राँची के तिरुपति बालाजी मंदिर में 'अशून्यशयन व्रत' पर महाअनुष्ठान; वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ भगवान लक्ष्मी वेंकटेश्वर का महाभिषेक
उद्यास्तमन सेवा में उमड़े श्रद्धालु; अखंड सौभाग्य और पारिवारिक समृद्धि की कामना के साथ विधि-विधान से संपन्न हुआ पूजा-अर्चना
राँची | राँची स्थित प्रसिद्ध दिव्यदेशम् श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर (तिरुपति बालाजी) मंदिर में सोमवार (28 सितंबर) को आश्विन कृष्णपक्ष की द्वितीया तिथि के अवसर पर 'अशून्यशयन व्रत' का भव्य आयोजन किया गया। आषाढ़ शुक्ल हरिशयनी एकादशी से प्रारंभ हुए चातुर्मास्य व्रत के क्रम में यह तीसरा अशून्यशयन व्रत था। इस पावन अवसर पर वैकुण्ठाधिपति भगवान् श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर की 'उद्यास्तमन सेवा' सहित भव्य महाभिषेक का विशेष अनुष्ठान विधि-विधान पूर्वक संपन्न हुआ।
व्रत का पौराणिक व शास्त्रीय महत्व
शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास्य के दौरान जब जगत्पति भगवान विष्णु अपनी प्रिया माता लक्ष्मी के साथ शयन करते हैं, तब 'अशून्यशयन' नामक व्रत का पालन किया जाता है। इस अवसर पर भगवान् श्रियःपति वेंकटेश्वर एवं माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने से गृहस्थ जीवन में धर्म, अर्थ और काम की सफलता प्राप्त होती है। पौराणिक मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है और पुरुषों को पत्नी वियोग का सामना नहीं करना पड़ता। अनुष्ठान के दौरान स्नान, देव-ऋषि-पितृ तर्पण, उपवास तथा नक्त भोजन के साथ भगवान को पुष्प, धूप और सामयिक फलों का नैवेद्य अर्पित करने का विधान है।
दूध, दही व औषधीय द्रव्यों से भव्य महाभिषेक
विशेष अनुष्ठान के तहत सर्वप्रथम भगवान् पद्मावती वल्लभ की दैनिक पूजा, अर्चना एवं तिरुवाराधना सविधान संपन्न कराई गई। इसके पश्चात श्री 'भू' और नीला के स्वामी सप्ताचलपति वेंकटेश दम्पति का दूध, दही तथा विभिन्न औषधीय द्रव्यों से भव्य महाभिषेक हुआ। इस दौरान अर्चकों द्वारा पुरुषसूक्त, श्रीसूक्त, नारायणुवाक, तैत्तिरीयोपनिषद तथा वेद के विभिन्न पवित्र मंत्रों का क्रमबद्ध सस्वर पाठ किया गया।
महाभिषेक के उपरांत भगवान का अलौकिक वस्त्राभूषणों और सुवासित पुष्पराशियों से मनमोहक श्रृंगार कर महाआरती उतारी गई। तत्पश्चात भगवान को फूल्हेरा चावल, सूजी हलवा, फल एवं मेवे का बालभोग निवेदित किया गया। इसके बाद श्रुति, उपनिषद की ऋचाओं और श्रीवेंकटनाथ द्वारा रचित स्तोत्रों के गायन से भगवान को प्रसन्न किया गया।
यजमान व प्रमुख आयोजक
इस उद्यास्तमन सेवा सह महाभिषेक अनुष्ठान के मुख्य यजमान राँची निवासी श्री पुलक सिंघानिया एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती आयुषी सिंघानिया रहे। दिनभर चले इस अनुष्ठान को मंदिर के अर्चक श्री सत्यनारायण गौतम, श्री गोपेश आचार्य और नारायण दास ने शास्त्रीय विधि-विधान से पूर्ण कराया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में राम अवतार नारसरिया, रचना सिंघानिया, अनूप अग्रवाल, प्रदीप नारसरिया, रंजन सिंह, राजेश सुल्तानिया, सुशील लोहिया, ओम प्रकाश गारोदिया और अमिताभ खेतान सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सक्रिय भूमिका रही।
Reviewed by PSA Live News
on
3:47:00 pm
Rating:

कोई टिप्पणी नहीं: