आस्था, परंपरा, संस्कृति और अधर्म पर धर्म की विजय का शाश्वत संदेश: संजय सर्राफ
विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत की सनातन संस्कृति में महानवमी एवं विजयादशमी का पर्व धार्मिक आस्था, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक गौरव का अनुपम प्रतीक है। शारदीय नवरात्र के नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना के बाद महानवमी और दशहरा पूरे देश में श्रद्धा, उल्लास एवं उत्साह के साथ मनाए जाते हैं। ये महापर्व हमें सत्य, धर्म, साहस और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को महानवमी मनाई जाती है। इस दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री अपने भक्तों को सुख, समृद्धि, ज्ञान और सिद्धियां प्रदान करती हैं। मंदिरों एवं घरों में दुर्गा सप्तशती का पाठ, मंत्रोच्चार, हवन और विशेष पूजन आयोजित किए जाते हैं।
महानवमी पर कन्या पूजन का विशेष महत्व है। नौ कन्याओं को मां दुर्गा के नौ स्वरूपों का प्रतीक मानकर उनका पूजन किया जाता है। उन्हें भोजन कराकर उपहार एवं दक्षिणा दी जाती है। यह परंपरा नारी शक्ति के सम्मान, बालिकाओं के प्रति आदर और समाज में समानता की भावना को सुदृढ़ करती है। अनेक श्रद्धालु इस दिन नवरात्र व्रत का पारण भी करते हैं। आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजयादशमी अथवा दशहरा मनाया जाता है। रामायण की मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम ने इसी दिन रावण का वध कर अधर्म पर धर्म की विजय स्थापित की थी। इसी की स्मृति में देशभर में रामलीला का मंचन और रावण, कुंभकर्ण तथा मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है।विजयादशमी का संबंध मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय से भी है। मान्यता है कि मां दुर्गा ने नौ दिनों तक युद्ध करने के बाद दसवें दिन महिषासुर का संहार किया। इस प्रकार यह पर्व शक्ति, साहस, न्याय और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का संदेश देता है।दशहरे के दिन श्रद्धालु भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमानजी और मां दुर्गा की पूजा करते हैं। अनेक स्थानों पर शस्त्र पूजन, वाहन पूजन तथा कार्य में प्रयुक्त उपकरणों की पूजा की जाती है। शमी वृक्ष की पूजा भी शुभ मानी जाती है। दुर्गा पूजा के समापन पर मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन श्रद्धा और भावुकता के साथ किया जाता है। लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं देकर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।महानवमी एवं विजयादशमी केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और सामाजिक सद्भाव के महापर्व हैं। रावण दहन हमें अपने भीतर के अहंकार, क्रोध, लोभ, ईर्ष्या और अन्य बुराइयों को समाप्त करने की प्रेरणा देता है। मां दुर्गा की आराधना नारी सम्मान तथा अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का संदेश देती है। आज आवश्यकता है कि हम इन पर्वों के आदर्शों को अपने आचरण में उतारें तथा समाज में प्रेम, एकता, भाईचारे और नैतिक मूल्यों को मजबूत करें। सत्य की विजय, असत्य का अंत और मानवता की प्रतिष्ठा ही महानवमी एवं विजयादशमी का वास्तविक संदेश है।
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8:03:00 pm
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