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विशेष ग्राउंड रिपोर्ट: खूनी मोड़ बना मरुकिया साइफन

नहर विभाग और प्रशासन की घोर लापरवाही से फिर छिना एक घर का चिराग; न स्पीड ब्रेकर, न साइन बोर्ड, आक्रोशित ग्रामीणों ने किया सड़क जाम


स्थान:
अंधराठाढ़ी (मधुबनी) | विशेष संवाददाता

प्रमुख बिंदु (News Highlights)

  • दर्दनाक हादसा: अंधराठाढ़ी के मरुकिया साइफन (कबीर चौक) के पास अज्ञात तेज रफ्तार वाहन ने 28 वर्षीय युवक अजय साहनी को कुचला, मौके पर ही मौत।
  • विभागीय बेरुखी: दर्जनों हादसों के बाद भी जल संसाधन (नहर) विभाग और पथ निर्माण विभाग ने नहीं लगाए चेतावनी बोर्ड और गति अवरोधक (स्पीड ब्रेकर)।
  • सड़क पर उतरा जन-आक्रोश: शव सड़क पर रखकर ग्रामीणों ने किया जोरदार प्रदर्शन, आरोपी चालक की गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को मुआवजे की मांग।
  • अंधेरे में साइफन: न सुरक्षा रेलिंग और न ही स्ट्रीट लाइट, रात के समय नहर में गाड़ियां गिरने का बना रहता है हर पल खतरा।

घटना का विवरण: रफ्तार का कहर और बिखरते सपने

अंधराठाढ़ी (मधुबनी): जिले के अंधराठाढ़ी थाना क्षेत्र अंतर्गत मरुकिया साइफन (कबीर चौक) के समीप हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीते दिन एक बार फिर इस 'डेथ ज़ोन' बन चुके मोड़ पर एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया। अंधराठाढ़ी गांव निवासी 28 वर्षीय अजय साहनी अपने घर लौट रहे थे, तभी सामने से आ रहे एक अज्ञात अनियंत्रित और तेज रफ्तार वाहन ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी।

टक्कर इतनी भीषण थी कि अजय साहनी दूर सड़क पर जा गिरे और सिर में गंभीर चोट आने के कारण उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। हादसे के बाद चालक वाहन समेत अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार होने में कामयाब रहा। घटना की खबर मिलते ही मृतक के परिजनों में कोहराम मच गया, वहीं संपूर्ण क्षेत्र में शोक के साथ-साथ प्रशासन के प्रति तीव्र असंतोष फैल गया।

आखिर क्यों ‘डेथ ट्रैप’ बन चुका है मरुकिया साइफन?

स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों के अनुसार, मरुकिया साइफन का यह हिस्सा अब हादसों का पर्याय बन चुका है। इसके पीछे प्रशासनिक व विभागीय लापरवाही के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  1. अंधा मोड़ और चेतावनी पट्ट (साइन बोर्ड) का अभाव: साइफन के पास अत्यंत खतरनाक मोड़ है। सड़क पर दूर से आने वाले चालकों को आगे साइफन या मोड़ का जरा भी अंदाजा नहीं होता। यहाँ विभाग द्वारा न तो कोई 'खतरनाक मोड़' का सांकेतिक बोर्ड लगाया गया है और न ही गति सीमा तय करने का कोई बोर्ड मौजूद है।
  2. स्पीड ब्रेकर की गैर-मजूदगी: मुख्य मार्ग होने के कारण यहाँ से चौबीसों घंटे छोटे-बड़े वाहनों की आवाजाही होती है। साइफन के दोनों तरफ गति अवरोधक (स्पीड ब्रेकर) न होने से वाहन चालक 80 से 100 किमी/घंटा की रफ्तार से गुजरते हैं, जिससे अचानक सामने आने वाले राहगीर दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।
  3. सुरक्षा रेलिंग और स्ट्रीट लाइट न होना: साइफन और नहर के समानांतर कोई मजबूत लोहे या कंक्रीट की बैरिकेडिंग नहीं की गई है। इसके अलावा, रात के समय यहाँ घना अंधेरा छाया रहता है। रोशनी की कोई व्यवस्था न होने के कारण कई बार दोपहिया व चारपहिया वाहन सीधे साइफन या नहर की गहराई में जा गिरते हैं।

सड़क पर उतरा जन-आक्रोश: परिजनों व ग्रामीणों का चक्का जाम

हादसे के तुरंत बाद सैकड़ों की संख्या में स्थानीय ग्रामीण और मृतक के परिजन घटनास्थल पर जमा हो गए। उग्र भीड़ ने शव को सड़क के बीचों-बीच रखकर अंधराठाढ़ी मुख्य मार्ग को पूरी तरह से बाधित कर दिया और प्रशासन तथा नहर विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

ग्रामीणों की मुख्य मांगें:

  • नहर विभाग के दोषी अधिकारियों पर लापरवाही की FIR दर्ज की जाए।
  • मरुकिया साइफन के दोनों ओर तत्काल प्रभाव से पक्के स्पीड ब्रेकर और रेडियम साइन बोर्ड लगाए जाएं।
  • साइफन के चारों तरफ मजबूत सुरक्षा बैरिकेडिंग और हाई-मास्ट लाइट की व्यवस्था की जाए।
  • मृतक अजय साहनी के आश्रित परिजनों को सरकारी योजना के तहत ₹10 लाख का उचित मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को रोजगार दिया जाए।
  • फरार अज्ञात वाहन चालक को सीसीटीवी फुटेज खंगालकर तुरंत गिरफ्तार किया जाए।

अधिकारियों का आश्वासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बोल

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस बल और प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा। काफी देर तक ग्रामीणों और अधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई। पुलिस और अंचलाधिकारी (CO) ने आक्रोशित लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराया और मुआवजा प्रक्रिया जल्द पूरी करने तथा विभागीय पत्राचार कर साइन बोर्ड व ब्रेकर बनवाने का लिखित/मौखिक आश्वासन दिया, जिसके बाद कई घंटों बाद यातायात बहाल हो सका।

"मरुकिया साइफन पर आए दिन लोगों की जानें जा रही हैं। हमने कई बार संबंधित विभाग के कार्यपालक अभियंता और स्थानीय प्रशासन को आवेदन दिया, लेकिन किसी के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। अगर एक सप्ताह के भीतर यहाँ स्पीड ब्रेकर और साइन बोर्ड नहीं लगाए गए, तो हम उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।" — स्थानीय जनप्रतिनिधि व ग्रामीण प्रतिनिधि

"दुर्घटना अत्यंत दुखद है। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। अज्ञात वाहन की पहचान के लिए आसपास के रास्तों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। साथ ही सड़क पर सुरक्षा के दृष्टिकोण से संबंधित विभाग को तुरंत पत्र भेजा जा रहा है।" — थाना अध्यक्ष, अंधराठाढ़ी

संपादकीय दृष्टिकोण: कब जागेगा सुस्त तंत्र?

मरुकिया साइफन पर लगातार हो रही मौते अब महज 'दुर्घटनाएं' नहीं रह गई हैं, बल्कि यह विभागीय उदासीनता और प्रशासनिक अनदेखी से हो रही हत्याएं जैसी प्रतीत होती हैं। किसी भी सड़क या साइफन के निर्माण के साथ उसकी सुरक्षा मानक (Safety Protocols) तय करना अनिवार्य होता है। परंतु नहर विभाग और पथ निर्माण एजेंसी कागजी खानापूर्ति में व्यस्त हैं।

क्या विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा था? अजय साहनी की असमय मौत ने एक बार फिर यह कड़वा सवाल खड़ा कर दिया है कि आम जनता की जान की कीमत आखिर इस व्यवस्था के लिए क्या है? अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस हादसे से सबक लेकर ठोस कदम उठाता है या फिर कागजी आश्वासनों की धूल में एक और जिंदगी का हिसाब दबकर रह जाएगा।

विशेष ग्राउंड रिपोर्ट: खूनी मोड़ बना मरुकिया साइफन विशेष ग्राउंड रिपोर्ट: खूनी मोड़ बना मरुकिया साइफन Reviewed by PSA Live News on 2:23:00 pm Rating: 5

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