राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस की पूर्व संध्या पर रांची विश्वविद्यालय में भव्य आयोजन, छात्रों ने नाटक व क्विज के जरिए समझाई पंचायत की ताकत
रांची। राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस की पूर्व संध्या पर रांची विश्वविद्यालय के ग्रामीण विकास पाठ्यक्रम (एम.ए. इन रूरल डेवलपमेंट) द्वारा डॉ. एल. पी. विद्यार्थी सभागार में एक भव्य एवं जागरूकतापरक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं, प्राध्यापकों और संकाय सदस्यों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। आयोजन का मुख्य उद्देश्य छात्रों में पंचायती राज व्यवस्था के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें ग्रामीण विकास की दिशा में सक्रिय योगदान के लिए प्रेरित करना था।
कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत भाषण से हुई, जिसे छात्र सूर्यजीत घोष ने प्रस्तुत किया। उन्होंने पारंपरिक ‘पहड़ा व्यवस्था’ को पंचायती राज से जोड़ते हुए जनजातीय समाज के सशक्तिकरण के प्रभावी उदाहरण दिए। इसके बाद छात्र सत्यम चौधरी ने बलवंत राय मेहता समिति की सिफारिशों और पंचायती राज व्यवस्था से ग्रामीणों को मिले अधिकारों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण छात्रों द्वारा प्रस्तुत नाटक “सरकार आपके द्वार” रहा, जिसमें पंचायत व्यवस्था की महत्ता और ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं की पहुंच को जीवंत रूप में दर्शाया गया। इस नाटक में छात्रों ने झारखंड सरकार के प्रतिनिधि, प्रखंड अधिकारी, पंचायत सचिव, एनजीओ प्रतिनिधि और ग्रामीणों की भूमिकाएं निभाते हुए स्थानीय शासन की वास्तविक तस्वीर प्रस्तुत की। दर्शकों ने इस प्रस्तुति की सराहना की।
इसके पश्चात होलिका और सत्यम के नेतृत्व में पंचायती राज व्यवस्था पर आधारित एक रोचक क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में छात्रों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। दिलेश्वर लोहरा ने सर्वाधिक सही उत्तर देकर प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि आस्था कुमारी द्वितीय स्थान पर रहीं।
इस अवसर पर कार्यक्रम की समन्वयक डॉ. एस. जे. मिंज ने विजेताओं को पुरस्कार प्रदान करते हुए कहा कि पंचायती राज व्यवस्था वास्तव में जनता के हाथों में शासन की शक्ति सौंपने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि बलवंत राय मेहता द्वारा प्रस्तुत यह व्यवस्था गांवों को सशक्त बनाने का एक प्रभावी और अचूक साधन है, जिससे ग्रामीण समाज को सीधे लाभ मिल रहा है।
विभाग के प्राध्यापक डॉ. अटल पांडेय ने अपने संबोधन में कहा कि “भारत की आत्मा गांवों में बसती है, और इस आत्मा को सशक्त व जीवंत बनाए रखने में पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।” उन्होंने स्थानीय स्वशासन की मजबूती को देश के समग्र विकास की आधारशिला बताया।
कार्यक्रम में प्राध्यापिका शीरीन गुल और अंजलि सिंह ने छात्रों को ग्राम स्तर पर नेतृत्व और भागीदारी के लिए प्रेरित किया, वहीं मानव विज्ञान विभाग की प्राध्यापिका मालवी विश्वकर्मा ने पंचायती राज व्यवस्था की गहराई और उसकी सामाजिक उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का सफल संचालन सुमित कुमार और आस्था कुमारी ने किया। आयोजन को सफल बनाने में डॉ. सुनीता मिश्रा, अमर श्रीवास्तव, शंकर राम, नदीम जावेद, कुंदन, जोसेफिन सहित अनेक छात्रों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
यह कार्यक्रम न केवल शैक्षणिक दृष्टि से समृद्ध रहा, बल्कि इसने छात्रों के भीतर ग्रामीण विकास और लोकतांत्रिक भागीदारी के प्रति नई ऊर्जा और जागरूकता का संचार भी किया।
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