आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की मांग, आर्थिक रूप से कमजोर हर वर्ग को समान अवसर देने पर जोर
नई दिल्ली। देश में आरक्षण व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बहस तेज होती दिखाई दे रही है। इसी बीच किसान नेता राकेश टिकैत ने जाति के आधार पर दिए जाने वाले आरक्षण पर सवाल उठाते हुए कहा है कि आरक्षण का आधार जाति के बजाय आर्थिक स्थिति को बनाया जाना चाहिए। उनका कहना है कि समाज के प्रत्येक वर्ग में आर्थिक रूप से कमजोर लोग मौजूद हैं और उन्हें समान अवसर तथा सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए।
टिकैत ने उदाहरण देते हुए कहा कि मुजफ्फरनगर में ठाकुर और ब्राह्मण समाज के कई परिवारों की आर्थिक स्थिति अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के गरीब परिवारों से भी खराब है। ऐसे में केवल जाति को आधार बनाकर अवसर निर्धारित करना आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के साथ न्याय नहीं करता। उन्होंने आर्थिक रूप से पिछड़े प्रत्येक वर्ग के जरूरतमंद परिवारों को समान अवसर उपलब्ध कराने की बात कही।
आरक्षण को लेकर उठ रहे सवालों के बीच यह मुद्दा भी चर्चा में है कि क्या वर्तमान व्यवस्था का लाभ वास्तव में सबसे जरूरतमंद लोगों तक पहुंच रहा है। आलोचकों का तर्क है कि आर्थिक रूप से सक्षम परिवारों को लंबे समय तक आरक्षण का लाभ मिलता रहने और दूसरी ओर गरीब परिवारों के अवसरों से वंचित रहने की स्थिति में व्यवस्था की समीक्षा आवश्यक है।
गरीबी बनाम जाति का सवाल
आरक्षण के आर्थिक आधार की मांग करने वालों का कहना है कि शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में सहायता का मुख्य उद्देश्य सामाजिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को आगे बढ़ाना होना चाहिए। उनका तर्क है कि यदि किसी परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है, तो उसके बच्चे को शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार में सहायता मिलनी चाहिए, चाहे वह किसी भी जाति या समुदाय से संबंधित हो।
हालांकि, आरक्षण समर्थकों का कहना है कि भारत में सामाजिक भेदभाव और ऐतिहासिक वंचना केवल आर्थिक समस्या नहीं है। इसलिए जाति आधारित आरक्षण के पीछे सामाजिक प्रतिनिधित्व और समान अवसर सुनिश्चित करने का उद्देश्य भी महत्वपूर्ण है। इसी कारण आरक्षण का मुद्दा केवल आर्थिक स्थिति तक सीमित नहीं माना जाता।
फिलहाल राकेश टिकैत के बयान ने आरक्षण व्यवस्था के जातिगत बनाम आर्थिक आधार को लेकर चल रही बहस को फिर सामने ला दिया है। सवाल यह है कि क्या भविष्य में आरक्षण व्यवस्था में ऐसे बदलाव किए जा सकते हैं, जिससे सामाजिक न्याय के उद्देश्य को बनाए रखते हुए आर्थिक रूप से कमजोर प्रत्येक वर्ग के जरूरतमंद युवाओं को भी समान अवसर मिल सके।
Reviewed by PSA Live News
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10:22:00 am
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