रांची: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के स्थानीय सेवा केन्द्र, चौधरी बगान (हरमू रोड) में आयोजित एक आध्यात्मिक विचार गोष्ठी में केन्द्र संचालिका ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने कहा कि वर्तमान समय में अपने मन और भावनाओं पर नियंत्रण रखना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। तेज़ रफ्तार और तनावपूर्ण जीवन के बीच व्यक्ति अक्सर बाहरी परिस्थितियों के प्रभाव में आकर अपनी मानसिक शांति खो देता है, जबकि सच्ची शक्ति इसी में है कि हम किसी भी परिस्थिति में शांत और स्थिर बने रहें।
उन्होंने कहा कि आज का मनुष्य ऐसी दुनिया में रह रहा है जहां उसकी भावनाएं अक्सर दूसरों के व्यवहार और परिस्थितियों के अनुसार बदल जाती हैं। कई बार लोग कहते या सुनते हैं कि “मुझे गुस्सा मत दिलाओ”, मानो हमारी भावनात्मक स्थिति पूरी तरह से दूसरों के नियंत्रण में हो। यह धारणा धीरे-धीरे हमारी सोच का हिस्सा बन गई है कि हमारे भाव और प्रतिक्रियाएं दूसरे लोग तय करते हैं।
निर्मला बहन ने इसे स्पष्ट करते हुए कहा कि वास्तव में हमारी भावनाओं का नियंत्रण हमारे ही हाथ में होना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि हमारा मन एक टेलीविजन की तरह है, तो उसका रिमोट भी हमारे पास ही होना चाहिए। यदि हम यह रिमोट दूसरों के हाथ में दे देते हैं, तो वे सही बटन दबाने पर हमें खुश और गलत बटन दबाने पर परेशान कर सकते हैं। लेकिन जब हम स्वयं इस रिमोट को संभालते हैं, तब हम अपनी भावनात्मक स्थिति को स्थिर और संतुलित रख सकते हैं।
उन्होंने कहा कि जीवन में कई बार ऐसी परिस्थितियां आती हैं जब हमें नकारात्मकता, क्रोध या तनाव का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में हमारे पास हमेशा दो विकल्प होते हैं—या तो हम भावनात्मक रूप से प्रभावित होकर प्रतिक्रिया दें या फिर शांत और स्थिर रहकर स्थिति का सामना करें। जब हम स्वयं को स्थिर रखते हैं, तो न केवल हम अपने मन को सुरक्षित रखते हैं बल्कि अपने आसपास के लोगों को भी शांति और सुकून का अनुभव कराते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि हम दूसरों के व्यवहार या परिस्थितियों की परवाह किए बिना शांति, प्रेम और सम्मान के साथ प्रतिक्रिया देना सीख लें, तो जीवन अधिक संतुलित और सुखद बन सकता है। इसके लिए आवश्यक है कि हम अपनी आंतरिक शक्ति को बढ़ाएं और सकारात्मक सोच को विकसित करें।
निर्मला बहन ने बताया कि ब्रह्माकुमारी संस्थान में प्रतिदिन निःशुल्क राजयोग मेडिटेशन का प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसके माध्यम से व्यक्ति अपने मन को नियंत्रित करना, सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना और जीवन की चुनौतियों का शांतिपूर्वक सामना करना सीख सकता है। उन्होंने कहा कि राजयोग केवल ध्यान की विधि ही नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक सकारात्मक कला है, जो व्यक्ति को मानसिक शांति, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करती है।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने भी आध्यात्मिक जीवन, आत्म-नियंत्रण और सकारात्मक सोच के महत्व पर अपने विचार साझा किए और नियमित रूप से राजयोग अभ्यास करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर कई स्थानीय श्रद्धालु और ब्रह्माकुमारी परिवार के सदस्य उपस्थित थे।
Reviewed by PSA Live News
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8:25:00 pm
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