“विश्व एकता दिवस” पर दादी रतन मोहिनी को भावभीनी श्रद्धांजलि, ब्रह्माकुमारियों ने याद किया उनका दिव्य जीवन
राँची। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की पूर्व प्रमुख प्रशासिका दादी रतन मोहिनी की प्रथम पुण्य तिथि “विश्व एकता दिवस” के रूप में श्रद्धा और भावनात्मक वातावरण में मनाई गई। इस अवसर पर हरमू रोड स्थित चौधरी बगान के ब्रह्माकुमारी सेवा केंद्र में केन्द्र संचालिका ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन एवं ब्रह्मावत्सों द्वारा दादी जी को श्रद्धासुमन अर्पित किए गए।
कार्यक्रम के दौरान ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने दादी रतन मोहिनी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जीवन दिव्य प्रकाश का प्रतीक था। उन्होंने अपने पूरे जीवनकाल में लाखों लोगों को आध्यात्मिकता, आंतरिक शांति और आत्मज्ञान की राह दिखाई। पवित्रता, समर्पण और प्रेम से परिपूर्ण उनका जीवन समाज के लिए प्रेरणास्रोत रहा। पिछले वर्ष इसी दिन 101 वर्ष की आयु में उन्होंने देह त्याग कर आध्यात्मिक यात्रा को पूर्ण किया।
उन्होंने कहा कि दादी रतन मोहिनी केवल एक प्रशासिका नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक शक्ति थीं, जिन्होंने विश्वभर में शांति, प्रेम और एकता का संदेश फैलाया। ब्रह्मा बाबा की आध्यात्मिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने ब्रह्माकुमारी संगठन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनका जीवन मानवता की सेवा और आध्यात्मिक जागरूकता के लिए समर्पित रहा।
दादी जी के नेतृत्व में ब्रह्माकुमारियों के लगभग 16,000 सेवा केंद्रों की स्थापना हुई, जो आज विश्वभर में आध्यात्मिक चेतना का प्रसार कर रहे हैं। वर्ष 1985 में उनके मार्गदर्शन में 13 पैदल यात्राओं का आयोजन किया गया, जबकि वर्ष 2006 में युवा प्रभाग द्वारा निकाली गई “स्वर्णिम भारत युवा पदयात्रा” उनके नेतृत्व में एक ऐतिहासिक पहल साबित हुई। इस पदयात्रा में करीब 30 हजार किलोमीटर की दूरी तय की गई, जिसमें 5 लाख से अधिक ब्रह्माकुमार भाई-बहनों ने भाग लिया और करोड़ों लोगों तक शांति, एकता, व्यसनमुक्ति और राजयोग ध्यान का संदेश पहुंचाया।
उनके उत्कृष्ट योगदान को देखते हुए 20 फरवरी 2014 को गुलबर्गा विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया। इसके अलावा, युवाओं और महिलाओं के सशक्तिकरण, नैतिक मूल्यों के प्रसार तथा सामाजिक उत्थान में उनके योगदान के लिए उन्हें समय-समय पर कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी ब्रह्मावत्सों ने दादी जी के आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया और विश्व शांति, एकता एवं मानवता के कल्याण के लिए राजयोग ध्यान का अभ्यास किया।
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