मौजूदा बाजार दरों के अनुसार चीनी की कीमत करीब 67 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है, जबकि तीन महीने पहले यह करीब 48 रुपये प्रति किलोग्राम थी। इसी अवधि में गुड़ के दाम में लगभग 24 प्रतिशत, चावल में 16 प्रतिशत और मक्के के आटे में करीब 11 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। इससे स्पष्ट है कि महंगाई का दबाव रसोई के कई जरूरी सामानों पर दिखाई दे रहा है।
एथेनॉल उत्पादन ने बढ़ाई चीनी की मांग
चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे एथेनॉल उद्योग की बढ़ती मांग को भी एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार देश में गन्ने के उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा चीनी के साथ-साथ एथेनॉल निर्माण में भी इस्तेमाल होता है। सरकार की एथेनॉल नीति के चलते गन्ने के उपयोग में बदलाव आया है, जिसका असर चीनी की उपलब्धता पर पड़ा है।
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के मुताबिक पिछले वर्ष देश में लगभग 720 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन हुआ। इसके लिए करीब 1.33 करोड़ टन अनाज और 25 लाख टन चीनी का उपयोग किया गया। इसके अलावा लगभग 34 लाख टन गुड़ का भी इस्तेमाल हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार एथेनॉल उत्पादन में बढ़ती मांग और घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता के बीच संतुलन बनाए रखना अब महत्वपूर्ण चुनौती बन गया है।
सरकार ने 10 लाख टन शुल्क-मुक्त आयात की दी मंजूरी
चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। इसके साथ ही थोक उपभोक्ताओं और कारोबारियों के लिए स्टॉक सीमा लागू की गई है। जिन व्यापारियों के पास निर्धारित सीमा से अधिक चीनी का भंडार होगा, उन पर कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना और जमाखोरी के जरिए कीमतों में कृत्रिम वृद्धि को रोकना है।
पटना में कीमत 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंची
प्राप्त जानकारी के अनुसार बिहार की राजधानी पटना में भी चीनी की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। बाजार में इसकी कीमत करीब 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने राज्य में 400 टन से अधिक चीनी का स्टॉक रखने वाले कारोबारियों पर निगरानी बढ़ाने का निर्णय लिया है।
केंद्र के निर्देश के अनुसार संबंधित अधिकारियों को स्टॉक की जांच करने और निर्धारित सीमा से अधिक भंडारण पाए जाने पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए जिला स्तर पर अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित कर चीनी मिलों और कारोबारियों के स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया जाएगा।
सात दिन से अधिक स्टॉक रखने पर निगरानी
कारोबारियों और मिलों के लिए स्टॉक की निगरानी को और सख्त किया गया है। चीनी की बिक्री के बाद उसे निर्धारित अवधि से अधिक समय तक परिसर में रखने पर कार्रवाई की व्यवस्था की गई है। सरकार ने 30 नवंबर 2026 तक कारोबारियों के लिए अधिकतम 400 टन स्टॉक सीमा निर्धारित की है।
जांच के लिए जिलों में संयुक्त टीम गठित की जाएगी, जिसमें आपूर्ति विभाग और संबंधित प्रशासनिक अधिकारी शामिल होंगे। टीम चीनी मिलों तथा व्यापारियों के स्टॉक का भौतिक सत्यापन करेगी और अनियमितता मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
पांच जिलों में विशेष अभियान
चीनी की कीमतों और भंडारण पर निगरानी के लिए बिहार के पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, समस्तीपुर और सीतामढ़ी जिलों में विशेष अभियान चलाया जाएगा। इन जिलों में चीनी उत्पादन, व्यापार और भंडारण से जुड़े कारोबारियों पर विशेष नजर रखी जाएगी।
फिलहाल सरकार के सामने दोहरी चुनौती है-एक ओर उपभोक्ताओं को महंगी चीनी से राहत दिलाना और दूसरी ओर एथेनॉल उत्पादन तथा चीनी उद्योग की जरूरतों के बीच संतुलन बनाए रखना। आने वाले महीनों में सरकार के आयात, स्टॉक सीमा और निगरानी संबंधी फैसलों का बाजार कीमतों पर कितना असर पड़ता है, यह देखने वाली बात होगी।
Reviewed by PSA Live News
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7:41:00 pm
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