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मीन संक्रांति के पुण्यकाल में तिरुपति बालाजी मंदिर में 922वां खिचड़ी भंडारा, 1392 श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया महाप्रसाद


रांची। 
मीन राशि की सूर्य संक्रांति के पावन अवसर पर दिव्यदेशम् श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर (तिरुपति बालाजी) मंदिर में 922वें खिचड़ी भंडारा का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर भगवान के दर्शन किए और खिचड़ी महाप्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। धार्मिक अनुष्ठानों और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में कुल 1392 भक्तों ने खिचड़ी महाप्रसाद ग्रहण किया।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रातःकाल भगवान अखिललोकलोकेश्वर देवदेवोत्तम श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर के विशेष पूजन और उद्यास्तमन सेवा से हुई। इस दौरान भगवान के मूल विग्रह सहित चतुर्व्यूह मूर्तियों का भव्य महाभिषेक कराया गया। महाभिषेक के क्रम में समुज्ज्वला अभिषेकम्, परिरंजीत शुद्धोधक अभिषेकम्, गंगाजल अभिषेकम्, महाहरीद्राजल अभिषेकम् तथा केसर मिश्रित जल से विशेष अभिषेक संपन्न हुआ। इसके अलावा गौक्षीर, दधि और अन्य पवित्र द्रव्यों से भी भगवान का विधिवत अभिषेक किया गया।

अभिषेक के पश्चात भगवान को दिव्य वस्त्र और आभूषणों से अलंकृत कर भव्य महाआरती की गई। मंदिर परिसर में घंटानाद, नादस्वर और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। इसके उपरांत भगवान को खिचड़ी महाप्रसाद का भोग अर्पित किया गया। पुजारियों द्वारा विविध पूजोपचार संपन्न कर सुश्राव्य वेदध्वनियों और देशिक स्तोत्रों के मंत्रों से भगवान का स्तवन किया गया।

आज के खिचड़ी महाप्रसाद के मुख्य यजमान रांची निवासी श्री विकास शर्मा एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती रूचिता शर्मा रहे, जिन्होंने श्रद्धापूर्वक भगवान को महाप्रसाद अर्पित किया। वहीं उद्यास्तमन सेवा एवं महाभिषेक के यजमान श्री दीपक सुलतानिया एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती नेहा सुलतानिया रहे। दोनों परिवारों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया।

मंदिर प्रबंधन के अनुसार, मीन संक्रांति के इस पावन पर्व पर आयोजित खिचड़ी भंडारा की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है और इसमें हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।

इसी क्रम में मंदिर के विद्वान आचार्यों ने बताया कि चैत्र कृष्ण पक्ष की पापों का नाश करने वाली पापमोचनी एकादशी इस वर्ष 15 मार्च (रविवार) को मनाई जाएगी। वृद्धि एकादशी में दशमी का मान अधिक होने के कारण वैष्णव परंपरा के अनुसार दशमी-विद्ध प्रथम एकादशी (शनिवार) का त्याग कर दूसरी एकादशी (रविवार) को ही व्रत के लिए ग्राह्य माना जाएगा।

धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन सूर्योदय स्पर्श होने के कारण एकादशी व्रत के लिए यह तिथि पूर्ण मानी जाएगी, जबकि अगले दिन सूर्योदय स्पर्श द्वादशी में व्रत का पारण किया जाएगा। श्रद्धालु 16 मार्च (सोमवार) को प्रातः 7:40 बजे तक एकादशी व्रत का पारण कर सकेंगे।

इस प्रकार मीन संक्रांति के पावन अवसर पर आयोजित धार्मिक अनुष्ठानों, महाभिषेक और खिचड़ी भंडारा के माध्यम से मंदिर परिसर में पूरे दिन भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का वातावरण बना रहा।

मीन संक्रांति के पुण्यकाल में तिरुपति बालाजी मंदिर में 922वां खिचड़ी भंडारा, 1392 श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया महाप्रसाद मीन संक्रांति के पुण्यकाल में तिरुपति बालाजी मंदिर में 922वां खिचड़ी भंडारा, 1392 श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया महाप्रसाद Reviewed by PSA Live News on 8:35:00 pm Rating: 5

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