बिहार के मुंगेर में ₹3 करोड़ की लागत से तैयार हो रहा मलेशिया का 'पेट्रोनास ट्विन टावर', बिना इंजीनियर सिर्फ एक तस्वीर देखकर 170 फीट ऊंचा ढांचा खड़ा कर रहे 70 मुस्लिम कारीगर
मुंगेर (बिहार) | विशेष संवाददाता.
आस्था, कला और साम्प्रदायिक सौहार्द का अगर कोई सबसे खूबसूरत और जीवंत संगम देखना हो, तो इस बार आपको बिहार के मुंगेर जिले में आना होगा। अक्सर दुर्गा पूजा के भव्य पंडालों के लिए कोलकाता और पटना का नाम सबसे आगे आता है, लेकिन इस साल मुंगेर के कल्याणपुर ने भव्यता के सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
यहां दुर्गा पूजा के पावन अवसर पर मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर की विश्व प्रसिद्ध इमारत **‘पेट्रोनास ट्विन टावर’ (Petronas Twin Towers)** के आकार का एक अद्भुत और विशालकाय पूजा पंडाल तैयार किया जा रहा है। इस भव्य पंडाल की ऊंचाई 170 फीट रखी गई है और इसे धरातल पर उतारने में 3 करोड़ रुपये से अधिक का भारी-भरकम बजट खर्च किया जा रहा है।
### मुख्य आकर्षण: एक नज़र में
* **पंडाल की थीम:** मलेशिया का प्रसिद्ध 'पेट्रोनास ट्विन टावर'
* **कुल ऊंचाई:** 170 फीट (लगभग 17 मंजिला इमारत के बराबर)
* **अनुमानित लागत:** ₹3 करोड़ से अधिक
* **अन्य आकर्षण:** ब्रिटिश पार्लियामेंट और कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल का सेट
* **कारीगरों की टीम:** झारखंड के 70 मुस्लिम कारीगर (3 महीने से शुद्ध शाकाहारी)
* **तकनीक:** बिना किसी सिविल इंजीनियर या कंप्यूटर मैप के, सिर्फ एक फोटो देखकर निर्माण
## बिना इंजीनियर और कंप्यूटर डिजाइन के रचा जा रहा इतिहास
आधुनिक युग में जहां एक छोटा सा मकान बनाने के लिए भी आर्किटेक्ट, सिविल इंजीनियर और 3D कंप्यूटर डिजाइन की जरूरत पड़ती है, वहीं कल्याणपुर में बन रहा यह 170 फीट ऊंचा टावर देसी हुनर का एक करिश्मा है।
इस विशालकाय ढांचे को बनाने में किसी भी डिग्रीधारी इंजीनियर या कंप्यूटर मैप (CAD) की मदद नहीं ली गई है। कारीगरों के पास मलेशिया के पेट्रोनास टावर की सिर्फ एक साधारण सी तस्वीर है। उसी तस्वीर को देखकर, अपनी आंखों के अंदाजे और वर्षों के अनुभव के दम पर कारीगर बांस, बल्ली, प्लाईवुड, थर्माकोल और कपड़े से इस गगनचुंबी इमारत को हूबहू आकार दे रहे हैं। दो टावरों को जोड़ने वाला प्रसिद्ध 'स्काई ब्रिज' (Sky Bridge) भी इस पंडाल में इतनी बारीकी से बनाया जा रहा है कि दूर से देखने वालों को असली इमारत का भ्रम हो जाए।
## गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल: 3 महीने से कारीगरों ने त्यागा मांसाहार
इस भव्य आयोजन का सबसे भावुक और प्रेरणादायक पहलू इसके कारीगर हैं। मां दुर्गा के इस पावन दरबार को सजाने की जिम्मेदारी झारखंड से आए 70 मुस्लिम कारीगरों की टीम ने उठाई है।
इन कारीगरों के लिए यह सिर्फ एक ठेका या मजदूरी का काम नहीं है, बल्कि माता रानी के प्रति उनकी अपनी आस्था और सम्मान का प्रतीक है। पंडाल की पवित्रता को बनाए रखने के लिए इन सभी 70 मुस्लिम कारीगरों ने पिछले तीन महीनों से मांसाहार (नॉन-वेज) का पूरी तरह से त्याग कर दिया है।
> *"हमारे लिए कला ही सबसे बड़ा धर्म है। जब हम मां दुर्गा का पंडाल बनाते हैं, तो हमारे मन में भी वही श्रद्धा होती है जो किसी भक्त के मन में होती है। जब से हमने कल्याणपुर में बांस का पहला खंभा गाड़ा है, तब से हमारी पूरी टीम शुद्ध शाकाहारी भोजन कर रही है। हम दिन-रात एक कर रहे हैं ताकि माता रानी का यह दरबार पूरे देश में सबसे सुंदर दिखे।"* > **— निर्माण कार्य में जुटे मुख्य कारीगर**
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## सिर्फ ट्विन टावर ही नहीं, ब्रिटिश पार्लियामेंट और विक्टोरिया हाउस का भी होगा दीदार
कल्याणपुर दुर्गा पूजा समिति ने इस बार भक्तों को एक ही परिसर में दुनिया भर की सैर कराने की तैयारी की है। मुख्य 170 फीट के पेट्रोनास ट्विन टावर के अंदर जहां मां जगदम्बे की भव्य और दिव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी, वहीं पंडाल परिसर के आसपास दो और ऐतिहासिक इमारतों का सेट तैयार किया जा रहा है:
1. ब्रिटिश पार्लियामेंट और विक्टोरिया हाउस: मुख्य टावर के बगल में लंदन के ब्रिटिश पार्लियामेंट और कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल की तर्ज पर एक बेहद शानदार सेट बनाया जा रहा है।
2. विराजेंगे भगवान भोलेनाथ: इस विशेष सेट के भीतर देवाधिदेव महादेव (भगवान भोलेनाथ) की विशाल प्रतिमा विराजमान होगी, जो श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का दूसरा सबसे बड़ा केंद्र बनेगी।
3. इंटरनेशनल लेवल की लाइटिंग: रात के समय इस 170 फीट के टावर को ठीक वैसा ही लुक देने के लिए, जैसा कुआलालंपुर में दिखता है, विशेष रूप से कोलकाता और चंदननगर से लाइटिंग एक्सपर्ट्स बुलाए गए हैं। हजारों एलईडी और लेजर लाइटों से जब यह पंडाल जगमगाएगा, तो इसकी रोशनी कई किलोमीटर दूर से दिखाई देगी।
## सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के कड़े इंतजाम
3 करोड़ की लागत से बन रहे इस अजूबे को देखने के लिए सिर्फ मुंगेर ही नहीं, बल्कि भागलपुर, बेगूसराय, लखीसराय, खगड़िया और पटना समेत पूरे बिहार और पड़ोसी राज्य झारखंड से लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद है।
इतनी बड़ी भीड़ को देखते हुए पूजा समिति और स्थानीय प्रशासन ने अभी से कमर कस ली है। पंडाल में प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग चौड़े रास्ते बनाए जा रहे हैं। चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरे (CCTV), ड्रोन से निगरानी, फायर ब्रिगेड की गाड़ियां और सैकड़ों की संख्या में वोलंटियर्स तैनात किए जाएंगे ताकि किसी भी श्रद्धालु को दर्शन करने में कोई परेशानी न हो।
मुंगेर के कल्याणपुर का यह पंडाल इस बात का प्रमाण है कि बिहार की धरती पर कला, श्रद्धा और भाईचारे की जड़ें कितनी गहरी हैं। जैसे-जैसे नवरात्रि के दिन करीब आ रहे हैं, लोगों का उत्साह चरम पर पहुंचता जा रहा है।
Reviewed by PSA Live News
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7:23:00 am
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