कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाने वाला धनतेरस हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण, मंगलकारी और दीपावली महापर्व का शुभारंभ करने वाला पर्व है। इस वर्ष धनतेरस का यह पावन पर्व 6 नवंबर, दिन शुक्रवार को मनाया जा रहा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन धन, आरोग्य, सुख-समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। इसे धनत्रयोदशी और धन्वंतरि जयंती के नाम से भी जाना जाता है।
भगवान धन्वंतरि और आयुर्वेद का संबंध
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान इसी दिन भगवान विष्णु के अंशावतार भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे।
- आयुर्वेद के जनक: भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का जनक तथा देवताओं का वैद्य माना जाता है।
- उत्तम स्वास्थ्य की कामना: इस दिन उनकी पूजा-अर्चना कर परिवार के सभी सदस्यों के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और निरोगी जीवन की कामना की जाती है।
- लक्ष्मी और कुबेर की उपासना: इसी दिन माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की पूजा का भी विशेष विधान है।
धनतेरस पर दीपदान की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, राजा हिम के पुत्र की कुंडली में विवाह के चौथे दिन सर्पदंश से मृत्यु का योग था। जब उनकी पत्नी को यह बात पता चली, तो उन्होंने पति की रक्षा के लिए एक अनूठा उपाय किया:
- आभूषणों और दीपों का ढेर: महल के द्वार पर सोने-चांदी के आभूषणों तथा दीपों का ढेर लगा दिया गया।
- जागने का क्रम: पूरी रात गीत-संगीत और कथाओं के माध्यम से पति को जगाए रखा गया।
- यमराज की वापसी: जब यमराज सर्प का रूप धारण कर वहां पहुंचे, तो दीपों के प्रकाश और आभूषणों की चमक से उनकी आंखें चौंधिया गईं। वे राजकुमार के प्राण लिए बिना ही लौट गए, जिससे राजकुमार की जान बच गई।
तभी से धनतेरस पर दीपदान करने और घरों, दुकानों व प्रतिष्ठानों की साफ-सफाई कर दीप जलाने की परंपरा चली आ रही है।
खरीदारी और पूजा का विधान
- इस दिन सोना, चांदी, नए बर्तन तथा अन्य धातुओं की वस्तुएं खरीदना बेहद शुभ माना जाता है।
- संध्याकाल में विधि-विधान से लक्ष्मी, गणेश, कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है।
- परिवार की सुख-समृद्धि एवं अकाल मृत्यु से रक्षा के लिए यमदेव के निमित्त दक्षिण दिशा में दीपदान किया जाता है।
संदेश: वास्तविक धन क्या है?
धनतेरस हमें यह सिखाता है कि वास्तविक धन केवल भौतिक संपत्ति नहीं, बल्कि अच्छा स्वास्थ्य, सद्भाव, संतोष और एक सुखी परिवार भी है। इस अवसर पर जरूरतमंदों की सहायता, दान-पुण्य तथा स्वच्छता का संकल्प लें। पर्यावरण संरक्षण के लिए मिट्टी के दीप जलाकर प्रदूषण रहित उत्सव मनाएं, क्योंकि यह पर्व आरोग्य, समृद्धि, सेवा और सकारात्मक जीवन का संदेश देता है।
Reviewed by PSA Live News
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10:56:00 pm
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