वीआरएस स्वीकृत होते ही राज्य सरकार ने जारी की अधिसूचना; 1991 बैच के वरिष्ठ IPS अधिकारी का रहा है सुदीर्घ और अनुभवपूर्ण कार्यकाल
संवाददाता: सुजीत कुमार मिश्र।
प्रशासनिक गलियारे से बड़ी खबर
पटना। बिहार के प्रशासनिक और पुलिस महकमे में एक ऐतिहासिक फेरबदल के तहत राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार ने अपने निर्धारित कार्यकाल से पूर्व ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली है। इसके तत्काल बाद बिहार सरकार ने उनकी प्रशासनिक दक्षता, निष्ठा और लंबे अनुभव को देखते हुए उन्हें राज्य का नया मुख्य सूचना आयुक्त (Chief Information Commissioner) नियुक्त कर दिया है। इस महत्वपूर्ण संवैधानिक और प्रशासनिक दायित्व के संबंध में राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की ओर से औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है।
वीआरएस की प्रक्रिया और नियमों में विशेष छूट
भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के 1991 बैच के अत्यंत वरिष्ठ एवं कुशल अधिकारी विनय कुमार की नियमित सेवानिवृत्ति का समय दिसंबर 2026 निर्धारित था। हालांकि, उन्होंने अपने निजी एवं प्रशासनिक निर्णयों के तहत 25 सितंबर को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए राज्य सरकार के समक्ष आवेदन दिया था।
गृह विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उनके आवेदन को तत्काल प्रभाव से अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी। प्रशासनिक नियमों के तहत स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति हेतु सामान्यतः तीन महीने की नोटिस अवधि अनिवार्य होती है, परंतु राज्य सरकार ने विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए उन्हें इस अनिवार्य नोटिस अवधि की शर्त में पूर्ण छूट प्रदान की, ताकि वे तुरंत नई जिम्मेदारी को संभाल सकें।
संवैधानिक प्रावधान और राजभवन की सहमति
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, बिहार के महामहिम राज्यपाल ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 15(3) में निहित संवैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए पूर्व डीजीपी विनय कुमार को बिहार राज्य का मुख्य सूचना आयुक्त नियुक्त किया है।
अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि विनय कुमार पदभार ग्रहण करने की तिथि से इस गरिमामय पद का दायित्व संभालेंगे। मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में इस संवैधानिक नियुक्ति के साथ ही उनका तीन दशक से अधिक लंबा और गौरवशाली पुलिस सेवा कार्यकाल आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया है।
विनय कुमार का बेदाग और अनुकरणीय पुलिस कार्यकाल
1991 बैच के IPS अधिकारी के रूप में विनय कुमार ने बिहार पुलिस में कई अत्यंत महत्वपूर्ण, संवेदनशील और रणनीतिक पदों पर सेवाएं दी हैं:
- डीजीपी के रूप में नेतृत्व: वरिष्ठ अधिकारी आलोक राज के स्थान पर उन्होंने बिहार पुलिस महानिदेशक का शीर्ष पद संभाला था और राज्य की कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने में अहम भूमिका निभाई।
- प्रमुख प्रशासनिक भूमिकाएं: डीजीपी बनने से पूर्व वे अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) लॉ एंड ऑर्डर, अपराध अनुसंधान विभाग (CID) के प्रमुख, तथा बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम के महानिदेशक (DG) जैसे उच्च स्तरीय पदों पर आसीन रहे।
- रणनीतिक सुधार: अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने पुलिस आधुनिकीकरण, अपराध नियंत्रण, पारदर्शी जांच प्रक्रिया और बुनियादी ढांचे के विकास में दूरगामी सुधार किए।
राज्य सूचना आयोग का महत्व और नई जिम्मेदारी
सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत राज्य सूचना आयोग एक अत्यंत महत्वपूर्ण वैधानिक संस्था है, जो आम नागरिकों को सूचना के अधिकार से संबंधित प्रथम व द्वितीय अपीलों और शिकायतों के निवारण की पारदर्शी व्यवस्था प्रदान करती है।
- मुख्यालय: बिहार राज्य सूचना आयोग का आधिकारिक मुख्यालय राजधानी पटना स्थित ऐतिहासिक सूचना भवन में संचालित है।
- नागरिक सशक्तिकरण: मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में विनय कुमार के विशाल प्रशासनिक और विधिक अनुभव का लाभ राज्य के आम नागरिकों को मिलेगा। आयोग में लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन, सरकारी तंत्र में पारदर्शिता बढ़ाने और जन-सामान्य को ससमय सूचना उपलब्ध कराने की दिशा में उनकी नियुक्ति को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस सेवा के सर्वोच्च पद पर रहते हुए कानून की बारीकियों को समझने वाले अधिकारी के मुख्य सूचना आयुक्त बनने से राज्य में सूचना का अधिकार अधिनियम और अधिक पारदर्शी, प्रभावी व जन-केंद्रित बनेगा।
Reviewed by PSA Live News
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12:00:00 am
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