आत्म अनुशासन ही सच्चा गणतंत्र है: ब्रह्माकुमारी केन्द्र में गणतंत्र दिवस पर आत्मिक स्वतंत्रता का संदेश
राँची। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, चौधरी बागान (हरमू रोड) स्थित सेवा केन्द्र में 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर सामूहिक रूप से ध्वजारोहण कर राष्ट्रभक्ति के साथ आत्मिक चेतना का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता एवं इनर व्हील क्लब की सदस्याएं उपस्थित रहीं।
ध्वजारोहण के बाद इनर व्हील क्लब की अध्यक्ष नीलम ललित ने अपने उद्बोधन में कहा कि मनुष्य मूल रूप से स्वतंत्र, पवित्र और शक्तिशाली आत्मा है, लेकिन माया के प्रभाव में आकर अपने वास्तविक स्वरूप को भूल गया है।
उन्होंने कहा—
“जिस दिन हम अपने स्वधर्म — शांति, आनंद, प्रेम, दया और करुणा — को पहचानकर विकृतियों की अधीनता समाप्त कर देंगे, वही दिन सच्चा गणतंत्र दिवस होगा। तभी हमारा देश सम्पूर्ण विश्व में वास्तविक सम्मान पाएगा।”
पूर्व एजीएम, एसबीआई सुनील गुप्ता ने कहा कि सच्ची स्वतंत्रता केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि मानसिक और आत्मिक भी होनी चाहिए।
“जिस स्वतंत्रता में मनुष्य को कष्ट, अशांति और दुख न हो, वही सम्पूर्ण स्वतंत्रता है।”
पूर्व रीजनल मैनेजर, एचडीएफसी बैंक सुरेन्द्र प्रसाद ने कहा कि देश को केवल ‘गणतंत्र’ नहीं बल्कि ‘गुणतंत्र’ भी अपनाना चाहिए।
उन्होंने कहा—
“अगर जन-गण-मन देवी गुणों को अपनाए, तो देश का चरित्र स्वतः ऊँचा हो जाएगा।”
कार्यक्रम में उपस्थित चिकित्सक डॉ. सुषमा ने कहा कि भारत विश्व का सबसे विशाल लोकतांत्रिक राष्ट्र है, जहाँ 140 करोड़ जन-गण-मन एक भावनात्मक सूत्र में बंधे हैं।
उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति है सर्वधर्म समभाव।
इनर व्हील क्लब की पूर्व अध्यक्ष माया वर्मा ने अपने विचार रखते हुए कहा—
“जैसे संविधान देश की दिशा तय करता है, वैसे ही आत्म-संविधान व्यक्ति के जीवन की दिशा तय करता है। जो अपने मन, संस्कार और इच्छाओं पर संयम नहीं रखता, वह परिस्थितियों का गुलाम बन जाता है।”
राँची विश्वविद्यालय की राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. रानी प्रगति ने कहा कि आत्म अनुशासन ही गणतंत्र की आत्मा है।
उन्होंने कहा—
“स्वतंत्रता का अर्थ मनमानी नहीं, बल्कि आत्म संयम है। जब आत्मा स्वयं के लिए नियम बनाती है, तब बाहरी दबाव उसे विचलित नहीं कर सकता।”
कार्यक्रम का समापन सामूहिक राष्ट्रगान एवं शांति संदेश के साथ हुआ। उपस्थित सभी वक्ताओं ने युवाओं से आह्वान किया कि वे आत्मिक मूल्यों को अपनाकर राष्ट्र को सशक्त बनाने में योगदान दें।
Reviewed by PSA Live News
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5:06:00 pm
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