बाबाधाम की ओर बढ़ते आस्था के कदम: सावन की कांवर यात्रा बनी श्रद्धा, सेवा और सामाजिक समरसता का महापर्व
विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा— सावन और कांवर यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि त्याग, अनुशासन, सेवा और सामाजिक एकता का जीवंत संदेश है।
रांची/देवघर। श्रावण मास के आगमन के साथ ही पूरा देश भगवान भोलेनाथ की भक्ति में सराबोर हो गया है। मंदिरों में हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष गूंज रहे हैं, वहीं लाखों शिवभक्त कांवर लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ रहे हैं। झारखंड का देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम इन दिनों श्रद्धा, आस्था और भक्ति का विराट केंद्र बना हुआ है, जहां देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे लाखों कांवरिये सुल्तानगंज से पवित्र गंगाजल लेकर लगभग 105 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा पूरी कर बाबा का जलाभिषेक कर रहे हैं।
विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा कि सावन केवल पूजा-अर्चना का महीना नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना, सेवा भावना और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि कांवर यात्रा भारत की सनातन परंपरा की ऐसी अनुपम विरासत है, जिसमें करोड़ों लोग बिना किसी भेदभाव के केवल भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा और विश्वास के साथ एकजुट होकर आगे बढ़ते हैं।
संजय सर्राफ ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रावण मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। समुद्र मंथन के दौरान निकले कालकूट विष को भगवान शिव ने संपूर्ण सृष्टि की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था। विष की उष्णता को शांत करने के लिए देवताओं ने उनका जलाभिषेक किया था। तभी से सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा प्रारंभ हुई, जो आज करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम बारह ज्योतिर्लिंगों में विशेष स्थान रखता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार लंकापति रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी, जिसके कारण यह स्थल अत्यंत पवित्र माना जाता है। यही कारण है कि सावन के महीने में यहां देश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ता है।
कांवर यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव बिहार के सुल्तानगंज से शुरू होता है, जहां उत्तरवाहिनी गंगा से श्रद्धालु पवित्र जल भरकर नंगे पैर लगभग 105 किलोमीटर की यात्रा करते हुए देवघर पहुंचते हैं। इस पूरी यात्रा के दौरान श्रद्धालु कठोर नियमों का पालन करते हैं। वे सात्त्विक भोजन ग्रहण करते हैं, संयमित जीवन जीते हैं तथा निरंतर "बोल बम", "हर-हर महादेव" और "बम-बम भोले" के जयघोष से वातावरण को शिवमय बनाए रखते हैं।
संजय सर्राफ ने कहा कि सावन के प्रत्येक सोमवार का विशेष धार्मिक महत्व है। इस दिन श्रद्धालु उपवास रखकर भगवान शिव का जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, आक के पुष्प, भांग और अन्य पूजन सामग्री से अभिषेक करते हैं तथा "ॐ नमः शिवाय" का जाप करते हुए परिवार, समाज और राष्ट्र की सुख-समृद्धि एवं कल्याण की प्रार्थना करते हैं।
उन्होंने कहा कि कांवर यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि अनुशासन, त्याग, तपस्या और आत्मसंयम का महान उदाहरण भी है। हजारों श्रद्धालु कठिन परिस्थितियों के बावजूद बिना किसी शिकायत के अपनी यात्रा पूरी करते हैं। इस दौरान वे स्वच्छता, पवित्रता और मर्यादा का विशेष ध्यान रखते हैं, जो समाज के लिए भी प्रेरणास्रोत है।
संजय सर्राफ ने कहा कि कांवर यात्रा सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का भी अद्भुत संदेश देती है। इस यात्रा में जाति, भाषा, क्षेत्र, वर्ग और आर्थिक स्थिति जैसी सभी सीमाएं समाप्त हो जाती हैं। हर श्रद्धालु केवल "बोल बम" की पहचान के साथ भगवान शिव की भक्ति में लीन दिखाई देता है। रास्ते में विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं स्वयंसेवी संस्थाएं निःस्वार्थ भाव से भोजन, पेयजल, चिकित्सा, विश्राम, प्राथमिक उपचार तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराती हैं। यह सेवा भारतीय संस्कृति की करुणा और लोककल्याण की परंपरा को मजबूत करती है।
उन्होंने कहा कि भगवान शिव का जीवन त्याग, करुणा, धैर्य, सहिष्णुता और लोककल्याण का संदेश देता है। शिव स्वयं विषपान कर संपूर्ण सृष्टि की रक्षा करने वाले देव हैं। इसलिए सावन में शिव की आराधना केवल मंदिरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारना भी उतना ही आवश्यक है।
सावन के दौरान देवघर नगरी पूरी तरह भगवामय और शिवमय हो जाती है। बाबा मंदिर परिसर, शिवगंगा, कांवर पथ और पूरे शहर में श्रद्धालुओं की अपार भीड़, भक्ति संगीत, शिव भजन और हर-हर महादेव के उद्घोष से आध्यात्मिक वातावरण निर्मित हो जाता है। प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की जाती हैं, जिससे लाखों कांवरिये सुगमता से बाबा के दरबार तक पहुंच सकें।
संजय सर्राफ ने अंत में कहा कि सावन और बाबा बैद्यनाथ धाम की कांवर यात्रा भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। यह यात्रा केवल गंगाजल लेकर शिवलिंग पर अर्पित करने की परंपरा नहीं, बल्कि श्रद्धा, सेवा, अनुशासन, समर्पण और मानवता के मूल्यों को जीवन में अपनाने का महापर्व है। गंगाजल की प्रत्येक बूंद और "हर-हर महादेव" का प्रत्येक उद्घोष भक्त और भगवान के बीच अटूट आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक संबंध का प्रतीक है। यही कारण है कि सावन का महीना आते ही बाबा नगरी देवघर भक्ति, विश्वास और शिवमय ऊर्जा से आलोकित हो उठती है।
Reviewed by PSA Live News
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8:02:00 pm
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