पुष्कर में विप्र फाउंडेशन का 18वां राष्ट्रीय अधिवेशन संपन्न, ‘ब्राह्मण सदृशता’ शोध अभियान की शुरुआत, EWS आरक्षण 14% करने की उठी मांग
रामगढ़/पुष्कर: राजस्थान के तीर्थराज पुष्कर में आयोजित विप्र फाउंडेशन के 18वें राष्ट्रीय परिषद अधिवेशन में देश-विदेश से हजारों ब्राह्मण प्रतिनिधियों की भागीदारी के बीच समाज की वैचारिक दिशा, संगठनात्मक मजबूती और भविष्य की रणनीति पर व्यापक मंथन किया गया। अधिवेशन में ब्राह्मण समाज की पहचान को नए दृष्टिकोण से परिभाषित करने के उद्देश्य से ‘ब्राह्मण सदृशता पहचान रूपरेखा’ नामक राष्ट्रीय शोध अभियान प्रारंभ करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया।
इस शोध अभियान का उद्देश्य ब्राह्मण समाज की पहचान को केवल जन्म आधारित अवधारणा तक सीमित न रखते हुए उसे ज्ञान, नैतिकता, तप, त्याग और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की परंपरा के रूप में स्थापित करना है। इस पहल को समाज के वैचारिक पुनर्निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नई पीढ़ी को जड़ों से जोड़ने का प्रयास
संस्था के संस्थापक सुशील ओझा ने अपने संबोधन में कहा कि यह शोध अभियान नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ ब्राह्मण समाज के ऐतिहासिक योगदान को समझने के लिए एक संतुलित और तार्किक आधार तैयार करेगा। उन्होंने कहा कि समय के साथ समाज में आई वैचारिक अस्पष्टताओं को दूर कर ब्राह्मण समाज की भूमिका को स्पष्ट करना अत्यंत आवश्यक है।
EWS आरक्षण 14% करने की मांग
अधिवेशन में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए आरक्षण को बढ़ाकर 14 प्रतिशत करने की जोरदार मांग उठाई गई। सुशील ओझा ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में कई जटिल शर्तों के कारण वास्तविक जरूरतमंदों तक आरक्षण का लाभ नहीं पहुंच पा रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस दिशा में ठोस पहल करने की अपील की।
इसके साथ ही विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से संबंधित प्रस्तावित विधेयक का विरोध करते हुए इसे वापस लेने की भी मांग की गई।
ओझा ने यह भी बताया कि शोध अभियान के पूर्ण होने के बाद उसके निष्कर्षों को देश के शीर्ष नेतृत्व—प्रधानमंत्री, कांग्रेस नेता सोनिया गांधी तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत—के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
401 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन
अधिवेशन के दौरान वर्ष 2026-28 के लिए 401 सदस्यों की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन किया गया। मुंबई के सत्यनारायण श्रीमाली को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया, जबकि झारखंड से जय प्रकाश शर्मा को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई।
इसके अलावा झारखंड से पुरुषोत्तम शर्मा को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं प्रदीप कुमार शर्मा को महामंत्री के रूप में महत्वपूर्ण दायित्व दिए गए।
संगठन विस्तार और मजबूती पर जोर
संगठन महामंत्री डॉ. सुनील शर्मा ने संगठनात्मक ढांचे को और अधिक मजबूत बनाने के लिए कोर टीम के गठन पर बल दिया। उन्होंने कहा कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए समर्पित और सक्रिय टीम का होना आवश्यक है। अधिवेशन में देशभर के 40 क्षेत्रीय अध्यक्षों के नामों पर भी सहमति बनी।
शिक्षा, संस्कार और स्वावलंबन को प्राथमिकता
अधिवेशन में संस्था के 20 प्रमुख उद्देश्यों की रूपरेखा प्रस्तुत की गई, जिसमें शिक्षा, संस्कार, सामाजिक समरसता और आर्थिक स्वावलंबन को प्रमुख आधार बनाया गया। वक्ताओं ने कहा कि समाज के समग्र विकास के लिए इन मूल्यों को जमीनी स्तर पर लागू करना जरूरी है।
प्रमुख प्रकल्पों को मिला व्यापक समर्थन
अधिवेशन में ‘श्री परशुराम ज्ञानपीठ’ एवं प्रस्तावित स्टैच्यू (प्रतिमा) प्रकल्प को भी सर्वसम्मति से समर्थन मिला। उपस्थित प्रतिनिधियों ने खड़े होकर करतल ध्वनि के साथ इन योजनाओं का स्वागत किया।
इस संबंध में जानकारी देते हुए झारखंड प्रदेश अध्यक्ष जय प्रकाश शर्मा और महामंत्री प्रदीप कुमार शर्मा ने कहा कि अधिवेशन में लिए गए सभी निर्णय समाज को नई दिशा देने के साथ-साथ संगठन को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सशक्त बनाएंगे।
Reviewed by PSA Live News
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7:06:00 am
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