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मिथिला की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने की अनूठी पहल: आम्रपाली कला केंद्र में महाकवि विद्यापति के गीतों पर चार दिवसीय विशेष कार्यशाला का भव्य आयोजन


मधुबनी:
बिहार की सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले मिथिला क्षेत्र में लोकसंस्कृति और शास्त्रीय संगीत के संरक्षण की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग के सुयोग्य मार्गदर्शन में संचालित आम्रपाली कला प्रशिक्षण केंद्र, मधुबनी में महाकवि विद्यापति के अमर गीतों पर आधारित चार दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन होने जा रहा है। यह आयोजन क्षेत्र के संगीत प्रेमियों, विद्यार्थियों और युवा कलाकारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जो मैथिली लोकसंगीत की गहराई और उसकी शास्त्रीय जड़ों से रूबरू होना चाहते हैं।

कार्यशाला की मुख्य रूपरेखा एवं तिथियाँ

संगीत साधना और विद्यापति के पदों की मिठास से सराबोर यह चार दिवसीय आयोजन आने वाले नवंबर महीने में संपन्न होगा। इस कार्यशाला से जुड़ी मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:

  • आयोजन स्थल: आम्रपाली कला प्रशिक्षण केंद्र, ग्राउंड फ्लोर, जिला परिषद कार्यालय, मधुबनी।
  • कार्यशाला की अवधि: 4 नवंबर से 7 नवंबर 2026 तक।
  • दैनिक सत्र और समय: कार्यशाला के दौरान प्रतिदिन दो विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे—
    • प्रथम सत्र: अपराह्न 3:00 बजे से 4:00 बजे तक।
    • द्वितीय सत्र: अपराह्न 4:30 बजे से सायं 6:30 बजे तक।

सुप्रसिद्ध संगीतज्ञ पंडित राधा मोहन मिश्रा का मिलेगा सानिध्य

किसी भी कला को सीखने में गुरु की महत्ता सर्वोपरि होती है। इस प्रतिष्ठित कार्यशाला की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका संचालन देश के सुप्रसिद्ध संगीतज्ञ पंडित राधा मोहन मिश्रा द्वारा किया जाएगा।

पंडित मिश्रा के मार्गदर्शन में प्रतिभागियों को केवल गीत गाना ही नहीं सिखाया जाएगा, बल्कि उन्हें विद्यापति के गीतों के मर्म, उनकी विशिष्ट गायन शैली, सदियों पुरानी संगीत परंपरा और उनके सांस्कृतिक महत्व के ऐतिहासिक पहलुओं से भी गहराई से परिचित कराया जाएगा। इसके साथ ही, प्रतिभागियों को इन अमर रचनाओं के प्रभावी गायन और मंच प्रस्तुतीकरण का व्यावहारिक (practical) प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा।

चयन प्रक्रिया और सीमित सीटें

इस कार्यशाला में गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण सुनिश्चित करने के लिए सीटों की संख्या सीमित रखी गई है, ताकि प्रत्येक प्रतिभागी पर विशेष ध्यान दिया जा सके।

  • कुल सीटें: 50 प्रतिभागी।
  • चयन का आधार: 'पहले आओ, पहले पाओ' के सिद्धांत पर चयन किया जाएगा।
  • लक्षित वर्ग: संगीत में रुचि रखने वाले इच्छुक बच्चे, युवा एवं विद्यार्थी इसमें भाग ले सकते हैं।

आवेदन और संपर्क विवरण

यदि आप या आपके जानने वाले इस कार्यशाला का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो समय रहते अपनी सीट सुनिश्चित कर लें।

  • आवेदन प्रक्रिया: इच्छुक प्रतिभागी कार्यालय अवधि के दौरान आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र, ग्राउंड फ्लोर, जिला परिषद कार्यालय में जाकर संपर्क कर सकते हैं और आवेदन प्राप्त कर सकते हैं।
  • हेल्पलाइन नंबर: कार्यशाला या प्रवेश से संबंधित किसी भी प्रकार की आधिकारिक जानकारी या सहायता के लिए कार्यालय के संपर्क नंबर 9931747796 पर संपर्क किया जा सकता है।

आयोजन का मुख्य उद्देश्य: नई पीढ़ी तक पहुँचे विद्यापति की विरासत

"विद्यापति के पद केवल शब्द या संगीत नहीं हैं, बल्कि वे मिथिला की आत्मा और यहाँ की लोक-संस्कृति के जीवंत दस्तावेज हैं।"

बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग और आम्रपाली कला प्रशिक्षण केंद्र का यह संयुक्त प्रयास इस बात पर केंद्रित है कि महाकवि विद्यापति की समृद्ध संगीत और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए उसे आज की युवा पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुँचाया जाए। आधुनिकता की दौड़ में अपनी जड़ों से दूर हो रही नई पीढ़ी के भीतर मैथिली गीत-संगीत के प्रति गहरी रुचि, अनुराग और अभिरुचि विकसित करना ही इस भव्य आयोजन का मूल संकल्प है।

मिथिला की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने की अनूठी पहल: आम्रपाली कला केंद्र में महाकवि विद्यापति के गीतों पर चार दिवसीय विशेष कार्यशाला का भव्य आयोजन मिथिला की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने की अनूठी पहल: आम्रपाली कला केंद्र में महाकवि विद्यापति के गीतों पर चार दिवसीय विशेष कार्यशाला का भव्य आयोजन Reviewed by PSA Live News on 9:55:00 pm Rating: 5

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