ब्लॉग खोजें

नामकुम में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का भव्य आयोजन, 1000 से अधिक आदिवासी महिलाओं ने ली भागीदारी

ICAR-IIAB और आशा फाउंडेशन के संयुक्त प्रयास से महिलाओं के सशक्तिकरण, स्वास्थ्य, कृषि और आजीविका पर हुई विस्तृत चर्चा



रांची।  
आईसीएआर–भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (ICAR–IIAB), रांची द्वारा आशा फाउंडेशन, नामकुम के सहयोग से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर नामकुम स्थित सभय बागान स्कूल मैदान में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर स्थानीय समुदाय की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। आसपास के विभिन्न गाँवों से आईं 1000 से अधिक आदिवासी महिलाओं, बच्चों और ग्रामीणों ने कार्यक्रम में भाग लिया, जिससे यह आयोजन महिलाओं के योगदान, उपलब्धियों और सशक्तिकरण का एक जीवंत उत्सव बन गया।

कार्यक्रम में पद्मश्री से सम्मानित प्रसिद्ध लोकगायक मधु मंसूरी हसमुख मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने महिलाओं की भूमिका को समाज और परिवार की आधारशिला बताते हुए कहा कि महिलाएँ परिवार की रीढ़ होती हैं। उनके सहयोग, त्याग और समर्पण के बिना समाज का संतुलित विकास संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के माध्यम से ही सांस्कृतिक परंपराएँ, सामाजिक मूल्यों और पारिवारिक समरसता का संरक्षण होता है।

इस अवसर पर स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं समाजसेवी डॉ. गीता गुप्ता ने महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महिलाएँ परिवार की मुख्य देखभाल करने वाली होती हैं, इसलिए यदि वे स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक होंगी तो पूरा परिवार स्वस्थ और सुरक्षित रहेगा। उन्होंने ग्रामीण महिलाओं को नियमित स्वास्थ्य जांच, पोषणयुक्त भोजन और स्वच्छता के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. के. के. कृष्णानी, संयुक्त निदेशक (शैक्षणिक), ICAR-IIAB ने कृषि क्षेत्र में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि खेतों में होने वाले लगभग 60 से 70 प्रतिशत कृषि कार्य महिलाओं द्वारा किए जाते हैं। इसके बावजूद महिला किसानों को अक्सर पर्याप्त संसाधन और तकनीकी जानकारी नहीं मिल पाती। उन्होंने कहा कि महिला किसानों को ज्ञान, प्रशिक्षण और आधुनिक कृषि तकनीकों से सशक्त बनाना ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने और सतत कृषि विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

डॉ. अरुणिता रक्षित ने अपने संबोधन में उन महिलाओं की प्रेरणादायक कहानियाँ साझा कीं जिन्होंने साहस और दृढ़ संकल्प के बल पर समाज में बदलाव की मिसाल कायम की है। उन्होंने पद्मश्री से सम्मानित पर्यावरण कार्यकर्ता चामी मुर्मू का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने देशभर में 25 लाख से अधिक पेड़ लगाकर पर्यावरण संरक्षण में अद्भुत योगदान दिया है। साथ ही उन्होंने झारखंड की पद्मश्री सम्मानित चुटनी महतो (चुटनी देवी) की कहानी साझा करते हुए बताया कि डायन प्रथा का शिकार होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अब ग्रामीण क्षेत्रों में इस कुप्रथा को समाप्त करने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं।

कार्यक्रम में डॉ. खेलाराम सोरेन, नोडल अधिकारी (TSP) ने ग्रामीण आजीविका सुधार में कृषि की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ICAR-IIAB विभिन्न कृषि गतिविधियों के माध्यम से किसानों, विशेषकर आदिवासी महिलाओं, को सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि विविधीकृत कृषि मॉडल से ग्रामीण परिवारों की आय और जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार किया जा सकता है।

आशा फाउंडेशन के संस्थापक अजय जायसवाल ने इस अवसर पर कहा कि आदिवासी ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के सशक्तिकरण के बिना सामाजिक और आर्थिक विकास संभव नहीं है। उन्होंने ICAR-IIAB के साथ सहयोगात्मक प्रयासों के लिए संस्थान के प्रति आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी इस तरह के कार्यक्रमों के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।

संस्था की प्रतिनिधि पूनम टोप्पो ने महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक जागरूकता पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आदिवासी महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक अवसरों से जोड़ना आज समय की आवश्यकता है।

डॉ. जयंता लायक ने समेकित कृषि प्रणाली (Integrated Farming System – IFS) की अवधारणा को विस्तार से समझाते हुए बताया कि फसल उत्पादन के साथ पशुपालन, मत्स्य पालन और कुक्कुट पालन को जोड़कर कृषि को अधिक टिकाऊ बनाया जा सकता है। इससे किसानों को आय के कई स्रोत मिलते हैं और जोखिम भी कम होता है।

डॉ. मदन कुमार ने किसानों के लिए सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री कुसुम योजना और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना की जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से महिला किसानों को इन योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया ताकि सिंचाई सुविधाओं में सुधार और कृषि उत्पादकता में वृद्धि हो सके।

डॉ. सौमजीत सरकार ने बत्तख पालन की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि खाकी कैम्पबेल नस्ल की बत्तखें अधिक अंडा उत्पादन के लिए जानी जाती हैं और यह ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन सकती हैं। उन्होंने छोटे पशु एवं पक्षी पालन में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित किया।

कार्यक्रम में कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति भी रही, जिनमें श्रीमती पुष्पा तिर्की, मुखिया गढ़खटांगा पंचायत; बलदेव चंद्र महतो, प्रधानाध्यापक राजकीय मध्य विद्यालय सभय बागान; डॉ. सुजय बी. कदेमानी, वैज्ञानिक ICAR-IIAB; डॉ. अवनी कुमार सिंह, प्रमुख ICAR-रिसर्च कॉम्प्लेक्स फॉर ईस्टर्न रीजन (RCER), प्लांडू; तथा डॉ. वी. के. यादव सहित अन्य वैज्ञानिक, ग्राम प्रधान और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे।

कार्यक्रम के दौरान स्थानीय महिला समूहों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिनमें पारंपरिक आदिवासी नृत्य और गीतों के माध्यम से महिलाओं की सामाजिक भूमिका और सांस्कृतिक पहचान को प्रस्तुत किया गया।

इसके अलावा आयोजन स्थल पर पारंपरिक आदिवासी व्यंजनों के कई स्टॉल भी लगाए गए, जो आगंतुकों और प्रतिभागियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। इन स्टॉलों के माध्यम से स्थानीय खाद्य संस्कृति और महिलाओं की पाक कला का भी प्रदर्शन किया गया।

इस अवसर पर ICAR-IIAB द्वारा महिलाओं और बालिकाओं के सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे विभिन्न प्रयासों को भी प्रदर्शित किया गया। इनमें सहभागी धान, सब्जी बीज, दलहन एवं तिलहन जैसी पोषक फसलों के प्रोत्साहन के साथ-साथ क्षमता निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 10,000 पौधों के सामूहिक रोपण, महिला किसानों के बीच बत्तख पालन और सूकर पालन को बढ़ावा देने जैसी पहलों की भी उपस्थित अतिथियों ने सराहना की।

कार्यक्रम में बालिकाओं को खेल के माध्यम से सशक्त बनाने की पहल के तहत फुटबॉल प्रशिक्षण कार्यक्रम का भी उल्लेख किया गया, जिसे ICAR-IIAB द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है।

इस प्रकार यह आयोजन केवल महिला दिवस का उत्सव नहीं रहा, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, आजीविका और सामाजिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।

नामकुम में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का भव्य आयोजन, 1000 से अधिक आदिवासी महिलाओं ने ली भागीदारी नामकुम में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का भव्य आयोजन, 1000 से अधिक आदिवासी महिलाओं ने ली भागीदारी Reviewed by PSA Live News on 4:38:00 pm Rating: 5

कोई टिप्पणी नहीं:

Blogger द्वारा संचालित.