लॉरेटो कॉन्वेंट के 'सीनियर स्कूल कॉन्सर्ट-2026' में बोले उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री: रील्स के दौर में सोशल मीडिया के सीमित उपयोग की जरूरत, शिक्षा के साथ चरित्र निर्माण ही वास्तविक सफलता
रांची: लॉरेटो कॉन्वेंट स्कूल, डोरंडा में आयोजित 'सीनियर स्कूल कॉन्सर्ट-2026' में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त रांची मंजूनाथ भजन्त्री ने विद्यार्थियों को आधुनिक डिजिटल युग में सोशल मीडिया के संतुलित उपयोग और जीवन में नैतिक मूल्यों को अपनाने का सशक्त संदेश दिया। इस भव्य समारोह में विद्यालय की छात्राओं द्वारा प्रसिद्ध उपन्यासकार लुइसा मे अलकॉट की कालजयी कृति ‘लिटिल वुमन’ पर आधारित एक उत्कृष्ट मंचीय प्रस्तुति दी गई। संगीत, नृत्य और नाट्य के अनूठे समन्वय से सजे इस कार्यक्रम में छात्राओं के अनुशासन, आत्मविश्वास, समन्वय और टीम वर्क की सराहना करते हुए उपायुक्त ने सफल आयोजन के लिए पूरे विद्यालय परिवार को शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर प्रशिक्षु आईएएस अधिकारी सुश्री आस्था शरण, विद्यालय की प्राचार्या सिस्टर के. क्लारा, शिक्षक-शिक्षिकाएं, अभिभावक एवं कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
छात्राओं एवं शिक्षकों को संबोधित करते हुए उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि वर्तमान दौर 'जेन-जी' और 'जेन-अल्फा' पीढ़ी का है, जो इंटरनेट, सोशल मीडिया और रील्स की दुनिया से गहराई से जुड़ी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दौर में तकनीक से पूरी तरह दूरी बनाना व्यावहारिक समाधान नहीं है, बल्कि इसका सही दिशा में, सीमित और सार्थक उपयोग करना बेहद जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे अपने समय और ऊर्जा का अधिकांश हिस्सा उच्च शिक्षा, ज्ञान अर्जन और अपने स्वर्णिम भविष्य के निर्माण में लगाएं। यदि सोशल मीडिया का उपयोग केवल शिक्षा, ज्ञान और अकादमिक विकास के लिए किया जाए तो यह एक अत्यंत उपयोगी माध्यम बन सकता है, इसलिए इसके अनावश्यक और अत्यधिक इस्तेमाल से बचना चाहिए।
अपने संबोधन में जीवन मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए उपायुक्त ने सही मित्रों के चयन और पारिवारिक संस्कारों के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि किशोरावस्था में मित्रों की संगति व्यक्ति के विचारों और व्यक्तित्व को गहराई से प्रभावित करती है, इसलिए हमेशा ऐसे दोस्तों का चयन करें जो आपको आगे बढ़ने, बेहतर बनने और अपने लक्ष्यों की ओर अग्रसर होने के लिए प्रेरित करें। इसके साथ ही उन्होंने माता-पिता के मार्गदर्शन और शिक्षकों की सीख को जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बताया। सफलता की परिभाषा को विस्तार देते हुए उन्होंने कहा कि 'हर बच्चा खास है' और सबमें अलग-अलग क्षमताएं होती हैं। सफलता का अर्थ केवल प्रसिद्धि पाना या दूसरों से आगे निकलना नहीं है, बल्कि अपने सामर्थ्य के अनुसार समाज के लिए बेहतर कार्य करना और जीवन को सार्थक बनाकर सच्ची खुशी प्राप्त करना है।
छात्राओं का उत्साहवर्धन करते हुए उपायुक्त ने कहा कि जीवन में परिस्थितियां हमेशा एक समान नहीं रहतीं, लेकिन अपनी आंतरिक क्षमताओं को पहचानकर, स्वयं पर विश्वास रखकर और सकारात्मक सोच के साथ हर चुनौती का निडरता से सामना किया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे किताबी शिक्षा के साथ-साथ चरित्र निर्माण, अनुशासन, संवेदनशीलता, सामाजिक जिम्मेदारी और पारिवारिक मूल्यों को अपने जीवन का अनिवार्य हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि यही मौलिक गुण उन्हें एक सफल विद्यार्थी बनाने के साथ-साथ समाज में एक जिम्मेदार और बेहतर इंसान के रूप में स्थापित करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
Reviewed by PSA Live News
on
7:09:00 am
Rating:



कोई टिप्पणी नहीं: