दानापुर रेलखंड पर खौफनाक खेल: फर्जी RPF जवान बनकर यात्रियों से अवैध वसूली और हत्या का शातिर राजफाश, राजस्थान से सहयोगी गिरफ्तार
पटना। बिहार के दानापुर रेलखंड पर यात्रियों की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली खाकी का खौफ दिखाकर लूटपाट और वसूली करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। खुद को रेलवे सुरक्षा बल (RPF) या सुरक्षाकर्मी बताकर यात्रियों को डराने-धमकाने और उनके परिजनों से ऑनलाइन पैसों की ठगी करने वाले इस नेटवर्क के तार अब दूर-दूर तक फैलते नजर आ रहे हैं। मामले में पुलिस ने मुख्य सरगना के एक अहम सहयोगी को राजस्थान से दबोच लिया है, जिसके बाद कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।
कैसे शुरू हुआ ठगी और आतंक का खेल?
यह पूरा मामला तब खुलकर सामने आया जब अपराधियों ने अपनी हदें पार करते हुए एक मुसाफिर की जिंदगी को ही दांव पर लगा दिया। पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि मुख्य आरोपी रोहित तिवारी और उसका गिरोह लंबे समय से दानापुर और आरा के बीच चलने वाली ट्रेनों में यात्रियों को अपना निशाना बना रहा था।
आरोपी खुद को कभी आरपीएफ तो कभी एसटीएफ (STF) का अधिकारी बताकर ट्रेन में सफर कर रहे आम यात्रियों को अवैध रूप से पकड़ते थे। मामूली बातों या बिना टिकट का डर दिखाकर उन पर भारी-भरकम जुर्माना वसूलने का दबाव बनाया जाता था। जब यात्री डर जाते थे, तो उनके मोबाइल से उनके परिजनों को फोन कर जेल भेजने की धमकी दी जाती थी और PhonePe या अन्य UPI खातों में ऑनलाइन फिरौती की रकम मंगाई जाती थी।
हत्या और सनसनीखेज वारदात: जब पैसे के लिए पार की गईं हदें
इस गिरोह की क्रूरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इन्होंने वसूली के चक्कर में एक बेकसूर युवक की जान लेने से भी गुरेज नहीं किया।
- क्या था मामला: हैदराबाद में काम करने वाला और वैशाली जिले के जंदाहा थाना क्षेत्र के चांदसराय का रहने वाला नितिन कुमार घर बनवाने के लिए पैसे लेकर ट्रेन से दानापुर लौट रहा था।
- फर्जी आरपीएफ का शिकंजा: रास्ते में बक्सर के पास इसी फर्जी गिरोह (रोहित तिवारी एंड कंपनी) ने नितिन को ट्रेन में दबोच लिया। खुद को आरपीएफकर्मी बताकर उस पर सिगरेट पीने या अन्य आरोप मढ़ दिए गए।
- फिरौती और धमकी: आरोपियों ने नितिन के फोन से ही उसके घर पर फोन कर 10,000 रुपये की मांग की। परिजनों ने डरकर बताए गए PhonePe नंबर पर पहले 5,000 रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद शातिरों की भूख और बढ़ गई और उन्होंने 20,000 रुपये और मांगे। परिजनों ने पुलिस की सलाह पर उसी UPI खाते में 12,000 रुपये और भेज दिए।
- चलती ट्रेन से धक्का: इसके बावजूद जब दरिदों का मन नहीं भरा, तो उन्होंने विरोध करने पर नितिन कुमार को चलती ट्रेन से नीचे धक्का दे दिया। गंभीर चोट लगने से उसकी दर्दनाक मौत हो गई और उसका शव आरा रेलवे स्टेशन व जगजीवन हॉल्ट के बीच दो टुकड़ों में बरामद हुआ।
राजस्थान तक फैले तार: ऐसे शिकंजे में आया सहयोगी
इस सनसनीखेज हत्याकांड और वसूली रैकेट की जांच के लिए रेल एसपी के नेतृत्व में एक विशेष टीम (SIT) का गठन किया गया था। तकनीकी सर्विलांस और ह्यूमन इंटेलिजेंस की मदद से जब पुलिस ने पैसों के लेन-देन (UPI/PhonePe ट्रांजैक्शन) की कुंडली खंगाली, तो एक बड़ा सुराग हाथ लगा।
जांच में पता चला कि यात्रियों के परिजनों से वसूली गई रकम जिस यूपीआई आईडी पर भेजी जा रही थी, उसका इस्तेमाल राजस्थान में हो रहा था। इसी सुराग के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी के सहयोगी रविरंजन सिंह को राजस्थान से धर दबोचा।
- रविरंजन की भूमिका: पूछताछ में सामने आया कि रविरंजन के खाते में ही ठगी के सारे पैसे आते थे। रोहित तिवारी के कहने पर वह इन पैसों को तुरंत दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर कर देता था। पुलिस ने वह मोबाइल फोन भी बरामद कर लिया है जिसका इस्तेमाल इस अवैध उगाही में किया जा रहा था।
पुलिस का शिकंजा और आगे की कार्रवाई
रेल पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मुख्य आरोपी रोहित तिवारी को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, जिसने पूछताछ में चलती ट्रेन से युवक को धक्का देकर मारने की बात स्वीकार की है। वहीं, उसके नेटवर्क और पैसों की हेराफेरी में शामिल अन्य सहयोगियों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है।
रेल प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इस तरह के संगीन अपराध को अंजाम देने वाले अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा और इस पूरे मामले में स्पीडी ट्रायल (Speedy Trial) चलाकर दोषियों को जल्द से जल्द कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर ट्रेनों में सफर करने वाले आम यात्रियों की सुरक्षा और फर्जी वर्दीधारियों के आतंक पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। बहरहाल, पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई से उम्मीद है कि इस सिंडिकेट के बाकी बचे चेहरों से भी जल्द पर्दा उठेगा।
Reviewed by PSA Live News
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9:30:00 pm
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