पत्रकारों पर हमला, लोकतंत्र पर प्रहार! बिहार में सुरक्षा कानून की मांग तेज, अशोक कुमार झा ने मुख्यमंत्री-डीजीपी से मांगा जवाब
अंधराठाढ़ी में पत्रकार बिंदेश्वर चौधरी पर हमले को लेकर जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय पदाधिकारी अशोक कुमार झा ने जताई गंभीर चिंता, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, डीजीपी और मधुबनी पुलिस प्रशासन से न्याय एवं कठोर कार्रवाई की मांग
पटना/मधुबनी। बिहार में पत्रकारों पर लगातार हो रहे जानलेवा हमलों और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हो रहे इन हमलों ने पत्रकार जगत में चिंता और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। इसी क्रम में पत्रकारों के राष्ट्रीय स्तर के संगठन जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय कार्यकारिणी पदाधिकारी अशोक कुमार झा ने बिहार में पत्रकारों पर लगातार हो रहे हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तथा मधुबनी जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से आग्रह किया है कि पत्रकारों पर हो रहे हमलों को सामान्य आपराधिक घटनाओं के रूप में नहीं, बल्कि स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता पर गंभीर प्रहार के रूप में देखा जाए। उन्होंने कहा कि पत्रकार समाज का सजग प्रहरी होता है, जो तमाम कठिनाइयों और चुनौतियों के बीच जनता की समस्याओं, प्रशासनिक अनियमितताओं तथा सामाजिक बुराइयों को सामने लाने का कार्य करता है। यदि सच्चाई उजागर करने वाले पत्रकार ही सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो लोकतंत्र की मजबूती और आम जनता के अधिकारों की रक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?
अंधराठाढ़ी में पत्रकार बिंदेश्वर चौधरी पर जानलेवा हमले से गंभीर चिंता
अशोक कुमार झा ने मधुबनी जिले के अंधराठाढ़ी में स्थानीय पत्रकार बिंदेश्वर चौधरी पर कथित रूप से स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों द्वारा किए गए जानलेवा हमले की घटना पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि पत्रकार बिंदेश्वर चौधरी पर हुआ हमला केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि जनहित में समाचार प्रकाशित करने वाले पत्रकारों की स्वतंत्रता और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है। स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं और कथित अनियमितताओं से संबंधित खबरों को सामने लाना पत्रकारों का दायित्व है। यदि ऐसी खबरों के प्रकाशन के बाद किसी पत्रकार को जानलेवा हमले का सामना करना पड़े, तो यह पूरे पत्रकार समाज के लिए चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं से ग्रामीण और आंचलिक क्षेत्रों में काम करने वाले पत्रकारों के बीच भय का वातावरण बन सकता है। इसलिए इस मामले में पुलिस प्रशासन को निष्पक्ष जांच करते हुए दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार ऐसी प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए, जिससे पीड़ित पत्रकार को न्याय मिले और भविष्य में किसी पत्रकार को सच्चाई सामने लाने के कारण इस तरह की प्रताड़ना का सामना न करना पड़े।
पैसे और प्रभाव के बल पर पत्रकारों की आवाज दबाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं
जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय कार्यकारिणी पदाधिकारी अशोक कुमार झा ने कहा कि पत्रकारों का कार्य किसी व्यक्ति या संस्था के दबाव में आकर खबरों को छिपाना नहीं, बल्कि तथ्यों के आधार पर जनता तक सच्चाई पहुंचाना है। यदि कोई व्यक्ति अपने आर्थिक या राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर पत्रकारों को डराने, धमकाने अथवा उन पर हमला करने का प्रयास करता है, तो यह कानून के शासन और स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए गंभीर चुनौती है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं जैसे जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण क्षेत्र में यदि किसी प्रकार की अनियमितता या अवैध गतिविधि की शिकायत सामने आती है, तो उसकी जांच संबंधित प्रशासनिक और कानूनी संस्थाओं को करनी चाहिए। खबर प्रकाशित करने वाले पत्रकार को निशाना बनाना किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि पत्रकारों के विरुद्ध हिंसा और धमकी की घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई होना आवश्यक है, ताकि समाज में यह संदेश जाए कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और पत्रकारिता के कार्य में बाधा डालने वालों को कानून के दायरे में लाया जाएगा।
गिरफ्तारी के बाद एक दिन में जमानत पर रिहाई से उठे सवाल
अशोक कुमार झा ने अंधराठाढ़ी की घटना में आरोपित की गिरफ्तारी और उसके बाद एक दिन के भीतर जमानत पर रिहा होने के घटनाक्रम को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि स्थानीय पत्रकारों द्वारा आंदोलन किए जाने के बाद पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए एक आरोपित को गिरफ्तार किया था। जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बिहार सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष पत्रकार की सुरक्षा और न्याय का मुद्दा उठाया था। संगठन की पहल और अधिकारियों से बातचीत के बाद मामले में एक आरोपित की गिरफ्तारी हुई। हालांकि, अशोक कुमार झा के अनुसार, घटना में शामिल एक अन्य आरोपित अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी के बाद आरोपित की शीघ्र जमानत पर रिहाई और दूसरे आरोपित की गिरफ्तारी नहीं होने से स्थानीय पत्रकारों में निराशा और असुरक्षा की भावना पैदा हुई है। उन्होंने कहा कि जमानत न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन किसी गंभीर हमले के मामले में जांच, साक्ष्य संकलन और सभी आरोपितों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। पुलिस प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पीड़ित पत्रकार को न्याय मिले और मामले के सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच हो।
एक आरोपित की गिरफ्तारी, दूसरा अब भी फरार; पुलिस प्रशासन से जवाबदेही की मांग
अशोक कुमार झा ने कहा कि अंधराठाढ़ी की घटना में अब तक केवल एक आरोपित की गिरफ्तारी होने और दूसरे आरोपित के पुलिस की पकड़ से बाहर रहने की जानकारी सामने आई है। उन्होंने मधुबनी जिले के पुलिस प्रशासन से मांग की कि मामले में शेष आरोपित की गिरफ्तारी के लिए प्रभावी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि पत्रकार पर हमले की घटना में यदि सभी आरोपितों के विरुद्ध समयबद्ध और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होती है, तो इससे पीड़ित पत्रकार और स्थानीय पत्रकार समुदाय का पुलिस प्रशासन पर विश्वास प्रभावित हो सकता है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से आग्रह किया कि मामले की जांच में किसी भी प्रकार के बाहरी दबाव को प्रभावी न होने दिया जाए तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि पत्रकारों को अपनी सुरक्षा के लिए बार-बार आंदोलन करने की नौबत नहीं आनी चाहिए। प्रशासन का दायित्व है कि वह शिकायत मिलने पर तत्काल संज्ञान ले, पीड़ित को सुरक्षा और न्याय उपलब्ध कराए तथा पत्रकारों के विरुद्ध हिंसा की घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और डीजीपी से सीधी मांग, पत्रकार सुरक्षा विधेयक लाकर कानून बनाएं
जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय कार्यकारिणी पदाधिकारी अशोक कुमार झा ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और पुलिस महानिदेशक से राज्य में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर ठोस नीति बनाने तथा पत्रकार सुरक्षा विधेयक लाकर प्रभावी कानून लागू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों पर हमले की घटनाएं केवल किसी एक जिले या क्षेत्र तक सीमित चिंता का विषय नहीं हैं। राज्य के विभिन्न हिस्सों में काम करने वाले पत्रकारों को स्थानीय स्तर पर दबाव, धमकी और हिंसा जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। विशेषकर ग्रामीण और सुदूरवर्ती क्षेत्रों में कार्यरत पत्रकारों के पास सुरक्षा और सहायता के पर्याप्त संसाधन नहीं होते। ऐसे में राज्य सरकार को पत्रकारों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पत्रकार सुरक्षा कानून का उद्देश्य पत्रकारों को कानून से ऊपर रखना नहीं, बल्कि उन्हें अपने पेशेवर दायित्वों का निर्वहन करने के लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना होना चाहिए। पत्रकारों के विरुद्ध हिंसा, धमकी और उत्पीड़न के मामलों में त्वरित शिकायत निवारण, निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
मधुबनी पुलिस प्रशासन से पीड़ित पत्रकार को न्याय दिलाने की अपील
अशोक कुमार झा ने मधुबनी जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से विशेष रूप से आग्रह किया है कि पत्रकार बिंदेश्वर चौधरी पर हुए हमले के मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि पीड़ित पत्रकार को न्याय दिलाना पुलिस प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। घटना में शामिल सभी आरोपितों की भूमिका की जांच कर उनके विरुद्ध उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि पीड़ित पत्रकार और उनके परिवार की सुरक्षा से संबंधित किसी भी आशंका को गंभीरता से लिया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी पत्रकार को खबर प्रकाशित करने के कारण भयभीत होकर अपने पेशेवर दायित्वों से पीछे हटने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए। पुलिस प्रशासन को पत्रकारों के साथ संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं को सुनना चाहिए और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
ग्रामीण और आंचलिक पत्रकारों की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती
अशोक कुमार झा ने कहा कि बिहार के ग्रामीण, कस्बाई और सुदूरवर्ती क्षेत्रों में काम करने वाले पत्रकार अक्सर सीमित संसाधनों के बीच जनता की समस्याओं को सामने लाते हैं। वे सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, भ्रष्टाचार, सरकारी योजनाओं, प्रशासनिक लापरवाही और सामाजिक शोषण जैसे मुद्दों पर लगातार खबरें प्रकाशित करते हैं। कई बार स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली लोगों की गतिविधियों को उजागर करने के कारण उन्हें दबाव और धमकियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि आंचलिक पत्रकारिता लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। राजधानी और बड़े शहरों से दूर रहने वाले लोगों की समस्याएं अक्सर स्थानीय पत्रकारों के माध्यम से ही प्रशासन और सरकार तक पहुंचती हैं। यदि ऐसे पत्रकार असुरक्षित महसूस करेंगे, तो आम जनता की आवाज भी प्रभावित होगी। इसलिए पत्रकार सुरक्षा की व्यवस्था केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि राज्य के प्रत्येक जिले, प्रखंड और ग्रामीण क्षेत्र में कार्यरत पत्रकारों को भी सुरक्षा और न्याय की समान व्यवस्था उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
पत्रकारों की सुरक्षा केवल पत्रकार संगठनों का नहीं, सरकार का भी दायित्व
अशोक कुमार झा ने कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल पत्रकार संगठनों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि राज्य सरकार और प्रशासन का भी महत्वपूर्ण दायित्व है। पत्रकार समाज के सामने उन समस्याओं को उजागर करते हैं, जिनका समाधान करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में पत्रकारों पर हमला करने वालों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पत्रकारिता का स्वतंत्र और निष्पक्ष रहना बेहद महत्वपूर्ण है। यदि पत्रकारों को समाचार प्रकाशित करने से पहले अपनी सुरक्षा की चिंता करनी पड़े, तो इससे जनहित की पत्रकारिता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि पत्रकार संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद कर उनकी समस्याओं और सुझावों पर विचार किया जाए तथा पत्रकार सुरक्षा कानून के लिए आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए। उन्होंने कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने से न केवल पत्रकारिता मजबूत होगी, बल्कि जनता का लोकतांत्रिक संस्थाओं और प्रशासन पर विश्वास भी मजबूत होगा।
सच्चाई की आवाज को दबाने की कोशिश लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती
जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय कार्यकारिणी पदाधिकारी अशोक कुमार झा ने कहा कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य समाज के सामने सच्चाई रखना और जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाना है। पत्रकार किसी भी प्रकार के भय, दबाव और प्रलोभन से मुक्त होकर अपना कार्य कर सकें, इसके लिए सुरक्षित वातावरण जरूरी है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों पर हमला करने वाले लोगों के विरुद्ध समय पर कार्रवाई नहीं होने से समाज में गलत संदेश जा सकता है। इससे ऐसे तत्वों का मनोबल बढ़ने की आशंका रहती है, जो अपनी गतिविधियों को उजागर होने से रोकने के लिए पत्रकारों को निशाना बनाते हैं। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार को पत्रकारों की सुरक्षा के मुद्दे पर गंभीरता से विचार करते हुए ठोस कदम उठाने चाहिए। पत्रकारों की आवाज को दबाने के बजाय उनकी शिकायतों को सुनना और जनहित में प्रकाशित खबरों की निष्पक्ष जांच करना लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए आवश्यक है।
पत्रकारों को भयमुक्त वातावरण मिले, तभी मजबूत होगा लोकतंत्र
अशोक कुमार झा ने कहा कि पत्रकारों को ईमानदारी, निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ अपने कलम का इस्तेमाल करने का अवसर मिलना चाहिए। पत्रकारों को किसी भी प्रकार के दबाव, भय और धमकी से मुक्त वातावरण उपलब्ध कराना आवश्यक है, ताकि वे समाज के सामने सच्चाई रख सकें और आम जनता की समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुंचा सकें। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ तभी मजबूत रहेगा, जब पत्रकार सुरक्षित रहेंगे और उन्हें स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने बिहार सरकार से एक बार फिर आग्रह किया कि पत्रकार बिंदेश्वर चौधरी को न्याय दिलाने के लिए अंधराठाढ़ी की घटना में सभी आरोपितों के विरुद्ध निष्पक्ष एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा पूरे बिहार में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की दिशा में ठोस पहल की जाए।
अशोक कुमार झा ने कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा लोकतंत्र की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। यदि सच्चाई लिखने और दिखाने वाले पत्रकार ही सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो आम जनता की आवाज कमजोर पड़ जाएगी। इसलिए बिहार सरकार और पुलिस प्रशासन को पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए, ताकि राज्य में पत्रकार निर्भीक होकर जनहित में अपनी कलम चला सकें।
Reviewed by PSA Live News
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8:46:00 pm
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