जाना चाहिए और प्रत्यक्षदर्शियों से जानकारी की सत्यता परखनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों, आयोजकों, पुलिस और सरकारी अधिकारियों—सभी के बयानों की समान पत्रकारिता मानकों के साथ जांच की जानी चाहिए और बिना पुष्टि के किसी भी दावे को प्रसारित नहीं करना चाहिए। लाइव कवरेज के दौरान पुलिस की रीयल-टाइम लोकेशन, रणनीतिक आवाजाही या निकास रास्तों का सीधा प्रसारण करने पर पूरी तरह से रोक लगाई गई है क्योंकि इससे सुरक्षा और ऑपरेशन्स खतरे में पड़ सकते हैं। नाबालिगों, संवेदनशील व्यक्तियों, घायलों और संकट में फंसे आम नागरिकों का फिल्मांकन करते समय अत्यंत संवेदनशीलता बरतने और उनकी निजता (privacy) तथा सुरक्षा का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रेस परिषद ने स्पष्ट शब्दों में मीडिया घरानों और पत्रकारों को सचेत किया है कि एक्सक्लूसिव फुटेज की होड़, लाइव ब्रॉडकास्ट की समय-सीमा या टीआरपी के दबाव में आकर किसी भी हाल में अपनी और दूसरों की सुरक्षा से समझौता न किया जाए।

विरोध-प्रदर्शनों की कवरेज के लिए भारतीय प्रेस परिषद ने जारी की व्यापक गाइडलाइंस: पत्रकारों की सुरक्षा, निष्पक्षता और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन साधने की ऐतिहासिक पहल विरोध-प्रदर्शनों की कवरेज के लिए भारतीय प्रेस परिषद ने जारी की व्यापक गाइडलाइंस: पत्रकारों की सुरक्षा, निष्पक्षता और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन साधने की ऐतिहासिक पहल Reviewed by PSA Live News on 9:38:00 pm Rating: 5

कोई टिप्पणी नहीं:

Blogger द्वारा संचालित.