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खाड़ी देश में नौकरी का सपना बना भयानक दुस्वप्न: रांची की बेटी को यूएई में बनाया बंधक, पासपोर्ट छीनकर कराई जा रही जबरन गुलामी

छोटा घाघरा की 37 वर्षीय मोनिका कच्छप ऑनलाइन ठगों के जाल में फंसी; 12,600 दिरहम का फर्जी कर्ज लादकर दी जा रही जेल भेजने की धमकी, मां ने एयरपोर्ट थाने में दर्ज कराई प्राथमिकी


विशेष विस्तृत रिपोर्ट | रांची दस्तक ब्यूरो
रांची। राजधानी रांची के एयरपोर्ट थाना क्षेत्र अंतर्गत छोटा घाघरा इलाके से मानव तस्करी, ठगी और विदेश में भारतीय नागरिक को बंधक बनाकर जबरन श्रम कराने का एक अत्यंत गंभीर और झकझोर देने वाला मामला प्रकाश में आया है। बेहतर भविष्य, परिवार की आर्थिक संबलता और सम्मानजनक रोजगार का सपना लेकर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) गई 37 वर्षीय मोनिका कच्छप वहां एक खौफनाक और संगठित गिरोह के जाल में उलझ गई हैं। पीड़िता के सभी मूल शैक्षणिक व पहचान संबंधी दस्तावेज और पासपोर्ट छीनकर उन्हें अजमान में बंधक जैसी स्थिति में रखा गया है, जहां उनसे जबरन घरेलू नौकरानी के रूप में चौका-बर्तन और साफ-सफाई का काम कराया जा रहा है। इस संबंध में पीड़िता की असहाय एवं वृद्ध मां रटना कच्छप ने रांची के एयरपोर्ट थाने में आरोपियों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई है। पीड़िता के परिजनों ने राज्य सरकार, मुख्यमंत्री कार्यालय तथा केंद्रीय विदेश मंत्रालय से गुहार लगाते हुए अविलंब कूटनीतिक हस्तक्षेप कर मोनिका की सुरक्षित भारत वापसी की मांग की है।

ऑनलाइन प्लेसमेंट के नाम पर बिछाया गया आकर्षक झांसा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़िता मोनिका कच्छप अपने परिवार की गिरती आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए काफी समय से एक उपयुक्त नौकरी की तलाश में थीं। इसी दौरान ऑनलाइन माध्यमों और सोशल मीडिया के जरिए उनका संपर्क संयुक्त अरब अमीरात के अजमान में स्थित 'AMD Trend Solution LLC' नामक एक कथित प्लेसमेंट एजेंसी से जुड़े प्रतिनिधियों से हुआ। खुद को एजेंसी की अधिकृत और वरिष्ठ प्रतिनिधि बताने वाली प्रियंका नामक महिला एजेंट ने मोनिका को अपनी बातों में उलझाया। प्रियंका ने मोनिका को यूएई में एक प्रतिष्ठित संस्थान में आकर्षक वेतन वाली नौकरी दिलाने के साथ-साथ वहां मुफ्त रहने और खाने की उत्तम व्यवस्था का प्रलोभन दिया। एजेंट के झांसे में आकर मोनिका और उनके परिवार ने एजेंसी द्वारा बताई गई प्रक्रिया पर विश्वास कर लिया तथा ऑनलाइन माध्यम से मांगी गई वीजा व प्रोसेसिंग फीस की राशि भी स्थानांतरित कर दी।

शारजाह हवाई अड्डे पर उतरते ही छीन ली गई नागरिक स्वतंत्रता

एजेंसी के दिशानिर्देशों के अनुसार, आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद मोनिका मई 2026 के प्रथम सप्ताह में दिल्ली से यूएई के लिए रवाना हुईं और 6 मई 2026 को शारजाह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरीं। लेकिन शारजाह की धरती पर कदम रखते ही उनके सपनों का महल ढह गया। शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि हवाई अड्डे से बाहर निकलते ही प्लेसमेंट एजेंसी की ओर से भेजे गए वाहन के चालक ने मोनिका का मूल भारतीय पासपोर्ट अपने कब्जे में ले लिया। जब मोनिका ने इसका कड़ा विरोध किया और अपना पासपोर्ट वापस मांगा, तो चालक ने यह कहकर टाल दिया कि अजमान स्थित मुख्य कार्यालय में कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही पासपोर्ट वापस दिया जाएगा।

अरबी भाषा की अनभिज्ञता का फायदा और बंद कमरे में ली गई जबरन सहमति

इसके बाद मोनिका को अजमान स्थित 'AMD Trend Solution LLC' के कार्यालय ले जाया गया। वहां उनकी मुलाकात रितेश और मोहम्मद मेराज अंसारी नामक व्यक्तियों से हुई। आरोप है कि वहां मोनिका को एक बंद कमरे में रखकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और कई ऐसे दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर तथा अंगूठे के निशान ले लिए गए, जो पूरी तरह अरबी भाषा में लिखे हुए थे। चुकी मोनिका अरबी भाषा पढ़ना, लिखना या समझना बिल्कुल नहीं जानती थीं, उन्होंने इसका विरोध भी किया; परंतु विदेश की अनजान धरती पर अकेले होने और दबाव के कारण उन्हें विवश होकर उन अज्ञात दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने पड़े।

12,600 दिरहम के काल्पनिक कर्ज का जाल और सबूत मिटाने की साजिश

बंधक बनाए जाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए आरोपियों ने सबसे पहले मोनिका का व्यक्तिगत मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिया। आरोप है कि मोबाइल हाथ में आते ही आरोपियों ने एजेंट प्रियंका के साथ हुई तमाम WhatsApp चैट, वॉयस मैसेज, कॉलिंग हिस्ट्री और पैसों के डिजिटल लेन-देन के तमाम साक्ष्यों को जबरन डिलीट कर दिया, ताकि भविष्य में कोई कानूनी सबूत न रहे। इसके कुछ ही दिनों बाद, आरोपियों ने एक वीडियो कॉल के जरिए मोनिका को सूचित किया कि उन पर 12,600 दिरहम (यूएई की मुद्रा, जो भारतीय रुपये में लगभग 2.85 लाख रुपये होती है) का भारी-भरकम कर्ज बकाया है। जब पीड़िता ने इस काल्पनिक कर्ज का विरोध किया, तो आरोपियों ने उन्हें यूएई के सख्त स्थानीय कानूनों का डर दिखाया और कर्ज न चुकाने या किसी से शिकायत करने की सूरत में जेल भिजवाने की सीधी धमकी दे डाली।

एक-एक घर में घरेलू गुलामी और अमानवीय शारीरिक-मानसिक प्रताड़ना

कथित कर्ज की वसूली और प्रताड़ना के नाम पर मोनिका को सबसे पहले आरोपी मोहम्मद मेराज अंसारी के निजी आवास पर ले जाया गया। प्राथमिकी के अनुसार, वहां लगभग एक महीने तक मोनिका को बंधक बनाकर रखा गया और उनसे सुबह से लेकर देर रात तक झाड़ू-पोछा, बर्तन मांजने और शौचालय साफ करने जैसा कड़ा शारीरिक श्रम कराया गया। इसके बाद उन्हें एक वस्तु की भांति अलग-अलग अरबी परिवारों के घरों में घरेलू काम (Domestic Worker) के लिए भेजा जाने लगा। भाषा न समझ पाने और नए माहौल के कारण मोनिका को हर कदम पर अपमान और अत्यधिक मानसिक-शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है।

बीमार मां की दुहाई भी पड़ी फीकी, भारत वापसी के नाम पर मांगी जा रही रंगदारी

इधर रांची में रह रहीं मोनिका की मां रटना कच्छप गंभीर रूप से बीमार चल रही हैं। जब मोनिका को अपनी मां के स्वास्थ्य के बारे में पता चला, तो उन्होंने रोते-बिलखते हुए एजेंटों और आरोपियों से अपनी मां की बीमारी का हवाला दिया और भारत लौटने की अनुमति मांगी। लेकिन आरोपियों का दिल नहीं पसीजा। आरोप है कि भारत वापस भेजने के नाम पर उनसे एक मोटी रकम (रंगदारी) की मांग की गई और स्पष्ट रूप से कह दिया गया कि बिना पैसे दिए उन्हें भारत लौटने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

पुलिस प्रशासन रेस, विदेश मंत्रालय और दिल्ली से मांगा गया सहयोग

मामले की गंभीरता और अंतर्राष्ट्रीय आयामों को देखते हुए रांची पुलिस तत्काल हरकत में आ गई है। रांची के एयरपोर्ट थाना प्रभारी पंकज ने बताया कि पीड़िता की मां के लिखित आवेदन के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।

  • प्राथमिकी में नामजद आरोपी: एजेंट प्रियंका, रितेश, मोहम्मद मेराज अंसारी और प्लेसमेंट एजेंसी 'AMD Trend Solution LLC' के अन्य जिम्मेदार पदाधिकारी।
  • संभावित आरोप: मानव तस्करी (Human Trafficking), आपराधिक धोखाधड़ी (Cheating), अवैध रूप से बंधक बनाना (Wrongful Confinement), जबरन श्रम (Forced Labor), आपराधिक धमकी और रंगदारी।
  • कूटनीतिक कार्रवाई: एयरपोर्ट थाना प्रभारी के अनुसार, पूरे मामले की विस्तृत जानकारी पत्र के माध्यम से केंद्रीय विदेश मंत्रालय (MEA) और नई दिल्ली स्थित संबंधित विभागों को भेज दी गई है। दिल्ली से आवश्यक कूटनीतिक सहयोग मांगा गया है ताकि यूएई में भारतीय दूतावास (अबू धाबी/दुबई) के जरिए स्थानीय पुलिस प्रशासन से संपर्क साधकर मोनिका को जल्द से जल्द रेस्क्यू कराया जा सके।

जांच के अहम पहलू और निष्पक्ष विवेचना की आवश्यकता

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दर्ज प्राथमिकी के आधार पर मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है। जांच के दौरान यह स्पष्ट किया जाएगा कि विदेश भेजने वाली संबंधित एजेंसी का रजिस्ट्रेशन वैध था या नहीं, किस वीजा (टूरिस्ट/विजिट या वर्क परमिट) पर पीड़िता को विदेश भेजा गया, पासपोर्ट किस परिस्थिति में लिया गया और यूएई में वास्तव में पीड़िता के साथ क्या-क्या घटा। पुलिस का कहना है कि मामले में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए आरोपित पक्ष के बयान और उनके पक्ष को भी जांच का हिस्सा बनाया जाएगा, ताकि फर्जीवाड़े के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हो सके।

विशेष सतर्कता: खाड़ी देशों में रोजगार हेतु विदेश मंत्रालय के दिशा-निर्देश

जागरूकता एवं सुरक्षा उपाय:

  1. केवल अधिकृत एजेंटों की सेवाएं लें: विदेश में नौकरी के लिए हमेशा विदेश मंत्रालय द्वारा पंजीकृत (eMigrate Registered) रिक्रूटिंग एजेंटों की ही मदद लें। किसी भी असत्यापित ऑनलाइन एजेंट के झांसे में न आएं।
  2. विजिट वीजा पर काम करना अपराध है: टूरिस्ट या विजिट वीजा पर विदेश जाकर काम करना गैर-कानूनी है। हमेशा वैध 'एंप्लॉयमेंट/वर्क वीजा' पर ही यात्रा करें।
  3. पासपोर्ट आपका निजी दस्तावेज है: अंतर्राष्ट्रीय नियमों के अनुसार कोई भी कंपनी, नियोक्ता या एजेंट आपका मूल पासपोर्ट जब्त करके नहीं रख सकता।
  4. अनुबंध पत्र की जांच: किसी भी दस्तावेज़ या एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करने से पहले उसकी भाषा और शर्तों को अच्छी तरह समझ लें।
  5. आपातकालीन हेल्पलाइन: यदि यूएई या किसी भी खाड़ी देश में कोई भारतीय नागरिक मुसीबत में फंसता है, तो वह तुरंत भारतीय दूतावास के प्रवासी भारतीय सहायता केंद्र (PBSK) या 'मदद' (MADAD) पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा सकता है।
खाड़ी देश में नौकरी का सपना बना भयानक दुस्वप्न: रांची की बेटी को यूएई में बनाया बंधक, पासपोर्ट छीनकर कराई जा रही जबरन गुलामी खाड़ी देश में नौकरी का सपना बना भयानक दुस्वप्न: रांची की बेटी को यूएई में बनाया बंधक, पासपोर्ट छीनकर कराई जा रही जबरन गुलामी Reviewed by PSA Live News on 5:16:00 pm Rating: 5

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