वैश्विक आध्यात्मिक जागृति दिवस के रूप में मनाई गई दादी जानकी की पुण्यतिथि, राँची में भावपूर्ण श्रद्धांजलि
राँची, हरमू रोड | विशेष संवाददाता
राँची के हरमू रोड स्थित चौधरी बगान सेवा केन्द्र में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा संस्था की पूर्व अंतर्राष्ट्रीय प्रमुख प्रशासिका दादी जानकी की पुण्यतिथि को “वैश्विक आध्यात्मिक जागृति दिवस” के रूप में अत्यंत श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शहर के कई गणमान्य लोग, शिक्षाविद, समाजसेवी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राँची नगर निगम के उपमहापौर नीरज कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि दादी जानकी जी का जीवन अद्भुत प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि 104 वर्षों का उनका जीवन केवल आयु का विस्तार नहीं, बल्कि आत्मिक ऊर्जा और सेवा का अप्रतिम उदाहरण था। “उन्होंने लाखों लोगों के जीवन में आशा और प्रकाश का संचार किया। वे वास्तव में आध्यात्मिक आकाश की सबसे चमकदार सितारा थीं,” उन्होंने कहा।
इस अवसर पर डॉ. बंदना राय (पूर्व विभागाध्यक्ष, अर्थशास्त्र विभाग, राँची विश्वविद्यालय) ने दादी जानकी के जीवन के प्रेरणादायक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिस उम्र में लोग जीवन से विराम लेने लगते हैं, उस समय दादी जानकी ने विदेश यात्राएं शुरू कीं और विश्वभर में आध्यात्मिकता का संदेश फैलाया। उनके प्रयासों से विशेषकर यूरोप में भारतीय अध्यात्म की नई पहचान बनी।
कार्यक्रम में डॉ. रानी प्रगति प्रसाद (पूर्व विभागाध्यक्ष, राजनीति विज्ञान विभाग) ने कहा कि दादी जानकी की ऊर्जा और कार्यक्षमता युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत है। उन्होंने उल्लेख किया कि 103 वर्ष की आयु में भी दादी जी ने एक वर्ष में 50 हजार किलोमीटर की यात्रा कर विश्वभर में आध्यात्मिक जागरण का संदेश दिया, जो अपने आप में एक अद्वितीय उपलब्धि है।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारी राजयोगिनी निमला बहन ने दादी जानकी के जीवन पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए बताया कि उनका संपूर्ण जीवन समाज सेवा, आध्यात्मिक उत्थान और मानवता की भलाई के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि बचपन से ही दादी जी के मन में दूसरों के जीवन को सुखमय बनाने की गहरी भावना थी। भारतीय शास्त्रों के गहन अध्ययन से समृद्ध उनका जीवन स्वतंत्रता के बाद सामाजिक कुरीतियों को तोड़ने और महिलाओं के सशक्तिकरण का प्रतीक बना।
उन्होंने यह भी बताया कि दादी जानकी ने संस्था की पूर्व प्रमुख प्रशासिका दादी प्रकाशमणि के पश्चात संगठन का नेतृत्व करते हुए विश्व परिवर्तन और आध्यात्मिक पुनर्जागरण का महत्वपूर्ण कार्य किया। उनके द्वारा सिखाया गया राजयोग मेडिटेशन आज विश्वभर में लाखों लोग अपने जीवन में अपनाकर मानसिक शांति और सकारात्मकता प्राप्त कर रहे हैं।
दादी जानकी को वैज्ञानिकों द्वारा “विश्व की सबसे स्थिर मन वाली महिला” की उपाधि से सम्मानित किया गया था, जो उनके मानसिक संतुलन और आध्यात्मिक शक्ति का प्रमाण है। साथ ही, देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा उन्हें स्वच्छ भारत मिशन का ब्रांड एम्बेसडर भी नियुक्त किया गया था। उन्हें देश-विदेश में अनेक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है।
कार्यक्रम के दौरान बालिकाओं द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक नृत्य ने वातावरण को भाव-विभोर कर दिया। अंत में उपस्थित सभी ब्रह्मावत्सों एवं श्रद्धालुओं ने दादी जानकी को श्रद्धा-सुमन अर्पित किए तथा ब्रह्मभोजन का आयोजन कर कार्यक्रम का समापन किया गया।
यह आयोजन न केवल एक श्रद्धांजलि था, बल्कि समाज में आध्यात्मिक चेतना, सेवा और मानवता के मूल्यों को पुनर्जीवित करने का एक सार्थक प्रयास भी सिद्ध हुआ।
Reviewed by PSA Live News
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6:39:00 am
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