पत्रकारों की सुरक्षा और पहचान के लिए ऐतिहासिक पहल: जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया ने प्रधानमंत्री को भेजा सुझाव पत्र, यूनिक आईडी की मांग
प्रयागराज। देश भर में कार्यरत पत्रकारों के अधिकारों, सुरक्षा और उनकी स्पष्ट पहचान को लेकर जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया (JCI) ने एक ऐतिहासिक और दूरगामी कदम उठाया है। प्रयागराज में आयोजित संगठन की वर्चुअल मासिक बैठक में पत्रकारों से जुड़े विभिन्न गंभीर मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई। इस बैठक के दौरान देश भर के पत्रकारों की प्रामाणिक पहचान सुनिश्चित करने और उन्हें कार्यक्षेत्र में सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से एक राष्ट्रीय स्तर की 'यूनिक आईडी' व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार के समक्ष रखा गया।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनुराग सक्सेना ने जानकारी दी कि संगठन की ओर से भारत के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक विस्तृत एवं औपचारिक सुझाव पत्र प्रेषित किया गया है। इस पत्र में देश भर में निष्पक्ष और जोखिम भरे माहौल में काम करने वाले पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और पहचान से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को रेखांकित किया गया है।
सुझाव पत्र में विशेष रूप से यह मांग की गई है कि जिस प्रकार मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) डॉक्टरों और अधिवक्ताओं का एक आधिकारिक व पंजीकृत डेटाबेस रखती हैं, ठीक उसी तर्ज पर प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) या किसी अन्य उपयुक्त व पारदर्शी नोडल व्यवस्था/पोर्टल के माध्यम से देश भर के सभी पत्रकारों का संपूर्ण ब्योरा दर्ज किया जाना चाहिए। इसके माध्यम से प्रत्येक प्रामाणिक पत्रकार को एक विशिष्ट यूनिक आईडी (Unique ID) नंबर आवंटित किया जाए।
राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनुराग सक्सेना ने इस व्यवस्था की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि धरना-प्रदर्शन, राजनीतिक रैलियों, कानून-व्यवस्था से जुड़ी संवेदनशील स्थितियों या आपदा कवरेज के दौरान पत्रकारों को अक्सर अपनी पहचान साबित करने में भारी प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। कई बार स्थानीय स्तर पर पहचान पत्र न होने या संदेह के कारण पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार और सुरक्षा से जुड़ी घटनाएं घटित होती हैं। यदि केंद्रीय स्तर पर एक आधिकारिक यूनिक आईडी उपलब्ध होगी, तो फील्ड में काम कर रहे पत्रकारों को तत्काल पहचान मिलेगी और पुलिस प्रशासन तथा स्थानीय अधिकारियों से बेहतर समन्वय व सुरक्षा सुविधा प्राप्त हो सकेगी।
इस वर्चुअल बैठक में देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में वरिष्ठ पत्रकारों और संगठन के पदाधिकारियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और इस पहल का एक सुर में पुरजोर समर्थन किया।
बैठक में शामिल प्रमुख प्रतिनिधि एवं वक्ता:
- उत्तर प्रदेश: बी. त्रिपाठी, संजय सिंह
- राजस्थान: राजू चारण
- मध्य प्रदेश: दिनेश दसौंधी, हरिशंकर पाराशर, मईन अख्तर
- बिहार: पिंटू कुमार
- चंडीगढ़: आर. एल. शर्मा, नीरज श्रीवास्तव
बैठक के दौरान अपने विचार रखते हुए उपस्थित वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में देश में कार्यरत कुल पत्रकारों का कोई एकीकृत और सटीक सरकारी आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। यूनिक आईडी व्यवस्था और एक केंद्रीकृत डेटाबेस पोर्टल तैयार होने से सरकार को देश भर के पत्रकारों की वास्तविक संख्या और उनकी जमीनी समस्याओं का सटीक आकलन करने में मदद मिलेगी। इससे सरकार के लिए पत्रकारों के कल्याणार्थ विभिन्न योजनाएं—जैसे कि स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना सुरक्षा, पेंशन और आवास सुविधाएं—तैयार करना और उन्हें सही लाभार्थियों तक पहुंचाना बेहद आसान और पारदर्शी हो जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान मंच का कुशल संचालन करते हुए जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. आर.सी. श्रीवास्तव ने उपस्थित सभी सदस्यों और पत्रकारों से संगठन के प्रति जिम्मेदारी, निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक बड़ा दायित्व है। पत्रकारों से जुड़े सभी प्रासंगिक और ज्वलंत मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर उठाना संगठन की सर्वोच्च प्राथमिकता है, और इसके लिए सभी पदाधिकारियों को उन्हें सौंपी गई जिम्मेदारियों का पूरी गंभीरता के साथ निर्वहन करना होगा।
बैठक के समापन सत्र में राष्ट्रीय संयोजक डॉ. आर.सी. श्रीवास्तव ने देश के कोने-कोने से वर्चुअल माध्यम से जुड़े सभी पदाधिकारियों, वरिष्ठ पत्रकारों और राज्य प्रतिनिधियों के प्रति उनके बहुमूल्य सुझावों और बड़ी संख्या में भागीदारी के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया।
Reviewed by PSA Live News
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11:09:00 pm
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