रांची में भगवान परशुराम जयंती धूमधाम से मनाई गई, ब्राह्मण समाज के उत्थान व अधिकार संरक्षण पर हुई गंभीर चर्चा
रांची: झारखंड की राजधानी रांची में सर्व ब्राह्मण समाज के तत्वावधान में भगवान भगवान परशुराम की जयंती बड़े ही श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। यह आयोजन बड़ा तालाब स्थित शिव मंदिर प्रांगण में संपन्न हुआ, जहां सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही।
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कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत पूजा-अर्चना से हुई, जिसमें भगवान परशुराम की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर मंगलकामनाएं की गईं। इसके बाद सामूहिक आरती आयोजित की गई और श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। पूरे वातावरण में भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का माहौल देखने को मिला।
कार्यक्रम की अध्यक्षता राजीव रंजन मिश्रा ने की। अपने संबोधन में उन्होंने ब्राह्मण समाज की एकता, सामाजिक जिम्मेदारी और सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज के पिछड़े एवं वंचित वर्गों के उत्थान के लिए संगठित प्रयास करना समय की आवश्यकता है।
सभा के दौरान वक्ताओं ने देश के विभिन्न हिस्सों में ब्राह्मण समाज के प्रति कथित भेदभाव और नकारात्मक धारणा पर चिंता व्यक्त की। कई वक्ताओं ने कहा कि बिना ठोस आधार के “ब्राह्मणवाद” जैसे शब्दों का प्रयोग कर समाज को बदनाम करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिसे रोकने की जरूरत है। इस संदर्भ में एक ऐसे कानूनी ढांचे की आवश्यकता पर भी विचार किया गया, जो सभी वर्गों की तरह ब्राह्मण समाज के अधिकारों की भी समान रूप से रक्षा सुनिश्चित कर सके।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि वर्तमान समय में ब्राह्मण समाज के कई लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए उचित मंच और न्याय नहीं मिल पाता है। ऐसे में न्याय व्यवस्था को और अधिक समावेशी बनाने की आवश्यकता है, ताकि समाज के हर वर्ग को समान अवसर और न्याय मिल सके।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने इतिहास में ब्राह्मण समाज के योगदान को भी याद किया। उन्होंने महर्षि दधीची, आचार्य चाणक्य, चंद्रशेखर आज़ाद, तात्या टोपे और राजगुरु जैसे महापुरुषों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि ब्राह्मण समाज ने हमेशा देश, धर्म और समाज के लिए त्याग और बलिदान दिया है।
हालांकि, वक्ताओं ने यह भी कहा कि आजादी के बाद से ब्राह्मण समाज को कई बार निशाना बनाया गया है और उन्हें शोषक या बाहरी जैसे शब्दों से संबोधित किया जाता है, जो चिंताजनक है। इस पर सरकार और समाज दोनों को गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
अंत में कार्यक्रम में यह संकल्प लिया गया कि ब्राह्मण समाज न केवल अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित होगा, बल्कि समाज के समग्र विकास और विश्व कल्याण के लिए अपनी परंपरा के अनुरूप योगदान देता रहेगा।
Reviewed by PSA Live News
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5:33:00 pm
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