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19 मार्च से प्रारंभ होगा चैत्र नवरात्रि पर्व, शक्ति उपासना और नवसंवत्सर का पावन आरंभ

आस्था, श्रद्धा, साधना और नवसृजन का प्रतीक है चैत्र नवरात्रि: संजय सर्राफ


रांची/झारखंड: 
चैत्र मास के शुभारंभ के साथ ही पूरे देश में भक्ति और श्रद्धा का महापर्व चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से प्रारंभ होकर 27 मार्च तक धूमधाम से मनाया जाएगा। इस पावन अवसर पर श्रद्धालु नौ दिनों तक माता के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना कर आध्यात्मिक साधना में लीन रहेंगे।

श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट एवं विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि भारतीय संस्कृति में नवरात्रि केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और सकारात्मक ऊर्जा के संचार का महान अवसर है। उन्होंने कहा कि यह पर्व शक्ति उपासना, आस्था, श्रद्धा और नवसृजन का प्रतीक है, जो समाज को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रूप से सशक्त बनाता है।

उन्होंने बताया कि नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु माता के नौ स्वरूपों—शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री—की विधिपूर्वक पूजा करते हैं। शास्त्रों के अनुसार प्रत्येक दिन देवी के एक स्वरूप की आराधना से भक्तों को विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा और आशीर्वाद प्राप्त होता है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब पृथ्वी पर असुरों का अत्याचार बढ़ गया था, तब देवी दुर्गा ने अवतार लेकर महिषासुर का संहार किया। इसी विजय के प्रतीक रूप में नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत का संदेश देता है।

संजय सर्राफ ने यह भी बताया कि चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि इसी दिन से हिंदू नववर्ष अर्थात नवसंवत्सर का प्रारंभ माना जाता है। मान्यता है कि सृष्टि की रचना भी इसी दिन से प्रारंभ हुई थी। साथ ही, भगवान श्रीराम द्वारा लंका विजय से पूर्व देवी की उपासना करने की कथा भी इस पर्व के महत्व को और बढ़ाती है।

नवरात्रि के दौरान मंदिरों और घरों में कलश स्थापना, अखंड ज्योति, दुर्गा सप्तशती का पाठ, भजन-कीर्तन और कन्या पूजन जैसे धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपवास रखकर माता की आराधना करते हैं और अपने जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना करते हैं।

उन्होंने कहा कि नवरात्रि के ये नौ दिन साधना, संयम और आत्मिक उन्नति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। सच्चे मन से की गई माता की उपासना से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

अंत में संजय सर्राफ ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की कि वे इस पावन पर्व को श्रद्धा और अनुशासन के साथ मनाएं तथा समाज में एकता, सद्भाव और सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने में अपनी भूमिका निभाएं।

चैत्र नवरात्रि न केवल देवी शक्ति की उपासना का पर्व है, बल्कि यह आध्यात्मिक जागरण, नवचेतना और भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा को संजोने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी है। यह पर्व हमें सिखाता है कि सत्य, धर्म और सकारात्मकता के मार्ग पर चलकर ही जीवन में वास्तविक सफलता और शांति प्राप्त की जा सकती है।

19 मार्च से प्रारंभ होगा चैत्र नवरात्रि पर्व, शक्ति उपासना और नवसंवत्सर का पावन आरंभ 19 मार्च से प्रारंभ होगा चैत्र नवरात्रि पर्व, शक्ति उपासना और नवसंवत्सर का पावन आरंभ Reviewed by PSA Live News on 8:31:00 am Rating: 5

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