अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर ब्रह्माकुमारी केंद्र में ‘वंदे मातरम्–स्वर्णिम भारत’ कार्यक्रम, नारी शक्ति के सम्मान और आध्यात्मिक जागरण का संदेश
रांची: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रांची के हरमू रोड स्थित चौधरी बगान में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के स्थानीय सेवा केंद्र में “वंदे मातरम्–स्वर्णिम भारत” विषय पर एक प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया गया, जिसमें समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य लोगों ने भाग लेकर नारी सम्मान, आध्यात्मिक जागरण और स्वर्णिम भारत के निर्माण में महिलाओं की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए रांची के रोटेरियन गवर्नर मुकेश तनेजा ने कहा कि जिस प्रकार कोई भी पक्षी एक पंख से उड़ान नहीं भर सकता, उसी प्रकार कोई भी समाज या राष्ट्र स्त्री और पुरुष दोनों के समान सहयोग के बिना आगे नहीं बढ़ सकता। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में स्त्री और पुरुष के पारस्परिक पूरक स्वरूप को अत्यंत सुंदर ढंग से दर्शाया गया है। भगवान विष्णु और महालक्ष्मी की संयुक्त शक्ति के माध्यम से यह संदेश मिलता है कि समाज की प्रगति के लिए नारी और पुरुष दोनों की सहभागिता अनिवार्य है।
रांची एयरपोर्ट की मानव संसाधन विकास प्रमुख बनानी नंद ने अपने संबोधन में कहा कि लगभग 2500 वर्ष पूर्व द्वापर युग से नारी के शोषण के अनेक रूप सामने आए, जिनकी गूंज आज भी समाज में सुनाई देती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा से वंचित कर और सामाजिक बंधनों में जकड़कर महिलाओं को उनकी वास्तविक क्षमता से दूर कर दिया गया। उन्होंने कहा कि जब तक नारी को केवल शरीर नहीं बल्कि एक हीरे के समान चमकदार आत्मा के रूप में नहीं देखा जाएगा और उसे समानता का सम्मान नहीं मिलेगा, तब तक समाज का पूर्ण विकास संभव नहीं है।
चार्टर्ड एकाउंटेंट संस्थान की पूर्व अध्यक्ष एवं सीओए श्रद्धा बागला ने कहा कि भारतीय संस्कृति में सदियों से नारी को देवी स्वरूप माना गया है। उन्होंने शास्त्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता:” अर्थात जहां नारी का सम्मान होता है, वहीं देवताओं का निवास होता है। उन्होंने कहा कि मातृशक्ति का सम्मान ही हिंदुस्तान की संस्कृति की पहचान है।
रांची नगर निगम के वार्ड संख्या 20 के नव निर्वाचित पार्षद सुनील कुमार यादव ने कहा कि नारी का सम्मान हमारी सभ्यता, संस्कृति और परंपरा की मूल पहचान है। उन्होंने कहा कि परिवार और समाज में मूल्यों की स्थापना और नई पीढ़ी को संस्कारित करने में महिलाओं की भूमिका अतुलनीय रही है। कोई भी राष्ट्र तब तक प्रगति के मार्ग पर आगे नहीं बढ़ सकता, जब तक वहां की महिलाएं सशक्त और शिक्षित नहीं हों।
यूनियन बैंक की डिप्टी मैनेजर रवीना सीमा मिंज ने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्था नवसृजन के महान कार्य में लगी हुई है। जब नारी शक्ति के रूप में जागृत होती है, तब ब्रह्माकुमारी जैसे संस्थानों की अवधारणा साकार रूप लेती है। उन्होंने कहा कि इस संस्था में शीर्ष से लेकर विभिन्न जिम्मेदारियों तक महिलाओं का नेतृत्व देखने को मिलता है। आज विश्वभर में लगभग 50 हजार ब्रह्माकुमारी बहनें त्याग, सेवा, समर्पण और आत्मविश्वास के साथ विश्व कल्याण के कार्य में जुटी हुई हैं।
प्रबंधन की प्रोफेसर भावना तनेजा ने कहा कि महान लक्ष्य को लेकर नारी परमात्मा की शिक्षाओं और दिव्य प्रेरणाओं को आत्मसात करते हुए निरंतर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक शक्ति ही महिलाओं को आत्मविश्वास और जीवन में संतुलन प्रदान करती है।
रांची नगर निगम के वार्ड संख्या 40 की पार्षद सुनीता रानी ने कहा कि स्वर्णिम भारत के निर्माण में ब्रह्माकुमारियों का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान को पुनः विश्व गुरु बनाने के लिए मातृशक्ति को आगे लाना होगा, क्योंकि माता ही संस्कारों की प्रथम गुरु होती है।
वार्ड संख्या 10 की नव निर्वाचित पार्षद संगीता देवी ने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा किए जा रहे इस महान कार्य में समाज के प्रत्येक व्यक्ति को सहयोग करना चाहिए। तभी हिंदुस्तान पुनः विश्व गुरु की प्रतिष्ठा प्राप्त कर सकेगा और अपने खोए हुए गौरव को पुनः हासिल कर पाएगा।
पूर्व पार्षद अर्जुन यादव ने कहा कि आधुनिक समय में महिलाओं ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन आध्यात्मिकता से दूरी बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब समाज अनेक समस्याओं से घिरा हुआ है, तब जीवन में आध्यात्मिक मूल्यों का होना अत्यंत आवश्यक है। आध्यात्मिकता से जीवन में सहनशीलता, नम्रता और मधुरता जैसे दैवीय गुण विकसित होते हैं।
ब्रह्माकुमारी केंद्र की पूर्व संचालिका निर्मला बहन ने कहा कि वास्तविक महिला सशक्तिकरण केवल आधुनिकता से नहीं बल्कि अध्यात्म से संभव है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को पाश्चात्य संस्कृति का अंधानुकरण करने के बजाय अपने जीवन में भौतिकता और आध्यात्मिकता के बीच संतुलन बनाकर चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता का अर्थ स्वच्छंदता नहीं होता। प्राचीन काल में जब महिलाएं आध्यात्मिक रूप से सशक्त थीं, तब समाज में उनका अत्यधिक सम्मान किया जाता था।
कार्यक्रम के दौरान अनेक गणमान्य लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। समाजसेवी मालती कुमार सहित कई प्रतिष्ठित महिलाएं कार्यक्रम में मौजूद रहीं। सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों ने आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किया, जिसे उपस्थित लोगों ने सराहा। इसके साथ ही प्रतिभागियों को गाइडेड मेडिटेशन का अभ्यास भी कराया गया।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने बताया कि चौधरी बगान, हरमू रोड स्थित ब्रह्माकुमारी केंद्र में प्रतिदिन निःशुल्क ज्ञान-योग और ध्यान साधना से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें समाज के सभी वर्गों के लोग भाग लेकर मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त कर सकते हैं।
Reviewed by PSA Live News
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8:30:00 pm
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