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तेज़ी से बदलते दौर में इंसान के सामने सबसे बड़ी चुनौती है— खुद के भीतर संतुलन बनाए रखना।


 लेखिका: मोनिका जौहर।

हरियाणा /हिसार (राजेश सलूजा) । तकनीक, व्यस्त दिनचर्या और बढ़ती अपेक्षाएँ हमें आगे तो धकेल रही हैं, पर मन को थका भी रही हैं। ऐसे समय में उम्मीद और सकारात्मक सोच हमारे लिए एक मजबूत आधार बन सकती है।

हममें से हर व्यक्ति किसी न किसी संघर्ष से गुजर रहा है—किसी को भविष्य की चिंता है, किसी को वर्तमान की जिम्मेदारियाँ दबा रही हैं। लेकिन सच यह है कि हर कठिनाई के पीछे एक छिपा हुआ अवसर होता है। बस हमें उसे पहचानने की जरूरत होती है।

जीवन के सफर में कई बार रास्ते धुँधले लगते हैं। लेकिन जब इंसान अपने भीतर झाँकता है, तो उसे एहसास होता है कि उसके अंदर ही वह ताकत मौजूद है जो किसी भी अंधेरे को रोशनी में बदल सकती है।

सकारात्मक सोच वही रोशनी है।

आज का समय हमें यह सीख देता है कि—

छोटी खुशियाँ भी बड़ी राहत लाती हैं,

खुद से की गई छोटी बात भी बड़ा बदलाव ला सकती है,

और एक शांत मन किसी भी परिस्थिति को सहज बना सकता है।

हम जितना अपने मन को शांत रखते हैं, उतना ही जीवन हमें नए अवसर दिखाता है।

हर नया दिन यह संदेश देता है कि “उम्मीद कभी खत्म नहीं होती, बस नज़रिये को बदलने की ज़रूरत होती है।”

तो आइए, आज अपने मन से एक वादा करें—

“मैं परिस्थिति से नहीं, अपनी सोच से दुनिया को देखूँगी। और हर दिन को नए अवसर के रूप में स्वीकार करूंगी।"

– मोनिका जौहर

तेज़ी से बदलते दौर में इंसान के सामने सबसे बड़ी चुनौती है— खुद के भीतर संतुलन बनाए रखना। तेज़ी से बदलते दौर में इंसान के सामने सबसे बड़ी चुनौती है—  खुद के भीतर संतुलन बनाए रखना। Reviewed by PSA Live News on 5:58:00 pm Rating: 5

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