राँची के श्रीतिरुपति बालाजी मंदिर में इंदिरा एकादशी पर उमड़ा आस्था का जनसैलाब, पाञ्चरात्र आगम विधि से संपन्न हुए भव्य अनुष्ठान
राँची (न्यूज़ डेस्क): राजधानी राँची स्थित प्रसिद्ध दिव्यदेशम् श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर (तिरुपति बालाजी) मंदिर में मंगलवार, 06 अक्टूबर 2026 को आश्विन कृष्ण पक्ष की पावन एकादशी यानी 'इन्दिरा एकादशी' के अवसर पर एक भव्य एवं भक्तिमय व्रतोत्सव का आयोजन किया गया। मंदिर प्रांगण में तड़के से ही सनातन परंपरा के अनुसार वैदिक एवं धार्मिक अनुष्ठानों का दौर प्रारंभ हो गया, जिसमें भाग लेने के लिए दूर-दराज से हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु पहुँचे। संपूर्ण मंदिर परिसर दिनभर "श्रीनिवासा गोविंदा, श्रीवेंकटेशा गोविंदा, वेंकटरमना गोविंदा" के अलौकिक एवं गूंजायमान जयघोषों से सराबोर रहा।
पाञ्चरात्र आगम विधि से प्रात:काल प्रारंभ हुए विशेष धार्मिक अनुष्ठान
मंदिर में आयोजित इस विशेष व्रतोत्सव के समस्त कार्यक्रम शास्त्रोक्त एवं दक्षिण भारतीय 'पाञ्चरात्र आगम विधि' के अनुसार विधि-विधान से संपन्न कराए गए। प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में भगवान श्रीवेंकटेश का दिव्य 'विश्वरूप दर्शन' कराया गया, जिसके पश्चात् प्राभातिक वातावरण में सुप्रभातम्, करावलम्बम् मंगलाशासनम् एवं वेंकटेश स्तोत्रम् का सस्वर पाठ किया गया।
मंगल गान के उपरांत अर्चकों द्वारा मंदिर एवं अनुष्ठान स्थल की सुरक्षा हेतु दिक्पाल देवताओं का 'दिक्बन्धन पूजन' किया गया। इसके बाद अनादि ब्रह्म परमात्मा श्रीवेंकटाचलवासी का षोडषोपचार विधि से विशेष पूजन एवं भगवदाराधन संपन्न हुआ।
त्रिचक्र आरती, फलाहारी बालभोग एवं वेद-ध्वनियों से गुंजायमान हुआ प्रांगण
पूजा-अर्चना के विशेष क्रम में अज्ञानांधकार का विनाश कर ज्ञान के प्रकाश का प्रतीक मानी जाने वाली 'नक्षत्र आरती' उतारी गई। द्वितीय चक्र में ज्योतिष्पुंज से प्रकाशित 'अमृत कलश आरती' तथा तृतीय चक्र में सुगन्धित 'कर्पूर बाती आरती' की गई। आरती के पश्चात् भगवान को अत्यंत पवित्रता से निर्मित फलाहारी व्यंजनों का 'बालभोग' अर्पित किया गया।
इस दौरान मंदिर के विप्रों एवं आचार्यों द्वारा सुश्राव्य वेदध्वनियों, उपनिषदों के गंभीर पाठ एवं देशिक स्तोत्राणि के माध्यम से भगवान की महास्तुति की गई, जिससे संपूर्ण वातावरण दिव्य ऊर्जा से भर उठा।
गोपुरम कपाट खुलते ही गूंजे गोविंदा के जयकारे, सहस्रनाम अर्चना निरंतर जारी
प्रातःकालीन मुख्य पूजनोपचार एवं सेवाओं के पूर्ण होने के उपरांत आम दर्शनार्थियों के लिए मंदिर के विशाल गोपुरम के कपाट खोल दिए गए। पट खुलते ही मंदिर परिसर भक्तों के हर्षोल्लास और 'गोविंदा-गोविंदा' के भक्तिमय जयघोष से गूँज उठा।
श्रद्धालुओं ने अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु परमात्मा श्रीवेंकटेश्वर एवं जगज्जननी महारानी महालक्ष्मी जी के समक्ष अष्टोत्तर शतनाम (108 नाम) अर्चना एवं श्रीविष्णु सहस्त्रनाम का निरंतर पाठ और अर्चना कराई।
| अनुष्ठान का विवरण | विधि एवं विशेषता |
|---|---|
| ब्रह्म मुहूर्त दर्शन | विश्वरूप दर्शन एवं वेंकटेश सुप्रभातम् का पाठ |
| मुख्य पूजन विधि | दिक्पाल दिक्बन्धन एवं षोडषोपचार भगवदाराधनम् |
| आरती क्रम | नक्षत्र आरती, अमृत कलश आरती एवं कर्पूर बाती आरती |
| भोग समर्पण | फलाहारी व्यंजनों का बालभोग एवं वेद-स्तोत्र महास्तुति |
| अर्चन सेवा | श्रीविष्णु सहस्त्रनाम एवं अष्टोत्तर शतनाम अर्चना |
त्रिकाल सेवा एवं शयन आरती के साथ संपन्न हुआ व्रतोत्सव
मंदिर के मुख्य अर्चक श्री सत्यनारायण गौतम, श्री गोपेश आचार्य एवं नारायण दास जी ने भगवान श्रीमन्नारायण की त्रिकाल पूजा-सेवा का संपादन किया। दिनभर चले विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के बाद देर रात्रि भगवान की विशेष 'शयन आरती' की गई और विश्व कल्याण की मंगल प्रार्थना के साथ इंदिरा एकादशी व्रतोत्सव का समापन हुआ।
इस पावन अवसर पर मुख्य रूप से सर्वश्री राम अवतार नारसरिया, प्रदीप नारसरिया, रंजन सिंह, सुशील गरोदिया, शंभू नाथ पोद्दार, प्रभास मित्तल, राजकुमार मित्तल, सुशील लोहिया, मुरारी लाल शर्मा, यशोदा देवी, सीता शर्मा, बबीता देवी सहित नगर के कई गणमान्य नागरिक एवं भारी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे।
Reviewed by PSA Live News
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9:52:00 pm
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