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जेपीएससी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप: जांच के घेरे में आए सदस्य की नियुक्ति पर बवाल, CPI ने CBI या हाईकोर्ट की निगरानी में जांच की मांग


रांची, 30 जुलाई।
झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) एक बार फिर गंभीर विवादों के केंद्र में आ गया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) की झारखंड राज्य परिषद ने आरोप लगाया है कि जिस व्यक्ति की नियुक्ति स्वयं जांच के दायरे में है, उसे ही जेपीएससी का सदस्य बना दिया गया है। पार्टी ने इसे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल बताते हुए पूरे मामले की CBI या झारखंड हाईकोर्ट के वर्तमान न्यायाधीशों की निगरानी में न्यायिक जांच कराने की मांग की है।

भाकपा के प्रदेश सचिव महेंद्र पाठक ने राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तथा झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि भर्ती संस्था की निष्पक्षता ही संदेह के घेरे में होगी तो लाखों अभ्यर्थियों का भरोसा पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

"चोर को ही चौकीदार बना दिया गया" : महेंद्र पाठक

महेंद्र पाठक ने आरोप लगाया कि जिस सदस्य की नियुक्ति ही CBI जांच के दायरे में है, उसे जेपीएससी का सदस्य बनाना पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्ति को तत्काल पद से हटाकर स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि झारखंड गठन के 25 वर्ष बाद भी राज्य के युवा सरकारी नौकरियों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि जेपीएससी जैसी सर्वोच्च भर्ती संस्था पर लगातार पेपर लीक, उत्तर कुंजी बिक्री और करोड़ों रुपये लेकर नियुक्ति कराने जैसे आरोप लगते रहे हैं। उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि "जब चोर को ही चौकीदार बना दिया जाएगा तो निष्पक्ष भर्ती की उम्मीद कैसे की जा सकती है?"

जेपीएससी की कार्यप्रणाली पर उठाए कई सवाल

भाकपा ने आरोप लगाया कि पिछले पांच वर्षों में कई बार पेपर लीक और भर्ती अनियमितताओं के मामले सामने आए, लेकिन किसी भी बड़े दोषी पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। पार्टी का दावा है कि परीक्षा केंद्रों के चयन, प्रश्नपत्र तैयार करने और परिणाम प्रक्रिया तक में दलालों का प्रभाव बढ़ गया है तथा जांच रिपोर्टों को सार्वजनिक नहीं किया जाता। आरटीआई के माध्यम से भी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाती।

भाकपा की छह प्रमुख मांगें

पार्टी ने सरकार के समक्ष छह प्रमुख मांगें रखी हैं—

  • जांच के दायरे में आए जेपीएससी सदस्य को तत्काल पद से हटाया जाए।
  • पूरे घोटाले की जांच CID के बजाय CBI से कराई जाए।
  • वैकल्पिक रूप से झारखंड हाईकोर्ट के वर्तमान न्यायाधीशों की समिति बनाकर समयबद्ध न्यायिक जांच कराई जाए।
  • सभी राजनीतिक दलों एवं छात्र संगठनों को शामिल कर सर्वदलीय जांच समिति गठित की जाए।
  • दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों, दलालों और कथित रूप से शामिल लोगों पर कठोर कानूनी कार्रवाई करते हुए उनकी संपत्ति जब्त की जाए।
  • भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया जाए तथा पेपर लीक से प्रभावित अभ्यर्थियों को मुआवजा और अगली परीक्षा में निःशुल्क अवसर दिया जाए।

छात्र आंदोलन को समर्थन, राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी

महेंद्र पाठक ने कहा कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी छात्रों और युवाओं के आंदोलन के साथ खड़ी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार निष्पक्ष जांच की घोषणा नहीं करती और विवादित सदस्य को पद से नहीं हटाया जाता, तो पार्टी पूरे झारखंड में छात्र-युवाओं के साथ मिलकर "सड़क से सदन तक" व्यापक आंदोलन चलाएगी।

सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार

भाकपा के आरोपों और मांगों के बाद जेपीएससी की कार्यप्रणाली तथा भर्ती प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। हालांकि, इस संबंध में राज्य सरकार या जेपीएससी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इन गंभीर आरोपों पर क्या रुख अपनाती है।

जेपीएससी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप: जांच के घेरे में आए सदस्य की नियुक्ति पर बवाल, CPI ने CBI या हाईकोर्ट की निगरानी में जांच की मांग जेपीएससी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप: जांच के घेरे में आए सदस्य की नियुक्ति पर बवाल, CPI ने CBI या हाईकोर्ट की निगरानी में जांच की मांग Reviewed by PSA Live News on 3:11:00 pm Rating: 5

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