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डीएआरई के सचिव एवं भाकृअनुप के महानिदेशक का भाकृअनुप-आईआईएबी, राँची दौरा



रांची। 
डॉ. मंगी लाल जाट, सचिव, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) तथा महानिदेशक, भाकृअनुप, भारत सरकार, ने डॉ. देवेंद्र कुमार यादव, उप महानिदेशक (फसल विज्ञान), भाकृअनुप एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों—डॉ. पी. के. सिंह, कृषि आयुक्त, भारत सरकार, डॉ. लक्ष्मी कांत, डॉ. सी. विश्वनाथन, डॉ. बी. पी. भट्ट तथा डॉ. ए. कर—के साथ गढ़खटंगा, राँची स्थित भाकृअनुप-भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (भाकृअनुप-आईआईएबी) का दौरा किया।

इस अवसर पर गणमान्य अतिथियों को संस्थान द्वारा किए जा रहे अनुसंधान एवं विकास कार्यों की जानकारी दी गई, जिसकी सभी ने सराहना की। डॉ. जाट ने भाकृअनुप-आईआईएबी में अधोसंरचना विकास की तेज़ प्रगति की प्रशंसा की तथा निदेशक डॉ. सुजय रक्षित के नेतृत्व में संस्थान के वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों के समर्पित प्रयासों को सराहा। अपने दौरे के दौरान डॉ. जाट ने प्रिसिजन ब्रीडिंग कॉम्प्लेक्स की आधारशिला रखी, जिसमें स्पीड ब्रीडिंग सुविधा, हाई-टेक ट्रांसजेनिक ग्लासहाउस, हाई-टेक ट्रांसजेनिक नेट हाउस तथा ट्रांसजेनिक ग्रीनहाउस शामिल हैं। इसके साथ ही उन्होंने संस्थान में पशु शेड निर्माण की भी आधारशिला रखी। अपने संबोधन में उन्होंने भविष्य की कृषि चुनौतियों से निपटने के लिए अत्याधुनिक अनुसंधान अधोसंरचना के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला तथा कहा कि प्रिसिजन ब्रीडिंग कॉम्प्लेक्स जैसी सुविधाएं फसलों की त्वरित प्रजनन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इससे कम समय में अधिक उत्पादन देने वाली एवं जलवायु सहनशील फसल किस्मों के विकास में सहायता मिलेगी, जो खाद्य सुरक्षा एवं राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा। उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक अनुसंधान सुविधाओं में मानव संसाधन का विकास भारतीय कृषि की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने एवं सतत कृषि विकास सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। पशु शेड सुविधा को समर्पित करते हुए उन्होंने ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण के महत्व पर भी जोर दिया, जो पशु एवं मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

डॉ. यादव ने रेन-आउट शेल्टर सुविधा का उद्घाटन किया, जो फसलों के लिए नियंत्रित मौसम परिस्थितियां उपलब्ध कराने में सहायक होगी, जिससे सटीक प्रयोग, सूखा अध्ययन एवं प्रभावी जल प्रबंधन संभव हो सकेगा। इस सुविधा को समर्पित करते हुए उन्होंने देश के लिए, विशेषकर छोटानागपुर पठार क्षेत्र में, जलवायु जोखिमों से निपटने हेतु जलवायु सहनशील किस्मों के विकास के महत्व पर बल दिया। उन्होंने नवाचार आधारित कृषि अनुसंधान को बढ़ावा देने एवं किसानों की आजीविका में सुधार लाने में भाकृअनुप-आईआईएबी की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की।

डॉ. सुजय रक्षित, निदेशक, भाकृअनुप-आईआईएबी, ने संस्थान की अनुसंधान पहलों एवं तकनीकी हस्तक्षेपों की विस्तार से जानकारी दी, जो न केवल झारखंड के किसानों के लिए लाभकारी होंगे, बल्कि पूरे देश के कृषि विकास में योगदान देंगे। उन्होंने कहा कि भाकृअनुप-आईआईएबी जैसे संस्थान वैज्ञानिक नवाचारों को व्यावहारिक समाधान में परिवर्तित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे अनुसंधान और खेत स्तर के अनुप्रयोग के बीच की दूरी कम होती है। इन अत्याधुनिक सुविधाओं से फसल सुधार एवं जलवायु सहनशील कृषि के क्षेत्र में उन्नत अनुसंधान की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की अपेक्षा है। कार्यक्रम में डॉ. विजय पाल भदाना, संयुक्त निदेशक (अनुसंधान) सहित भाकृअनुप-आईआईएबी, राँची के सभी वैज्ञानिक, कर्मचारी एवं छात्र उपस्थित रहे।

डीएआरई के सचिव एवं भाकृअनुप के महानिदेशक का भाकृअनुप-आईआईएबी, राँची दौरा डीएआरई के सचिव एवं भाकृअनुप के महानिदेशक का भाकृअनुप-आईआईएबी, राँची दौरा Reviewed by PSA Live News on 10:23:00 pm Rating: 5

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