बिहार के करोड़ों रैयतों के लिए ऐतिहासिक और राहत भरी खबर: राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का बड़ा ऐलान, जमाबंदी सुधार और उत्तराधिकार नामांतरण अभियान में जमीन की स्थल मापी होगी पूरी तरह निःशुल्क
पटना: बिहार के भूमि स्वामियों और रैयतों के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने एक बेहद क्रांतिकारी और राहत भरी घोषणा की है। राज्य में इन दिनों जोर-शोर से चलाए जा रहे 'जमाबंदी सुधार एवं उत्तराधिकार नामांतरण अभियान' के तहत अब अंचल कार्यालय के माध्यम से कराई जाने वाली स्थल मापी और स्थलीय सत्यापन को पूरी तरह से निःशुल्क कर दिया गया है। विभाग द्वारा जारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों के अनुसार, इस विशेष अभियान के तहत रैयतों को अपनी जमीन की नापी कराने के लिए न तो कोई शुल्क (फीस) देना होगा और न ही इसके लिए कोई अलग से आवेदन जमा करने की आवश्यकता है। सरकार के इस बड़े कदम से प्रदेश के ग्रामीण और शहरी इलाकों के उन लाखों किसानों और परिवारों को सीधा फायदा मिलेगा, जिनकी जमीनों के कागजात में बरसों से त्रुटियां चली आ रही थीं या जिन्हें अपने पुश्तैनी मामलों में उत्तराधिकार नामांतरण कराना था।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के इस विशेष अभियान की समय-सीमा 31 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित की गई है। इस तय अवधि के दौरान, यदि किसी रैयत को अपनी जमीन के रकबा, खाता या खेसरा आदि के मिलान और स्थलीय सत्यापन की आवश्यकता पड़ती है, तो विभागीय अमला व कर्मचारी पूरी पारदर्शिता के साथ इसे निःशुल्क पूरा करेंगे। सबसे खास बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया को बेहद सरल बनाया गया है, जिससे आम जनता को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें और बिचौलियों या अवैध वसूली से पूरी तरह छुटकारा मिल सके। विभाग का साफ निर्देश है कि मापी और स्थलीय सत्यापन की जो रिपोर्ट आएगी, उसके आधार पर जमाबंदी में सुधार का कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ किया जाएगा।
इस महत्वपूर्ण अभियान के क्रियान्वयन से बिहार के भू-अभिलेखों में दशकों से चली आ रही जमीनी गड़बड़ियों और त्रुटियों का त्वरित समाधान सुनिश्चित हो रहा है। अक्सर देखा जाता था कि जमीन के पुराने दस्तावेजों, बंटवारों या वारिसों के नाम चढ़ाने की प्रक्रिया में लोगों को भारी आर्थिक बोझ और कागजी उलझनों का सामना करना पड़ता था। अब चूंकि उत्तराधिकार नामांतरण और इसके साथ होने वाली जरूरी भू-मापी को पूरी तरह निःशुल्क कर दिया गया है, इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों में इसको लेकर भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। सरकार के इस कदम से न केवल भूमि विवादों में भारी कमी आएगी, बल्कि प्रदेश का भू-राजस्व प्रबंधन भी अधिक आधुनिक, पारदर्शी और जनहितैषी बनेगा। राज्य के सभी रैयतों से अपील की गई है कि वे इस अभियान की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2026 से पहले आगे आएं और अपनी जमीन के कागजात दुरुस्त करवाकर इस जनकल्याणकारी योजना का भरपूर लाभ उठाएं।
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10:09:00 pm
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