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बिहार में भूमि सुधार अभियान पर सरकार की सख्ती: जमाबंदी, म्यूटेशन और मुफ़्त भू-मापी को लेकर कड़े निर्देश जारी


पटना:
बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने राज्यभर में चलाए जा रहे "जमाबंदी अद्यतीकरण एवं नामांतरण उत्तराधिकार विशेष अभियान" की धीमी प्रगति पर गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। विभाग के सचिव जय सिंह द्वारा सभी प्रमंडलीय आयुक्तों, समाहर्त्ताओं (जिलाधिकारियों) और बंदोबस्त पदाधिकारियों को भेजे गए आधिकारिक पत्र में स्पष्ट किया गया है कि अभियान शुरू होने के दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी अंचलों में प्रगति अत्यंत धीमी है। इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने पूरे अभियान को तय समय-सीमा के भीतर और पारदर्शी तरीके से पूरा करने का खाका तैयार किया है।

अभियान से जुड़े मुख्य बिन्दु और सरकारी निर्देश

1. अंचलाधिकारियों के लिए माइक्रो-प्लान बनाना अनिवार्य

अभियान में तेजी लाने के लिए सभी अंचल अधिकारियों (CO) को अपने-अंचल के अंतर्गत आने वाले सभी हल्का और मौजावार जमाबंदी आंकड़ों का विश्लेषण करने का निर्देश दिया गया है। जिन हल्कों में लंबित मामलों की संख्या अधिक है, वहां अतिरिक्त संपर्क अभियान चलाए जाएंगे। इसके लिए तीन दिनों के भीतर एक विस्तृत समय-सारणी (माइक्रो-प्लान) तैयार कर उसे बिहार भूमि पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड करना होगा, ताकि स्थानीय रैयतों को पहले से यह स्पष्ट जानकारी रहे कि उनके क्षेत्र में शिविर या राजस्व कर्मी कब उपलब्ध रहेंगे।

2. निःशुल्क भू-मापी और नया आवेदन न देने की सुविधा

इस विशेष अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि जिन मामलों में जमीन का रकबा, सीमा या खेसरा स्पष्ट नहीं है और उसके भौतिक सत्यापन या माप की जरूरत है, वहां सरकार द्वारा निःशुल्क मापी (Free Land Surveying) कराई जाएगी। इसके लिए रैयतों से किसी भी प्रकार का मापी शुल्क या नया आवेदन नहीं लिया जाएगा। प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए अंचल अधिकारी के लॉगिन से 'eMapi' पोर्टल के माध्यम से मापी का आदेश निर्गत होगा। साथ ही, पंचायती राज के जनप्रतिनिधियों (मुखिया, सरपंच, वार्ड पार्षद) का सहयोग लेकर घर-घर जाकर त्रुटियों की पहचान की जाएगी।

3. बिना खाता, खेसरा, रकबा और लगान वाली जमाबंदियों में सुधार

डिजिटाइज्ड जमाबंदी पंजी (रजिस्टर-II) में उपलब्ध त्रुटियों के निवारण के लिए स्पष्ट नियम तय किए गए हैं:

  • खाता/खेसरा रहित जमाबंदी: मूल जमाबंदी पंजी की स्कैन कॉपी, खतियान या पूर्व के दाखिल-खारिज अभिलेख से मिलान कर छूटे हुए खाता-खेसरा की प्रविष्टि ऑनलाइन की जाएगी।
  • रकबा रहित जमाबंदी: यदि रकबा अंकित नहीं है, तो मूल पंजी और खतियान से मिलान कर रकबा चढ़ाया जाएगा। यदि रकबा पूर्व में खारिज हो चुका है किंतु खेसरा स्पष्ट नहीं है, तो भौतिक सत्यापन और मापी के आधार पर सही रकबा दर्ज किया जाएगा।
  • लगान रहित जमाबंदी: मूल जमाबंदी में अंकित अंतिम लगान के आधार पर प्रविष्टि की जाएगी। जिन जमीनों पर लगान निर्धारण नहीं हुआ है (जैसे बे-लगान या बकाश्त भूमि), उन पर जबरन लगान नहीं चढ़ाया जाएगा।

4. सरकारी जमीनों पर अवैध जमाबंदी होगी रद्द

निरीक्षण एवं जांच के दौरान यदि गैरमजरुआ आम, गैरमजरुआ खास, खासमहल, कैसर-ए-हिन्द, सीलिंग या अन्य किसी सरकारी भूमि पर फर्जी या अवैध रूप से किसी व्यक्ति के नाम जमाबंदी कायम पाई जाती है, तो अंचल अधिकारी साक्ष्यों के साथ उसका प्रस्ताव अपर समाहर्त्ता (ADM) को भेजेंगे। 'बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम, 2011' की धारा 9 के तहत संबंधित पक्षों को सुनवाई का समुचित अवसर देने के बाद ऐसी अवैध जमाबंदियों को रद्द करने की विधिक कार्रवाई की जाएगी।

5. मृत रैयतों का उत्तराधिकार नामांतरण

मृत रैयतों के स्थान पर उनके वैध वारिसों के नाम जमीन दर्ज करने के लिए पंचायती राज विभाग (ग्रामीण क्षेत्र) और राजस्व विभाग (शहरी क्षेत्र) द्वारा जारी वंशावली को प्रामाणिक साक्ष्य माना जाएगा। प्रक्रिया के तहत पहले पूर्वज के नाम से दर्ज जमाबंदी की सभी प्रविष्टियों को परिमार्जन के माध्यम से शुद्ध किया जाएगा, तत्पश्चात उत्तराधिकारियों के नाम दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

विशेष प्रश्न का समाधान: बिना जमाबंदी वाली पुरानी ज़मीन (आज़ादी के बाद से अब तक जमाबंदी न बनने) के लिए सरकारी उपाय

यदि किसी जमीन की आजादी (या जमींदारी उन्मूलन) के बाद से आज तक पंजी-2 (रजिस्टर-II) में जमाबंदी कभी कायम ही नहीं हुई है, और उसका पुराना रैयत बहुत पहले वह जमीन किसी नए रैयत को बेच चुका है, तथा नए रैयत के पास उस जमीन का वैध निबंधित दस्तावेज (केवाला) मौजूद है, तो इसके लिए बिहार सरकार द्वारा निम्नलिखित कानूनी व प्रशासनिक उपाय उपलब्ध कराए गए हैं:

1. विशेष भूमि सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त (Bihar Special Survey) — सबसे आसान व पक्का उपाय

वर्तमान में पूरे बिहार राज्य में विशेष भूमि सर्वेक्षण का कार्य चल रहा है। यह उन सभी जमीनों के लिए वरदान साबित हो रहा है जिनकी पूर्व में कभी जमाबंदी नहीं बनी थी:

  • प्रक्रिया: जमीन के वर्तमान मालिक (जिसके पास पुराना केवाला और भौतिक दखल-कब्जा है) को सर्वेक्षण शिविर में अमीन या सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी के समक्ष 'प्रपत्र-2' (स्वघोषणा पत्र) भरकर जमा करना होता है।
  • आवश्यक दस्तावेज: स्वघोषणा पत्र के साथ पुराना निबंधित केवाला (Registered Deed), खतियान की प्रति और जमीन पर अपने शांतिपूर्ण दखल-कब्जे का साक्ष्य संलग्न करना होता है।
  • समाधान: सर्वेक्षण टीम केवाला की सत्यता और स्थल पर भौतिक कब्जे की जांच करती है। जांच सही पाए जाने पर पुराने खतियान या बिना जमाबंदी की जमीन का नया खतियान और नई जमाबंदी सीधे वर्तमान खरीदार/केवालाधारी के नाम से बनाकर ऑनलाइन दर्ज कर दी जाती है।

2. विलंब माफी याचिका (Condonation of Delay) के साथ ऑनलाइन दाखिल-खारिज

यदि सर्वेक्षण से पहले दाखिल-खारिज कराना हो, तो 'बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम, 2011' में इसके लिए प्रावधान है:

  • प्रक्रिया: खरीदार 'बिहार भूमि पोर्टल' पर जाकर ऑनलाइन दाखिल-खारिज का आवेदन कर सकता है। चूंकि केवाला बहुत पुराना है और 90 दिनों की समय-सीमा पार हो चुकी है, इसलिए आवेदन के साथ एक 'विलंब माफी याचिका' (Condonation of Delay Application) और शपथ पत्र संलग्न करना अनिवार्य है।
  • दस्तावेजी शृंखला (Chain Documents): आवेदक को यह सिद्ध करना होता है कि केवाला बेचने वाला व्यक्ति मूल खतियानी रैयत का वैध वारिस था। इसके लिए विक्रेता की वंशावली और कड़ी जोड़ने वाले कागजात प्रस्तुत करने होते हैं।

3. एडीएम (ADM) / निबंधन कार्यालय से केवाला की भौतिक जांच

पुराने केवालों के मामलों में फर्जीवाड़े से बचने के लिए बिहार सरकार के नए नियमों के तहत:

  • यदि केवाला 30-50 वर्ष या उससे भी अधिक पुराना है और रजिस्टर-II में जमाबंदी दर्ज नहीं है, तो अंचल अधिकारी (CO) उस केवाला को सत्यापन के लिए अपर समाहर्त्ता (ADM) तथा संबंधित जिला निबंधन कार्यालय (Registry Office) भेजते हैं।
  • निबंधन कार्यालय के वॉल्यूम (रजिस्टर) से केवाला संख्या, पृष्ठ संख्या और विक्रेता-क्रेता के नाम का मिलान सही पाए जाने पर ADM द्वारा प्रथम जमाबंदी (First Jamabandi) सृजित करने की स्वीकृति दी जाती है, जिसके बाद CO द्वारा दाखिल-खारिज मंजूर कर नई जमाबंदी कायम कर दी जाती है।

4. परिमार्जन प्लस पर 'छूटी हुई जमाबंदी' विकल्प (यदि ऑफलाइन पंजी में प्रविष्टि मौजूद हो)

कभी-कभी जमीन की जमाबंदी अंचल के ऑफलाइन रजिस्टर-II (पंजी-2) में दर्ज होती है लेकिन डिजिटाइजेशन के दौरान कंप्यूटर पर नहीं चढ़ पाती। ऐसे मामलों में आवेदक 'परिमार्जन प्लस' (Parimarjan Plus) पोर्टल पर "छूटी हुई जमाबंदी का डिजिटाइजेशन" विकल्प का चयन कर ऑफलाइन पंजी/केवाला अपलोड करके जमाबंदी को ऑनलाइन करा सकते हैं।

बिहार में भूमि सुधार अभियान पर सरकार की सख्ती: जमाबंदी, म्यूटेशन और मुफ़्त भू-मापी को लेकर कड़े निर्देश जारी बिहार में भूमि सुधार अभियान पर सरकार की सख्ती: जमाबंदी, म्यूटेशन और मुफ़्त भू-मापी को लेकर कड़े निर्देश जारी Reviewed by PSA Live News on 10:14:00 am Rating: 5

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