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प्रह्लाद की अटूट भक्ति से श्रीकृष्ण जन्म तक गूंजा भक्तिरस: पुंदाग के प्रणामी मंदिर में साध्वी गोपिका जी ने सुनाया भागवत का अलौकिक प्रसंग

 



  • एम.आर.एस. श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का चतुर्थ दिवस
  • श्रीकृष्ण प्राकट्य पर उल्लास से झूमे श्रद्धालु, सजीव झांकियों और नंदोत्सव के जयकारों से गुंजायमान हुआ परिसर

पुंदाग (रांची): स्वामी शिरोमणि डॉ. सदानंद जी महाराज के पावन सानिध्य में 'एम.आर.एस. श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट' द्वारा पुंदाग स्थित श्री राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चतुर्थ दिवस मंदिर परिसर पूरी तरह भक्तिरस में सराबोर रहा। श्री राधाष्टमी महोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित इस कथा में वृंदावन की सुप्रसिद्ध कथा वाचिका साध्वी गोपिका जी ने प्रह्लाद चरित्र से लेकर समुद्र मंथन, वामन अवतार, श्रीराम कथा और श्रीकृष्ण प्राकट्य एवं नंदोत्सव तक के अलौकिक प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया।

विपरीत परिस्थितियों में भी अटूट विश्वास का संदेश: प्रह्लाद चरित्र

कथा की शुरुआत में साध्वी गोपिका जी ने परम भक्त प्रह्लाद के चरित्र का मर्मस्पर्शी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों और भीषण यातनाओं के बावजूद ईश्वर के प्रति सच्चा विश्वास और भक्ति कभी निष्फल नहीं होती।

"दैत्यराज हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद को धर्म मार्ग से डिगाने के लिए अनेक अत्याचार किए, किंतु प्रह्लाद की निष्ठा डगमगाई नहीं। अंततः भक्त की रक्षा और धर्म की स्थापना के लिए भगवान विष्णु को नरसिंह रूप धारण करना पड़ा।"

साध्वी जी ने श्रद्धालुओं का आह्वान किया कि जीवन में चाहे कितना भी संकट आए, सत्य और ईश्वर भक्ति का मार्ग कभी नहीं छोड़ना चाहिए।

समुद्र मंथन, वामन अवतार और श्रीराम कथा से मिला धर्म का संदेश

कथा के दौरान देवताओं और असुरों द्वारा किए गए समुद्र मंथन और उससे निकले दिव्य रत्नों का मनोहारी वर्णन किया गया। इसके उपरांत वामन अवतार और राजा बलि के प्रसंग के माध्यम से साध्वी जी ने त्याग, विनम्रता और ईश्वर के प्रति सर्वस्व समर्पण का महत्व समझाया। उन्होंने श्रीराम अवतार का प्रसंग सुनाते हुए भगवान राम के मर्यादा, सत्य और आदर्श जीवन मूल्यों को अपने जीवन में उतारने की प्रेरणा दी।

श्रीकृष्ण प्राकट्य पर नंदोत्सव की धूम, सजीव झांकियों ने मोहा मन

जैसे ही कथा में श्रीकृष्ण प्राकट्य का प्रसंग आया, पूरा पांडाल "नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की" के जयघोषों से गूंज उठा। भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप के प्राकट्य पर मनमोहक सजीव झांकियां प्रस्तुत की गईं, जिन्हें देख श्रद्धालु भावविभोर हो गए।

साध्वी गोपिका जी के सुमधुर भजनों पर श्रद्धालु झूमते और नाचते नजर आए। इस पावन अवसर पर श्री राधा रानी श्यामा जी का विशेष जड़ित आभूषणों से अलौकिक एवं दिव्य श्रृंगार किया गया, जो आकर्षण का केंद्र रहा। कथा के समापन पर सामूहिक महाआरती संपन्न हुई और सभी भक्तों के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया।

पंचम दिवस की लीलाओं की रूपरेखा एवं उपस्थिति

ट्रस्ट के मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि कथा के पांचवें दिन श्रीकृष्ण बाल लीला, माखन चोरी लीला, दामोदर लीला एवं गौचारण लीला के अत्यंत सुंदर प्रसंग सुनाए जाएंगे। कथा का आयोजन प्रतिदिन अपराह्न 2:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक किया जा रहा है।

कथा में प्रमुख रूप से उपस्थित श्रद्धालु: कार्यक्रम में डूंगरमल अग्रवाल, विजय अग्रवाल, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, निर्मल जालान, पूरणमल सर्राफ, संजीव विजयवर्गीय, सुरेश अग्रवाल, मधुसूदन जाजोदिया, नंदकिशोर चौधरी, अरविंद अग्रवाल, शिव भगवान अग्रवाल, अंजनी अग्रवाल, विशाल जालान, पुजारी अरविंद पांडेय, मनीष सोनी, विष्णु सोनी, पवन अग्रवाल, सुरेश भगत, ज्ञान प्रकाश शर्मा, पवन पोद्दार, संजय सर्राफ, विद्या देवी अग्रवाल, उर्मिला पाड़िया, सुनीता अग्रवाल, संतोष देवी अग्रवाल, शीला मुरारका, शकुंतला केजरीवाल, सरिता अग्रवाल, सुमन चौधरी, आशा मुंजाल, रामादेवी डोकानिया, अमिता जालान, दीपिका मोतीका, नीलम गोयल, नंद रानी पाठक, आशा सिंह, उषा देवी, ललिता पोद्दार, किरण पोद्दार, ललिता अग्रवाल, भगवती देवी, लाल देवी, सुनीता देवी, आशा मिश्रा, किरण बरनवाल सहित भारी संख्या में गणमान्य लोग एवं महिला-पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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